Sarvan Kumar 12/09/2018
माता रानी ये वरदान देना,बस थोड़ा सा प्यार देना,आपकी चरणों में बीते जीवन सारा ऐसा आशीर्वाद देना। आप सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएं। नव दुर्गा का पहला रूप शैलपुत्री देवी का है। ये माता पार्वती का ही एक रूप हैं हिमालयराज की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री भी कहा जाता है। नवरात्रि के पहले दिन मां के शैलपुत्री रूप का पूजन होता है. Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 27/08/2020 by Sarvan Kumar

1.मोहन भागवत का पूरा नाम मोहनराव मधुकरराव भागवत है. इनका जन्म 11 सितम्बर, 1950 में महाराष्ट्र के छोटे से नगर चन्द्रपुर में हुआ.

2. पेशे से पशु चिकित्सक मोहन भागवत वर्तमान समय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक हैं. मोहन भागवत 2009 में के एस सुदर्शन की सेवानिवृत्ति के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक बने.

3. भागवत का पूरा परिवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा रहा है. उनके पिता मधुकर राव ने ही लालकृष्ण आडवाणी का आरएसएस से परिचय करवाया था. मोहन भागवत तीन भाई और एक बहन चारो में सबसे बड़े हैं. भागवत के छोटे भाई चंद्रपुर आरएसएस इकाई के अध्यक्ष है.

4. मोहन भागवत को संघ का स्पष्ट भाषी, विनम्र और व्यवहारिक , एक स्पष्ट दूरदृष्टि रखने वाला नेता माना जाता है.

5. मोहन भागवत अपने संयम के लिए जाने जाते हैं. भागवत खामोशी से लेकिन दृढ़ता से अपना काम करने में विश्वास करते हैं. उन्होंने कभी भी संघ की मर्यादा से बाहर जाकर मीडिया में या कहीं और कोई बयान नहीं दिया.

6. मोहन भागवत हिन्दुत्व के विचार को आधुनिकता के साथ आगे ले जाने के लिए जाने जाते हैं. वो एक तरफ भारत के समृद्ध गौरवशाली प्राचीन भारतीय मूल्यों पर जोर देतें हैं तो उसरी तरफ आधुनिकीकरण को स्वीकार करते हैं.

7. हिन्दू समाज में जातिवाद, भेदभाव और छुआछूत पर भागवत का कहना है कि छुआछूत के लिए समाज में कोई स्थान नहीं होना चाहिए और जातिगत भेदभाव को मिलकर दूर करने का प्रयास हर हिन्दू को करना चाहिए. सबको स्थान और सम्मान मिलना चाहिए.

8.हिन्दुओं को हजारों सालों से प्रताड़ित किया गया है. यदि कोई शेर अकेला होता है, तो जंगली कुत्ते भी उस पर हमला कर अपना शिकार बना सकते हैं.’ हिन्दू एकजुट हों और मानवता की बेहतरी के लिये काम करें. हिंदू समाज तभी समृद्ध होगा जब वह समाज के रूप में काम करेगा.

9.हिंदू धर्म में कीड़े को भी नहीं मारा जाता है, बल्कि उस पर नियंत्रण किया जाता है.

10. 2018 में शिकागो मे हुए विश्व हिन्दू सम्मलेन में मोहन भागवत ने कहा था कि हिंदुओं में वर्चस्व बनाने की कोई महत्वाकांक्षा नहीं, आक्रामकता नहीं है. एक समाज के रूप में हिंदुओं को एकत्र आना चाहिए और मानव जाति के कल्याण के लिए कोशिश की जानी चाहिए.

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