Sarvan Kumar 28/11/2021
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Last Updated on 28/11/2021 by Sarvan Kumar

धोबी (Dhobi) भारत और भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक जातीय समूह है. पारंपरिक रूप से इनका मुख्य कार्य कपड़े धोना, रंगना और इस्त्री करना है. भारत के अलग-अलग राज्यों में इन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे-रजक, धूपी, धोबा आदि. यह एक बड़ा जातीय समूह है, जो उत्तरी, पश्चिमी और पूर्वी भारत में व्यापक रूप से पाए जाते हैं. भारत के अलावा यह बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका में भी निवास करते हैं.धोबी शब्द की उत्पत्ति “धावन या धोना” शब्द से हुई है, जिसका अर्थ होता है- साफ करना या धोकर शुद्ध करना. अधिकांश धोबी हिंदू धर्म का अनुसरण करते हैं. यह धार्मिक रूप से संत गाडगे महाराज (गाडगे बाबा) का अनुसरण करते हैं और हर साल 23 फरवरी को उनकी जयंती मनाते हैं.

धोबी किस कैटेगरी के हैं?

अधिकांश धोबी हिंदू धर्म का अनुसरण करते हैं. यह धार्मिक रूप से संत गाडगे महाराज (गाडगे बाबा) का अनुसरण करते हैं और हर साल 23 फरवरी को उनकी जयंती मनाते

आरक्षण प्रणाली के अंतर्गत इन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (Other Backward Class, OBC) या अनुसूचित जाति (Scheduled Caste, ST) के रूप में वर्गीकृत किया गया है.

आंध्र प्रदेश:
आंध्र प्रदेश में इन्हें इन्हें ओबीसी के रूप में वर्गीकृत किया गया है. यहां इन्हें धूपी या रजक के रूप में जाना जाता है. यहां यह अपने पारंपरिक कार्य के साथ कृषि भी करते हैं. इनमें से कई अब डॉक्टर, इंजीनियर, पत्रकार, समाज सेवक, वकील आईटी प्रोफेशनल और राजनेता भी हैं

असम
असम में इन्हें धूपी ही कहा जाता है. इन्हें अनुसूचित जाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.

बिहार
बिहार के मुजफ्फरपुर, वैशाली, सिवान , पूर्णिया और पूर्वी चंपारण जिलों में इनकी बहुतायत आबादी है. यहां इन्हें अनुसूचित जाति में शामिल किया गया है.

झारखंड
झारखंड में यह SC कैटेगरी में आते हैं.

मध्य प्रदेश
भोपाल, रायसेन और सीहोर जिलों में इन्हें अनुसूचित जाति में रखा गया है, जबकि राज्य के अन्य जिलों में इन्हें ओबीसी के रूप में वर्गीकृत किया गया है.

उड़ीसा
यहां यह मुख्य रूप से पूर्वी उड़ीसा तटीय जिलों जैसे कटक, पुरी, बालासोर और गंजम जिलों में निवास करते हैं. मध्य और पश्चिमी उड़ीसा में यह कम संख्या में निवास करते हैं. यहां इन्हें अनुसूचित जाति में शामिल किया गया है. दिल्ली, उत्तराखंड और राजस्थान में इन्हें अनुसूचित जाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है.

पूर्वोत्तर
मणिपुर, मेघालय और मिजोरम में इन्हें धूपी कहा जाता है, और इन्हें ST कैटेगरी में रखा गया है.

त्रिपुरा
त्रिपुरा में यह धोबा के नाम से जाने जाते हैं, और इन्हें अनुसूचित जनजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.

उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में इन्हें ओबीसी और अनुसूचित जनजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.

 

 

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