Sarvan Kumar 03/09/2021

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Last Updated on 03/09/2021 by Sarvan Kumar

जब हम नक्षत्रों की बात कर रहे होते हैं तब इसका मतलब यह होता है कि ज्योतिष दृष्टिकोण से बात हो रही है.ज्योतिष शास्त्र मे नक्षत्रों का अधिक उपयोग होता है.आज के समय मे ज्योतिष शास्त्र का नाम सुनते हीं कुछ लोग बचकर निकलने का प्रयास करना चाहते हैं.मगर कुछ लोग इसमे विश्वास भी रखते हैं.यह वैसे हीं एक पूर्ण विषय है,जैसे कोई गणित और विज्ञान.विश्व के जितने भी गणितज्ञ हुए हैं,जिन्होने गणित और विज्ञान के क्षेत्र मे अपने थ्योरी और फार्मूलों की खोज से अहम योगदान दिए हैं वे सभी ज्योतिष रह चुके हैं.चाहे हम हजारो साल पूर्व शून्य का खोज करने वाले आर्यभट्ट की बात करें,चाहे 16 वीं-17वीं शताब्दी मे Law of Planatery Motion देने वाले केपलर की बात करें.Newton को कौन नही जानता ये सभी Mathematician के साथ एक ज्योतिष भी थे.ऐसे गणितज्ञ और वैज्ञानिकों की लिस्ट बहुत लंबी है. आइए जानते हैं नक्षत्र क्या है, 27 नक्षत्रों के नाम और मानव जीवन में ज्योतिष विज्ञान का क्या  महत्व है।

मानव जीवन में ज्योतिष  विज्ञान का महत्व

ज्योतिष विद्या एक सहायक के रूप मे कार्य करता है,पुराने समय मे आसमान और अंतरिक्ष के बारे मे कुछ अध्ययन करने के लिए आज की तरह आधुनिक टेलीस्कोपें या मशीनें नही थी. इसलिए अंतरिक्ष संबंधी जानकारियों के लिए वैज्ञानिक ज्योतिष विद्या की सहायता लेते थे. इतने विद्वान और बड़े-बड़े वैज्ञानिक इस शास्त्र को एक अहम विषय मानते थे,  इसी से इस विद्या के प्रमाणिकता का अंदाजा लगाया जा सकता है.

ज्योतिष शास्त्र के नाम पर ठगी करने वालों से बचें, आप पहले स्वयं इसके बारे मे कुछ Basic अध्ययन करें, फिर आपके लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है, फिर ठगाने का संभावना बहुत कम रहेगा. ज्योतिष शास्त्र की सहायता से इसमे निपुण व्यक्ति हीं भविष्यवाणी कर सकता है. इस लेख के मुख्य उद्देश्य पर वापस लौटते हैं.

नक्षत्र क्या है और इससे जुड़े इतिहास की क्या कहानी है?

चंद्रमा जिस पथ पर घूमकर पृथ्वी का चक्कर लगाती है, उस पथ पर आने वाले तारा समूहों को नक्षत्र कहते हैं. वास्तव मे ये तारा समूह चंद्रमा से बहुत दूर होते हैं, मगर जब हम पृथ्वी से इन तारा समूहों को देखते हैं तो यह चंद्रमा के पथ पर प्रतित होता है. इन तारा समूह को तारामंडल भी कहते हैं. नक्षत्रों की कहानी बहुत दिलचस्प  है.

प्राचीन समय मे लोगों ने चंद्रमा के पथ पर कुछ तारा के बीच मे एक imaginary line खिंचकर एक अलग-अलग आकृति का पता लगाया, जो पृथ्वी पर उपस्थित किसी ना किसी वस्तु से मेल खाती थी. जैसे अश्वनी नक्षत्र की पहचान घोड़े के आकृति के रूप मे की जाती है. पुनर्वसु नक्षत्र को धनुष, मघा नक्षत्र को हल, हस्त नक्षत्र को हाथ के पंजा, ज्येष्ठा नक्षत्र को सांप, मुल नक्षत्र को शंख, श्रवण नक्षत्र को तीर या त्रिशुल के आकृति के रूप मे पहचान किया जाता है.

इस आकृति को imagine करने के लिए जितने तारों का इस्तेमाल होता था, उसे एक समूह का माना जाता है. इन तारा समूह को तारामंडल भी कहा जाता है. अंतरिक्ष मे ऐसे बहुत तारामंडल हैं, जिसे हम भूगोल मे पढ़ते हैं. तारामंडल को अंग्रेजी मे constellation कहा जाता हं. मगर जो तारामंडल चंद्रमा पथ से जुड़े हुए हैं, उन तारामंडल को नक्षत्र कहते हैं. पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए चंद्रमा 27 नक्षत्रों से गुजरता है.

27 नक्षत्रों के नाम निम्नलिखित हैं

(1.) अश्विनी (2.) भरणी (3.) कृत्तिका (4.) रोहिणी (5.) मृगशिरा (6.) आर्द्रा (7.) पुनर्वसु (8.) पुष्य (9.) अश्लेषा (10.) मघा (11.) पूर्वाफाल्गुणी (12.) उत्तराफाल्गुणी (13.) हस्त (14.) चित्रा (15.) स्वाति (16.) विशाखा (17.) अनुराधा (18.) ज्येष्ठा (19.) मुल (20.) पुर्वाषाढ़ा (21.) उत्तरषाढ़ा (22.) श्रवण (23.) धनिष्ठा प्रवेश (24.) शतभिषा (25.) पूर्वभाद्रपद (26.) उत्तरभाद्रपद (27.) रेवती.

नक्षत्रों का महत्व और उपयोग

ज्योतिष शास्त्र में पूरे आसमान को 360 डिग्री मान लिया गया है और इसे 27 भागों मे बांट दिया गया है. प्रत्येक भाग एक नक्षत्र कहलाता है. यह प्रत्येक नक्षत्र एक विशेष आकृति वाले तारामंडल का प्रतिनिधित्व करता है. जैसा कि ऊपर बताया गया है. यदि 360 डिग्री को 27 से भाग दिया जाए तो एक नक्षत्र का सीमा 13 डिग्री 20 मिनट का होता है.

ये 27 नक्षत्र ज्योतिष शास्त्र मे विशेष आकृति वाले तारासमूहों के साथ,विशेष गुणों का भी प्रतिनिधित्व करते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नक्षत्रों और राशियों का किसी मनुष्य के जीवन पर बहुत प्रभाव होता है. जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र से गुजड़ रहा होता है, उसी नक्षत्र के अनुसार व्यक्ति के गुण,स्वाभाव और जीवन शैली का पता लगाया जाता है. यह ध्यान दें कि यह सब पता लगाने के लिए व्यक्ति के जन्म का सही समय, तारीख और स्थान का पता होना आवश्यक है.

किसी व्यक्ति के बारे मे यह सब पता लगाने के लिए कुछ और महत्वपूर्ण चीजों का जरूरत पड़ता है. प्रत्येक नक्षत्र को 4 चरण में बांटा गया है. 27 नक्षत्र के हिसाब से 27 को 4 से गुणा करने पर कुल 108 चरण हो जाते हैं. एक चरण 3 डिग्री 20 मिनट का होता है. इस तरह ज्योतिष पद्धति मे 27 नक्षत्र,108 चरण और इसके अलावा 12 राशियों का भी बहुत महत्व होता है.

राशी का संबंध सूर्य के गति से है.राशियों के बारे मे किसी दूसरे लेख मे चर्चा किया जाएगा.

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