Last Updated on 16/12/2021 by Sarvan Kumar
अहलूवालिया (Ahluwalia or Ahluvalia) भारत में पाई जाने वाली एक जाति है.भारत सरकार के सकारात्मक भेदभाव की प्रणाली आरक्षण के अंतर्गत इन्हें सामान्य वर्ग (General Category) के रूप में वर्गीकृत किया गया है. यह मुख्य रूप से पंजाब क्षेत्र में निवास करते हैं. अधिकांश अहलूवालिया सिख या हिंदू धर्म का पालन करते हैं. अहलूवालिया मूल रूप से कलाल जाति के थे, जिनका पारंपरिक व्यवसाय शराब बनाना और बेचना था. शराब बनाने और बेचने के व्यवसाय से जुड़े होने के कारण इन्हें सामाजिक पदानुक्रम में निचले दर्जे का समझा जाता था, जो बहिष्कृत के करीब था.
जस्सा सिंह अहलूवालिया और कलाल समाज
इनकी सामाजिक स्थिति में सुधार तब हुआ जब 18वीं शताब्दी में सिख प्रमुख जस्सा सिंह अहलूवालिया, जो कलाल जाति के थे, ने अपने पैतृक गांव के नाम पर “अहलूवालिया” उपनाम अपना लिया. जस्सा सिंह अहलूवालिया सत्ता में आए और उन्होंने कपूरथला राज्य के शासक वंश की स्थापना की. इनके वंशज कपूरथला राज्य के शासक वंश बने.19वीं सदी के अंत में, अन्य कलालो ने संस्कृतिकरण की प्रक्रिया के तहत अहलूवालिया पहचान को अपना लिया, जिसके परिणाम स्वरूप अहलूवालिया जाति का गठन हुआ. जैसे ही उन्होंने राजनीतिक सत्ता हासिल की और ब्रिटिश प्रशासन ने शराब के वितरण और बिक्री को विनियमित करना शुरू कर दिया, इन्होंने अपने पारंपरिक व्यवसाय को छोड़ दिया. यह प्रयास सफल रहा, और इससे इन की सामाजिक स्थिति में सुधार हुई. अहलूवालिया को सामाजिक जाति पदानुक्रम में उच्च स्थिति रखने वाले खत्रियों के बराबर समझा जाने लगा.कलाल नए व्यवसाय को अपनाने लगे. बड़ी संख्या में अहलूवालिया, विशेष रूप से, सैन्य सेवाओं में जाने लगे, जिससे इनके सामाजिक स्थिति में जबरदस्त सुधार हुआ. अपनी सामाजिक स्थिति को और सुधारने के प्रयास में, कुछ अहलूवालिया खुद को खत्री या राजपूत के वंशज होने का दावा करने करने लगे. उदाहरण के तौर पर, कपूरथला शाही परिवार के लोग जैसलमेर के भट्टी राजपूत शाही परिवार के वंशज होने का दावा करते हैं. इस मान्यता के अनुसार, भट्टियों का एक समूह पंजाब चला गया, जहाँ वह जाट कहलाने लगे, और सिख बन गए.
