Sarvan Kumar 19/06/2020
नहीं रहे सबके प्यारे ‘गजोधर भैया’। राजू श्रीवास्तव ने 58 की उम्र में ली अंतिम सांस। राजू श्रीवास्तव को दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद से वो 41 दिनों से दिल्ली के एम्स में भर्ती थे। उनकी आत्मा को शांति मिले, मुझे विश्वास है कि भगवान ने उसे इस धरती पर रहते हुए जो भी अच्छा काम किया है, उसके लिए खुले हाथों से स्वीकार करेंगे #RajuSrivastav #IndianComedian #Delhi #AIMS Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 19/06/2020 by Sarvan Kumar

हम हमेशा खुश रहना चाहते हैं, सभी खुश रहना चाहते हैं. क्या हम खुश रह पाते हैं? इसका उत्तर होगा नहीं. हम कोई ना कोई वजह से दु:ख में आ ही जाते हैं और हमारे होठों की मुस्कुराहट छिन जाती है. हम अपने जीवन को बेहतर बनाने में दिन रात लगे रहते हैं. कभी-कभी मेहनत के बाद भी हमें मनचाही सफलता नहीं मिल पाती है.हम निराश हो जाते हैं और भाग्य को कोसना शुरू कर देते हैं. ऐसे में हमें प्रिय जनों के साथ रिश्ते में कड़वाहट आ जाती है. मनचाही सफलता नहीं मिलने के कारण हमारा सवभाव चिड़चिड़ा हो जाता है, और हमारे अपने ही चाहने वाले धीरे-धीरे हमसे दूर चले जाते हैं। विद्वानों ने खुश रहने के लिए और मनचाही सफलता पाने के लिए अनेकों किताबें लिखी हैं। उन्हें किताबों के आधार पर हम आपके लिए कुछ अनमोल विचार सामने लाने का प्रयास किया है। विद्वानों ने कहा है कि अगर आप यह पांच चीजें छोड़ दें तो आप खुश भी रह लेंगे और आपको मनचाही सफलता भी मिल जाएगी।

ये पांच चीजें अभी से छोड़ दो

सबको खुश रखना

हम सबको खुश नहीं रख सकते. जरूरी नहीं कि हमारा विचार दूसरे के विचार से मिले. हम दूसरों को खुश रहने के चक्कर में अपने विचार को बदलते रहते हैं. इससे हमारा जीवन विरोधाभासों से भर जाता है और हम इसमें उलझ कर रह जाते हैं. हमें इस बात पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए कि ऐसा क्या है जो हमें खुश रख सकता है। हम उन्हीं चीजों को करें जिससे कि हम खुश रहें ना कि सब को खुश रखने में लगे रहे.

बहुत ज्यादा सोचना

हम कोई भी काम सोच समझ कर ही करते हैं. कोई भी निर्णय लेने से पहले हम उसके लाभ- हानि, अच्छे- बुरे के बारे मे सोचते हैं. अगर कभी हमें असफलता हाथ लगती है तो उसके कारणों के बारे में सोचते रहते हैं. हमसे कोई रूठ जाता है या नाराज हो जाता है तो हम उसको मनाने के तरीके सोचने लगते हैं। सोचना सही है पर बहुत ज्यादा सोचना हानिकारक है। हम अपना बहुमूल्य समय नष्ट कर देते हैं और दुःख के भागी बन जाते हैं।

दूसरों से ज्यादा उम्मीद करना

आए दिन हमें अपने प्रिय जनों से कोई न कोई शिकायत रहती ही हैं। किसी ने आपको कुछ कह दिया, किसी ने आपका बात नहीं सुना और किसी ने आपको वक्त पर धोखा दे दिया. हम एक शिकायत का पुलिंदा बांध कर लोगों के बीच आ जाते हैं और उन्हें अपने साथ हुए गलत व्यवहार के बारे में बताते रहते हैं। लोग इसे सुनकर हमारा मजाक उड़ाते हैं और हम दुःखी हो जाते हैं। हमें दूसरों से ज्यादा उम्मीद नहीं करना चाहिए. दूसरे लोगों की भी कुछ मजबूरियां होती है और हमें वे सारे मुद्दों पर समर्थन या मदद नहीं कर पातें. दूसरे से ज्यादा उम्मीद हमें दुःख का भागी बना देता है.

अतीत में जिंदगी जीना

जब हमारे साथ कुछ बुरा होता है तो हम अतीत में चले जाते हैं. हम यह सोचने में लगते हैं कि काश हम ऐसा नहीं करते तो यह नहीं होता. हम कोई ना कोई गलती करते ही रहते हैं और उस गलती के कारण हमारे जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ता है. हमें इसका पछतावा होता है और हम यह सोचने में लग जाते हैं कि, यह मैंने क्या गलत कर दिया. हम अतीत में चले जाते हैं और अपने आप को दोषी ठहराने में लग जाते हैं. ऐसे में हम अपना दैनिक क्रियाकलाप को सही से पूरा नहीं कर पाते और अपना बहुमूल्य समय नष्ट कर देते हैं.

खुद को किसी से कम समझना

हर व्यक्ति अपने आप में यूनिक होता है. कोई किसी से कम बुद्धिमान या ज्यादा बुद्धिमान नहीं होता .सभी में भगवान कुछ ना कुछ अलग हुनर देते हैं. हमें अपने आप को किसी से कम नहीं समझना चाहिए. हमें जो प्रतिभा मिला है उसी पर ध्यान देना चाहिए और उसी के अनुसार अपना काम करना चाहिए.

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