Sarvan Kumar 15/07/2021
नहीं रहे सबके प्यारे ‘गजोधर भैया’। राजू श्रीवास्तव ने 58 की उम्र में ली अंतिम सांस। राजू श्रीवास्तव को दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद से वो 41 दिनों से दिल्ली के एम्स में भर्ती थे। उनकी आत्मा को शांति मिले, मुझे विश्वास है कि भगवान ने उसे इस धरती पर रहते हुए जो भी अच्छा काम किया है, उसके लिए खुले हाथों से स्वीकार करेंगे #RajuSrivastav #IndianComedian #Delhi #AIMS Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 12/10/2021 by Sarvan Kumar

चमार भारतीय उपमहाद्वीप (Indian Subcontinent) में पाया जाने वाला एक दलित समुदाय है. दलित का अर्थ होता है-जिन्हें दबाया गया हो, प्रताड़ित किया गया हो, शोषित किया गया हो या जिनका अधिकार छीना गया हो. ऐतिहासिक रूप से इन्हें जातिगत भेदभाव और छुआछूत का दंश भी झेलना पड़ा है. इसीलिए आधुनिक भारत के सकारात्मक भेदभाव प्रणाली (Positive Discrimination System) के तहत चमार जाति की स्थिति को सुधारने के लिए उन्हें अनुसूचित जाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है. आइए जानते हैं चमार जाति का इतिहास, चमार शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?

चमार जाति का इतिहास

चमार शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?

चमार शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द ‘चर्मकार’ से हुई है.
ऐतिहासिक रूप से जाटव जाति को चमार या चर्मकार के नाम से जाना जाता है. अंग्रेज इतिहासकार कर्नल टाड का मत है कि चमार समुदाय के लोग वास्तविक रुप से अफ्रीकी मूल के हैं, जिन्हें व्यापारियों ने काम कराने के लिए लाया था. लेकिन ज्यादातर इतिहासकार इस मत से सहमत नहीं हैं और उनका कहना है कि आदिकाल से ही इस समुदाय के लोगों का भारतीय समाज में अस्तित्व रहा है.

चंवर वंश का इतिहास

डॉ विजय सोनकर ने अपनी किताब ‘हिंदू चर्मकार जाति: एक स्वर्णिम गौरवशाली राजवंशीय का इतिहास’ में लिखा है कि चमार वास्तव में चंवर वंश के क्षत्रिय हैं. उन्होंने अपने पुस्तक में लिखा है कि ब्रिटिश इतिहासकार जेम्स टॉड (James Tod) ने राजस्थान के इतिहास में चंवर वंश के बारे में विस्तार में लिखा है. सोनकर ने अपनी किताब में लिखा है विदेशी और इस्लामिक आक्रमणकारियों के आने से पहले भारत में मुस्लिम, सिख एवं दलित नहीं थे. लेकिन आंतरिक लड़ाई के कारण ये क्षत्रिय समुदाय से अलग होते गए और इनकी गिनती निम्न जाति में की जाने लगी. यहां यह बताना जरूरी है कि
इस बात का उल्लेख किसी ऐतिहासिक पुस्तक या ग्रंथ में नहीं मिलता, इसीलिए यह एक शोध का विषय है.

चमार कहां पाए जाते हैं? चमार की जनसंख्या

यह मुख्य रूप से भारत के उत्तरी  राज्यों, पाकिस्तान और नेपाल में पाए जाते हैं.

किस राज्य में कितने हैं?
अगर भारत के राज्यों की बात करें तो 2001 के जनगणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश में चमारों की जनसंख्या लगभग 14% है और पंजाब में इनकी आबादी 12% है. अन्य राज्यों में चमारों की आबादी इस प्रकार है-राजस्थान 11%, हरियाणा 10%, मध्यप्रदेश 9.5%, छत्तीसगढ़ 8%, हिमाचल प्रदेश 7%, दिल्ली 6.5%, बिहार 5% और उत्तरांचल 5%. इसके अलावा जम्मू कश्मीर, झारखंड, पश्चिम बंगाल, गुजरात आदि में भी इनकी ठीक-ठाक आबादी है.

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चमार किस धर्म को मानते  हैं?

भारत और नेपाल में रहने वाले अधिकांश चमार हिंदू धर्म के अनुयाई हैं. इस समुदाय के सदस्य बौद्ध और अन्य धर्म को भी फॉलो करते हैं. पाकिस्तान में पाए जाने वाले ज्यादातर चमार इस्लाम धर्म को मानते हैं.

चमार जाति पेशा

इनका मुख्य पेशा चमड़े की वस्तुओं को बनाना था लेकिन इस समुदाय के कुछ लोगों ने कपड़ा बुनने के कार्य को अपना लिया तथा खुद को जुलाहा चमार बताने लगे. हालांकि इतिहासकार रामनारायण रावत का मत है कि चमार जाति को चर्म बनाने के पारंपरिक व्यवसाय के साथ जोड़ा गया था लेकिन ऐतिहासिक रूप से यह कृषक थे.

