Pinki Bharti 06/06/2018
नहीं रहे सबके प्यारे ‘गजोधर भैया’। राजू श्रीवास्तव ने 58 की उम्र में ली अंतिम सांस। राजू श्रीवास्तव को दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद से वो 41 दिनों से दिल्ली के एम्स में भर्ती थे। उनकी आत्मा को शांति मिले, मुझे विश्वास है कि भगवान ने उसे इस धरती पर रहते हुए जो भी अच्छा काम किया है, उसके लिए खुले हाथों से स्वीकार करेंगे #RajuSrivastav #IndianComedian #Delhi #AIMS Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 13/12/2021 by Sarvan Kumar

गर्भावस्था में कब्ज़ की समस्या बहुत आम बात है. गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं. गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय फ़ैल जाता है.आँतों की मांशपेशियों को गर्भावस्था के दौरान आराम की जरूरत होती है. प्रेग्नेंसी हॉर्मोन प्रोजेस्टीरोन का स्तर बढ़ जाता है. प्रोजेस्टीरोन हॉर्मोन के बढ़ने के कारण पाचन तंत्र से भोजन के गुजरने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है जिसके कारण आँतों में इकट्ठे अपशिष्ट पदार्थ वहीं पड़े रह जाते हैं और कब्ज की समस्या पैदा हो जाती है.आइए जानते हैं प्रेगनेंसी में कब्ज का इलाज इन हिंदी, 5 घरेलू उपचार.

1.उच्च फाइबर युक्त भोजन खाएं

फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ कब्ज की समस्या से राहत दिलाता  है. इसलिए गर्भावस्था में ऐसे भोजन करने चाहिए जिसमें  फाइबर की मात्रा ज़्यादा हो. सीरियल्स , दलहन , साबुत अनाज की चपाती मटर, सेम, ताजे फल , अमरूद, गाजर , सब्जियाँ , फूलगोभी और सूखे फल फाइबर के अच्छे सोर्स हैं. ध्यान रखें की अपने आहार में फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाये, नहीं तो अचानक से उच्च फाइबर युक्त आहार लेने से पेट में मरोड़ हो सकता है , पेट फुल सकता है और ज्यादा मात्रा में फाइबर लेने से गैस की समस्या हो सकती है.

2. एक बार में ज़्यादा भोजन ना करें-

गर्भावस्था के दौरान एक बार में ज़्यादा भोजन ना करें. एक बार में ज़्यादा भोजन करने से कब्ज़, गैस और अपच की समस्या हो सकती है. इसलिए डॉक्टर गर्भावस्था के दौरान एक ही बार में बहुत ज्यादा खाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा भोजन करने की सलाह देते हैं. गर्भावस्था के दौरान 6-8 बार छोटे-छोटे मील्स लें.

3. खूब सारा तरल पदार्थ लें

गर्भावस्था के दौरान तरल पदार्थ के सेवन की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए. गर्भावस्था में खूब सारा पानी पीएं. डॉक्टर्स गर्भावस्था के दौरान एक दिन में कम से कम 8 से 12 गिलास पानी पीने की सलाह देते हैं. पानी पीने के साथ-साथ गर्भवती महिलाएं ताजा फलों के जूस, नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी और लस्सी जैसे तरल पदार्थ के सेवन की मात्रा बढ़ा सकती हैं. सुबह उठते ही 2 गिलास गुनगुने पानी में नींबू का रस निचोड़ कर और एक चम्मच शहद डाल कर पीने से मलत्याग में आसानी होती है कब्ज़ से राहत मिलता है.

4.रिफाइंड और चिकनाई वाले फ़ूड से बचें

गर्भावस्था के दौरान इंस्टेंट नूडल्स , मैदा का इस्तेमाल आमतौर पर सफेद ब्रैड, पूरी, कुलचा, नान, केक और बिस्किट आदि का सेवन ना करें. मैदा की बजाय इनके पूर्ण अनाज या आटे वाले विकल्प का चयन करें.

5. व्यायाम करें-खुद को रखें एक्टिव

गर्भावस्था के दौरान हमेशा बैठी न रहें. चलती -फिरती रहें, घर के छोटे-मोटे काम करके खुद को एक्टिव रखें. गर्भावस्था के दौरान नियमित रूप से हल्के व्यायाम करने से कब्ज की समस्या से राहत मिलता है. गर्भावस्था के दौरान सुबह और शाम टहलना , स्थिर साइकिल को चलाना, योग और प्राणायाम करने से कब्ज की समस्या से राहत मिलता है.

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