Ranjeet Bhartiya 31/01/2023
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Last Updated on 13/03/2023 by Sarvan Kumar

भारत का इतिहास कई हजार वर्ष पुराना है. इन हजारों वर्षों के इतिहास में भारत की भूमि पर अनेक साम्राज्यों का उदय हुआ. इनमें से कई साम्राज्य बहुत विशाल और प्रसिद्ध थे, जिनके बारे में आमतौर पर लोग जानते हैं. लेकिन कुछ ऐसे भी साम्राज्य हुए जिसके बारे में अधिकांश लोगों को नहीं पता है. हाल के दिनों में गुमनाम और अल्पज्ञात साम्राज्यों के बारे में किताबें लिखी जाने लगी हैं. आइए इस क्रम में जाने भर/राजभर साम्राज्य बुक के बारे में.

भर/राजभर साम्राज्य बुक

प्राचीन काल से ब्रिटिश शासन के पतन तक, भारत का एक बहुत व्यापक इतिहास रहा है जिसने अलग-अलग कालखंडों में विभिन्न राजवंशों के उत्थान और पतन को देखा है. प्राचीन साम्राज्यों में महाजनपद, नंद वंश, मौर्य वंश, पांड्य वंश, चेर वंश, चोल वंश, पल्लव वंश, चालुक्य वंश आदि प्रमुख हैं. सम्राट अशोक के शासनकाल में मौर्य साम्राज्य दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा साम्राज्य था. मध्यकालीन भारत में भारत में कई प्रसिद्ध साम्राज्य हुए हुए जैसे परमार वंश, पाल वंश, विजयनगर साम्राज्य, मुगल वंश और मराठा साम्राज्य आदि. मुख्यधारा के इतिहासकारों ने इन सभी साम्राज्यों के बारे में बहुत उदारता से लिखा है. लेकिन भारत का वास्तविक इतिहास केवल विशाल साम्राज्य और उसके महान शासकों तक ही सीमित नहीं है. मुख्यधारा के इतिहासकारों की उपेक्षा के बावजूद भारत में ऐसे कई शासक हुए जिनकी वीरता, त्याग और बलिदान की गाथाएं आज भी लोक कथाओं के माध्यम से अमर हैं. भर/राजभर साम्राज्य के श्रावस्ती के प्रसिद्ध राजा सुहेल देव भी इसी श्रेणी में आते हैं जिनका उल्लेख उत्तर प्रदेश के अवध और पूर्वांचल क्षेत्र की लोक कथाओं में मिलता है. महाराजा सुहेलदेव ने बहराइच की लड़ाई में गजनवी जनरल गाजी सालार सैय्यद मसूद को पराजित करके मातृभूमि और हिंदू धर्म की रक्षा की थी. राजभर समुदाय और भर साम्राज्य के इतिहास के बारे में ज्यादा किताबें नहीं लिखी गई हैं. राजभर समाज के लोग आरोप लगाते रहे हैं कि भारत में दलित और पिछड़ी जातियों का भी गौरवशाली इतिहास रहा है. सामंतवादियों ने राजभर समाज के इतिहास और ऐतिहासिक गौरव को मिटाने का प्रयास किया है.
अब राजभर समाज के लोग खुद ही अपना इतिहास खंगालने लगे हैं. भर/राजभर साम्राज्य नामक पुस्तक इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। “भर/राजभर साम्राज्य” पुस्तक के लेखक एम.बी. राजभर है. यह पुस्तक 1 ​​जनवरी 2015 को सम्यक प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई थी इस पुस्तक में भर जाति का इतिहास, वैदिक काल की भर जाति, भारत की मूल नागभर शिव जाति, भर जाति के उपनाम, भर शिव वंश, प्रसिद्ध भारत सम्राट, इस जाति से अलग हुए जाति समूह आदि के बारे में विस्तार से बताया गया है.

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