Sarvan Kumar 07/09/2018
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Last Updated on 20/09/2023 by Sarvan Kumar

चाणक्य चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। वे कौटिल्य या विष्णुगुप्त नाम से भी विख्यात हैं। चणक नामक व्यक्ति के पुत्र होने के कारण वह चाणक्य कहे गए।चाणक्य नीति या चाणक्य नीतिशास्त्र चाणक्य द्वारा रचित एक नीति ग्रन्थ है। संस्कृत-साहित्य में नीतिपरक ग्रन्थों की कोटि में चाणक्य नीति का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इसमें सूत्रात्मक शैली में जीवन को सुखमय एवं सफल बनाने के लिए उपयोगी सुझाव दिये गये हैं। आइए जानते हैं  सुखी जीवन के लिए चाणक्य की 10 बातें

सुखी जीवन के लिए चाणक्य की 10 बातें

1. जो बीत गया उसके लिए न पछताओ.

भविष्य की चिंता भी ना करो. बुद्धिमान मनुष्य केवल वर्तमान में जीते हैं.

2. धनवान व्यक्ति के अनेक सम्बन्धी होते है.

धनवान को ही मनुष्य कहा जाता है और पैसेवालों को ही पंडित समझा जाता है. दुःख के साथी
मनुष्य को दुःख या विपत्ति में 3 ही साथ देते हैं-

1. संतान-पुत्र और पुत्री

2.पत्नी
3. भगवान् के भक्त.

3. वह मनुष्य धरती पर ही स्वर्ग को पा लेता है:

१. जिसके पुत्र आज्ञाकारी हैं.
२. जिसकी पत्नी आज्ञाकारी है और व्यव्हार अच्छा है.
३. जिसे अपने धन पर संतोष है.

4. उस घर में धन की देवी लक्ष्मी स्वयं वहां चली आती है जहाँ-

1. मूर्खों का सम्मान नहीं होता.
२. अनाज का अच्छी तरह तरह से भंडारण किया जाता है.
३. पति, पत्नी मे आपस मे लड़ाई बखेड़ा नहीं होता है.

5. इन 5 पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए-:

1. नदियां
2. जिन व्यक्तियों के पास अश्त्र-शस्त्र हों
3. नाख़ून और सींग वाले जानवर
4. औरतें
5. राज घरानो से सम्बन्ध रखने वाले लोग

सच्चा मित्र कौन है?
6. सच्चा मित्र वही है जो इन परिस्थितियों में साथ ना छोड़े:

1. जरूरत पड़ने पर
2. दुर्घटना या संकट में
3. अकाल में
4. जब युद्ध हो रहा हो
5. राजा के दरबार मे जाने पर , और
6. जब समशान घाट जाना पड़े.

7.ये सब करने से एक पंडित भी घोर कष्ट में आ जाता है.

मूर्खों को उपदेश देने से, दुष्ट पत्नी का पालन-पोषण करने से और किसी दुखी व्यक्ति के साथ अतयंत घनिष्ठ सम्बन्ध होने से एक पंडित भी घोर कष्ट में आ जाता है.

8. किसी बुरे मित्र पर तो कभी विश्वास ना करे

एक अच्छे मित्र पर भी विश्वास ना करें. क्योंकि अगर ये आपसे रुष्ट होते है तो आप के सभी राज से पर्दा खोल देंगे.

9. वो माता-पिता शत्रु के समान हैं जो अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं देते हैं.

विद्याहीन बालक विद्वानों की सभा में वैसे ही तिरस्कृत किये जाते हैं जैसे हंसो की सभा मे बगुले.

10. जो लोग आपके सामने मीठी बातें करते हैं , आपके पीठ पीछे आपकी बर्बादी की योजना बनातें हैं.

ऐसे लोगों से बचें. ऐसे लोग उस विष के घड़े के समान है जिसकी उपरी सतह दूध से भरी है.

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