हालांकि बदलते वक्त के साथ मौजूदा हालात में यह कहना उचित नहीं होगा कि इस समुदाय के लोगों का पेशा कृषि या चमड़ा व्यवसाय तक ही सीमित है. आज आपको इस समुदाय के लोग सभी क्षेत्रों जैसे कला, खेल, साहित्य, शिक्षा, चिकित्सा उद्योग, व्यवसाय, प्रशासनिक सेवा, राजनीति आदि में अपनी कामयाबी का झंडा बुलंद करते हुए दिख जाएंगे.

चमार शब्द एक अपशब्द? जातिसूचक शब्द कहने पर 6 माह की सजा

एक बात हम यहां बता दें कि हम जानकारी देने के उद्देश्य से चमार शब्द का उपयोग कर रहे हैं. लेकिन सामान्य तौर पर इस शब्द का उपयोग दलितों के लिए अपमानजनक शब्द के रूप में किया जाता है. इसीलिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इसे एक जातिवादी गाली के रूप में वर्गीकृत किया गया है. इसीलिए इस शब्द का प्रयोग सोच समझकर करें, नहीं तो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 (scheduled caste and scheduled tribe (prevention of atrocities) act 1989) के उल्लंघन के मामले में आप पर दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है.

गौरवशाली चमार रेजीमेंट

चमार रेजीमेंट चमारों के बहादुरी का प्रतीक है. इस रेजिमेंट का गठन 1 मार्च 1943 को अंग्रेजों द्वारा दूसरे विश्व युद्ध के दौरान की गई थी. इस रेजिमेंट को कोहिमा की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए सम्मानित किया गया था. अंग्रेजों ने इस रेजिमेंट का गठन उस समय सबसे शक्तिशाली माने जाने वाली जापानी सेना से मुकाबला लेने के लिए किया था. इस रेजीमेंट को इंडियन नेशनल आर्मी के खिलाफ लड़ने के लिए कहा गया. लेकिन चमार रेजीमेंट ने देश के लिए और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आजाद हिंद फौज के लिए अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह कर दिया. इसके कारण अंग्रेजों ने 1946 में चमार रेजीमेंट पर प्रतिबंध लगा दिया.

2011 के बाद राजनेताओं और दलित समुदाय के लोगों ने मांग की है कि चमार रेजिमेंट को फिर से पुनर्जीवित किया जाना चाहिए, जिससे इस समुदाय का मनोबल बढ़ेगा और साथ ही वह देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा पाएंगे.

चमार जाति इतिहास को गौरवान्वित करते ये कुछ प्रमुख व्यक्ति

आइए अब चमार जाति के कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तियों के बारे में जानते हैं जिससे यह साफ हो जाता है कि महानता जन्म से नहीं कर्म से आती है.

रविदास/रैदास

वे मोची थे. जूते बनाते थे और उसकी मरम्मत भी करते थे. समाज की भाषा में उनकी जाति कथित ‘चमार’ की थी. लेकिन राम और गोविंद की लगन ऐसी लगी थी कि रैदास नाम ही ‘भक्त’ का पर्याय बनता जा रहा था. इतना तक कि कबीर जैसे महान संत ने भी कह दिया कि ‘साधुन में रविदास संत है’.

बाबू जगजीवन राम

बाबू जगजीवन राम भारत के प्रथम दलित उप प्रधानमंत्री और कांग्रेस के बड़े राजनेता थे. वह 24 मार्च 1977 से 28 जुलाई 1979 तक भारत के उप प्रधानमंत्री रहे. साथ ही वह केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री, कृषि मंत्री, यातायात और रेलवे मंत्री रहे.

कांशीराम

कांशीराम किसी परिचय के मोहताज नहीं है. वह बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक थे. उन्हें बहुजन नायक के नाम से भी जाना जाता है. उन्होंने जातिवादी व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठा कर समाज सुधार का काम किया. बहुजनों, पिछड़ी और निचली जातियों का राजनीति एकीकरण और उनके उत्थान के कार्यों के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा.

मीरा कुमार

बाबू जगजीवन राम की सुपुत्री मीरा कुमार कांग्रेस की वरिष्ठ नेता हैं. वह बिहार के सासाराम से 2004 से 2014 तक लोकसभा सदस्य रहीं. वह 4 जून 2009 से 16 मई 2014 तक लोकसभा की अध्यक्ष रहीं.

सुश्री मायावती

राजनीति की दुनिया में मायावती का अलग पहचान है. वह चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रही हैं. साथ ही वह वर्तमान में बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.

 

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