Ranjeet Bhartiya 24/12/2021
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Last Updated on 24/12/2021 by Sarvan Kumar

चूहड़ा (Chuhra) भारत, पाकिस्तान और नेपाल में पाई जाने वाली एक दलित या हरिजन जाति है. इन्हें भंगी (Bhanghi) या बाल्मीकि (Balmiki) के नाम से भी जाना जाता है. परंपरागत रूप से यह सफाई कर्मी का काम करते रहे हैं. सफाई के कार्य से जुड़े होने के कारण इन्हें छुआछूत, भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार का भी सामना करना पड़ा है. आरक्षण प्रणाली के अंतर्गत इन्हें अनुसूचित जाति (Scheduled Caste, SC) के रूप में वर्गीकृत किया गया है. आइए जानते हैं चूहड़ा समाज का इतिहास, चूहड़ा की उत्पति कैसे हुई?

चूहड़ा समाज की जनसंख्या

भारत में यह मुख्य रूप से पंजाब और उत्तर प्रदेश में पाए जाते हैं. यह भारतीय उपमहाद्वीप के अन्य हिस्सों जैसे दक्षिण भारत में भी  निवास करते हैं. भारत की 2001 की जनगणना के अनुसार, पंजाब में बाल्मीकि कुल अनुसूचित जाति की आबादी का 11.2 प्रतिशत थे. दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi NCR) में यह दूसरी सबसे अधिक आबादी वाली अनुसूचित जाति थी. 2011 की जनगणना में, उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के रूप में बाल्मीकि जाति की आबादी 1,319,241 दर्ज की गई थी. आंध्र प्रदेश में बाल्मीकि कुल आबादी का 0.7 प्रतिशत हैं. यहां यह मुख्य रूप से अनंतपुर, कुरनूल और कडप्पा जिलों में केंद्रित हैं. आंध्र प्रदेश में इन्हें बोया वाल्मीकि या वाल्मीकि के नाम से जाना जाता है.

चूहड़ा समाज किस धर्म को मानते हैं?

धर्म से यह हिंदू, मुस्लिम, सिख या ईसाई हो सकते हैं. मूल रूप से हिंदू धर्म के बाल्मीकि संप्रदाय का पालन करते हुए, भारत में औपनिवेशिक युग के दौरान कई चूहड़ा सिख धर्म, इस्लाम और ईसाई धर्म में परिवर्तित हो गए.

हिंदू
अधिकांश चूहड़ा हिंदू धर्म के बाल्मीकि संप्रदाय से संबंधित हैं. 1931 की भारतीय जनगणना में, औपनिवेशिक भारत के बलूचिस्तान प्रांत में अधिकांश चूहड़ों ने खुद को “हिंदू बाल्मीकि” के रूप में दर्ज करवाया था.

इस्लाम
हिंदू धर्म से इस्लाम में परिवर्तित होने वाले चूहड़ों को मुसालिस के नाम से जाना जाता है.

ईसाई
हिंदू धर्म से ईसाई बनने वाले चूहड़ों को क्रिश्चियन या दलित चूहड़ा कहा जाता है. पाकिस्तानी पंजाब में 90-95% ईसाई आबादी चूहड़ा जाति के दलित ईसाई हैं.

सिख
हिंदू धर्म से सिख धर्म में धर्मांतरित होने वाले चूहड़ों को मजहबी सिख के रूप में जाना जाता है.

चूहड़ा समाज का उप विभाजन

चूहड़ा/बाल्मीकि/भंगी समाज कई उप जातियों में विभाजित है, जिनमें प्रमुख हैं-बोरात, भट्टी, बोया वाल्मीकि, छपरीबंद, धारीवाल, गिल, हांसी, कंडाबारी , खोसर, लधर, लाल बेगी, मट्टू, सहोत्रा/सोत्रा, सिंधु, उनटवाल और वाल्मीकि.

चूहड़ा समाज की उत्पत्ति

“चूहड़ा” शब्द की उत्पत्ति “शूद्र” शब्द से हुई है. हिंदू धर्म के अनुसार, शूद्र चार वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय वैश्य और शूद्र) में से एक वर्ण है.भंगी, बाल्मीकि नाम के एक ब्राह्मण के वंशज होने का दावा करते हैं, जिन्होंने रामायण की रचना की थी. यह वाल्मीकि ऋषि को हिंदू संरक्षक संत के रूप में पूजा करते हैं. “भंगी” शब्द “भंग” से बना है, जिसका अर्थ होता है- “टूटा हुआ”. भंगी समुदाय के लोग यह दावा करते हैं कि मुगलों के शासन के दौरान जब इन्होंने इस्लाम में परिवर्तित होने से इंकार कर दिया तो इन्हें अपमानित करने के लिए झाड़ू लगाने, सफाई करने और अन्य छोटे-मोटे कामों में लगा दिया गया. इससे इनके सामाजिक स्थिति में गिरावट हो गई और कालांतर में इन्हें छुआछूत और सामाजिक बहिष्कार का भी सामना करना पड़ा.

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