Last Updated on 16/06/2023 by Sarvan Kumar
गुरु जांभोजी (Jambhoji) को जंभेश्वर के नाम से भी जाना जाता है. वह एक महान संत थे जो 15 वीं शताब्दी में राजस्थान के पीपासर नामक गांव में जन्मे थे. जांभोजी ने विश्नोई संप्रदाय की स्थापना कर जीव कल्याण व वृक्षों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण व चमत्कारी कार्य किया. उन्होंने विश्नोई संप्रदाय की स्थापना करते हुए 29 नियम दिए थे. उन्ही 29 नियमों के कारण उनके इस संप्रदाय को बिश्नोई (20+9 = बीस+नौ) नाम दिया गया था. कालांतर में बिश्नोई शब्द विश्नोई में बदल गया है.
विश्नोई संप्रदाय के 29 नियम
विश्नोई संप्रदाय के 29 नियम (29 Rules of Bishnoi) गुरु जंभेश्वर ने विश्नोई संप्रदाय के लिए 29 नियमों की रचना की थी जो कि निम्न हैं –
1. तीस दिन तक सूतक रखना.
2. झूठ नहीं बोलना.
3. वाद-विवाद का त्याग करना.
4.अमावस्या का व्रत रखना.
5. हरा वृक्ष नहीं काटना
6. निंदा नहीं करनी
7.चोरी नहीं करनी.
8.क्षमा दया धारण करना.
9. वाणी विचार कर बोलना.
10. प्रतिदिन सवेरे स्नान करना.
11. अमल नहीं खाना.
12. तंबाकू का सेवन नहीं करना.
13.भांग नहीं पीना.
14.मांस नहीं खाना
15.मद्यपान नहीं करना
16 बैल बधिया नहीं कराना।
17. रसोई अपने हाथ से बनानी.
18. काम, क्रोध आदि अजरों को वश में करना.
19. थाट अमर रखना.
20.भगवान विष्णु का भजन करना
21. संध्या समय आरती और हरिगुण गाना.
22.नीला वस्त्र व नील का त्याग करना.
23. निष्ठा व प्रेम पूर्वक हवन करना
24. पांच दिन ऋतुवन्ती स्त्री का गृह कार्य से पृथक रहना.
25. पानी, ईंधन और दूध को छानकर प्रयोग में लेना.
26.शील का पालन करना व संतोष रखना.
27.बाह्य व आंतरिक पवित्रता रखना.
28.द्विकाल संध्या उपासना करना
29. जीव दया पालनी.
बिश्नोई समुदाय के सभी लोग इन नियमों का अनुसरण करते हैं तथा अपने जीवन को सार्थक बनाते हैं. परंतु कुछ ऐसे नियम भी हैं जिन्हें बिश्नोई लोग अपने समुदाय का मुख्य आधार नियम मानते हैं जिनमें वृक्षों की रक्षा करना, जीव-जंतुओं की रक्षा करना, शाकाहारी भोजन करना आदि हैं.
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