Sarvan Kumar 10/07/2018

मज़हब और तीन तलाक के नाम पर मुस्लिम महिलाओं पर हो रहे अत्याचार कम होने का नाम नहीं ले रहे. कहीं रोटी जल जाने पर तीन तलाक दिया जा रहा तो कहीं बुरका नहीं पहनने पर मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक देकर घर से निकला जा रहा. कहीं मुस्लिम महिलाओं के साथ उसके शौहर का दोस्त हलाला कर रहा तो कहीं ससुर. ना जाने तीन तलाक और हलाला के नाम पर और कितनी ज़िंदगियाँ होंगी बर्बाद.

पहली बार तीन तलाक देकर सरूर से करवाया हलाला –

उत्तर प्रदेश के बरेली से तीन तलाक और हलाला का एक शर्मनाक मामला सामने आया है. जानकारी के मुताबिक वसीम हुसैन नाम के एक मुस्लिम शख्स ने अपनी बीबी को तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया. शबीना ने जब पुलिस से शिकायत किया तो ससुराल वालों ने फिर से निकाह करने का दबाव बनाया. दुबारा साथ रखने के लिए वसीम ने अपनी बीबी शबीना का हलाला अपने पिता से करवाया. लेकिन उस पीड़ित महिला पर अत्याचारों का सिलसिला यहाँ ही नहीं रुका. एक बार फिर से वसीम ने अपनी बीबी को तलाक दे दिया है और इस बार वो अपनी बीबी को मज़बूर कर रहा की वो उसके भाई से हलाला करवाए.

जानकारी के मुताबिक पीड़ित महिला बरेली के बानखाना की रहने वाली है. 2009 में उसकी शादी गढ़ी-चौकी के वसीम से में हुई थी. महिला ने आरोप लगाया है की शादी के दो साल बाद उसके शौहर वसीम ने उसे तीन तलाक देकर अपने घर से निकाल दिया था. कुछ महीने बीत जाने के बाद उस मज़बूर बेबस महिला को दोबारा साथ रखने के लिए वसीम ने उसके सामने एक शर्मनाक शर्त रखा. वसीम ने पीड़िता से कहा की दुबारा साथ रहने के लिए उसे उसके पिता (महिला का ससुर) जमील हुसैन के साथ हलाला निकाह करना पड़ेगा. ना चाहते हुए भी उस महिला को मज़बूरन अपने पितातुल्य ससुर के साथ हलाला करना पड़ा. बाद में सरूर ने उसे तलाक दे दिया , और पीड़िता वसीम के साथ रहने लगी.

शौहर ने दूसरी बार दिया शबीना को तीन तलाक इस बार देवर से करवाना चाहता था हलाला-

पीड़िता सोच रही थी की अब शायद उस पर हो रहे ज़ुल्मों का अंत हो जायेगा और वक़्त के साथ उसका ज़ख़्म भी भर जायेगा. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. 2017 में उसके शौहर वसीम ने उसे फिर से तीन तलाक दिया. और इस बार फिर से नीचता की हदें पार करते हुए उसने महिला के सामने एक शर्त रखा. वह शर्त ये था की इस बार महिला को उसके भाई (देवर) के साथ हलाला करना पड़ेगा.

इस बार शबीना ने दिखाया हिम्मत-

लेकिन कहते हैं ना ज़ुल्म जब हद से बढ़ जाता है तो डर भी खत्म हो जाता है. शबीना के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. इस बार शबीना ने हिम्मत दिखाते हुए देवर से हलाला करवाने से इंकार कर दिया. शबीना अब ना केवल अपने उपर हुए अत्याचारों का हिसाब मांग रही बल्कि वो समाज में रह रहे ना जाने कितने वसीम जैसे राक्षसों को सजा दिलवाना चाहती हैं. शबीना अब तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह के खिलाफ कठोर कानून चाहती है ताकि मुस्लिम महिलाओं को हलाला जैसे जुर्म से बचा सके.

जानिए क्या है निकाह हलाला-

निकाह हलाला एक तरह का इस्लामी विवाह (निकाह) है. अगर किसी मुस्लिम महिला को उसके शौहर ने तलाक दे दिया है और वो महिला दोबारा उसी पति से निकाह करना चाहती है, तो उसे पहले किसी और शख्स से निकाह कर एक रात गुजारनी होती है और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना पड़ता है.इसके बाद महिला को उस दूसरे शख्स से तलाक लेना होता है. ऐसा होने के बाद ही वो अपने पहले पति के साथ दोबारा शादी करके रह सकती है. इस पूरी प्रक्रिया को निकाह हलाला कहते हैं. और निकाह हलाला के नाम पर मुस्लिम महिलाओंका सामाजिक और यौन शोषण किया जाता है.

बलात्कार है तीन तलाक- इस कुप्रथा को बैन कर दिया जाये –
निकाह-हलाला एक क्रूरता है. निकाह-हलाला IPC की धारा 375 के तहत बलात्कार है. निकाह हलाला महिलाओं के मौलिक अधिकारों का हनन है. संविधान महिलाओं के लिए समानता, न्याय और गरिमा की बात करता है. अब समय आ गया है की इस कुप्रथा को बैन कर दिया जाये ताकि मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिल सके.

Leave a Reply