Sarvan Kumar 31/10/2020

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Last Updated on 31/10/2020 by Sarvan Kumar

dying king with four wives : एक समय की बात है एक राजा की चार पत्नी थी। एक दिन राजा बहुत बीमार हुआ और वह मृत्यु के करीब आ पहुंचा। मौत के बाद क्या होगा, क्या वह अकेला हो जायेगा ये सब डर उसे सताने लगा।अब तक तो उसके पीछे हजारों लोग खड़े रहते थे, उसके एक इशारे पर कई दास दासियाँ हाथ जोड़े उसके सेवा में पहुंच जाते थे। मृत्युशैया पर पड़े राजा ने चौथी पत्नी को अपने पास बुलाया। राजा अपने इस पत्नी से बहुत प्यार करता था। उसे महंगे वस्त्र, डायमंड ज्वेलरी, गोल्ड आदि दिया करता था। राजा ने अपने चौथी पत्नी से कहा कि मेरी हालत बहुत खराब है, अब लगता है मैं नही बच पाऊंगा। मरने के समय मुझे अकेलेपन का डर सता रहा है। राजा ने अपनी चहेती रानी से पूछा क्या तुम मेरे साथ ही अपना मृत्यु चाहोगी,  मृत्यु के बाद क्या तुम मेरे साथ चलोगी। चौथी रानी ने कहा मैं ऐसा नहीं कर सकती और वह वहाँ से तुरंत चली गई । राजा ने तीसरे पत्नी को पास बुलाया और उसे भी अपने साथ मरने को कहा। राजा को अपने इस पत्नी से भी प्यार था। अपने तीसरे पत्नी पर उसे बहुत गर्व था, वह अक्सर उसे पड़ोसी राजाओं को मिलाकर गौरवान्वित महसूस करता था। तीसरे पत्नी ने भी मना कर दिया उसने कहा मुझे अपने जीवन से बहुत प्यार है मैं ऐसा नहीं कर सकती। जब आपकी मृत्यु हो जाएगी मैं दूसरी शादी कर लूंगी। अब उसने दूसरी पत्नी को बुलाया। यह पत्नी राजा के हर जरूरतों में उसके साथ खड़ी रहती थी। राजा ने वही प्रश्न इस रानी से भी पूछा की क्या तुम मरने के बाद मेरे साथ चलोगी। रानी ने उत्तर दिया अभी मैं ऐसा नहीं कर सकती, हां मरने के बाद आपके दाह -संस्कार का प्रबंध जरूर कर सकती हूँ और मैं उस वक्त आपके साथ रहूंगी। तभी एक आवाज आई मैं चलूंगी आपके साथ, राजा ने देखा तो यह उसकी पहली पत्नी थी। इस रानी ने कहा राजन् आप जहाँ भी जाऐंगे मैं आपके साथ चलूँगी मरने के बाद भी मैं आपके साथ रहूंगी। पहली पत्नी उसकी वह पत्नी थी जिसे वह सबसे कम ध्यान रखता था उसे बहुत शरमिदगीं महसूस हुई। उसने रानी से कहा मुझे माफ कर दो मुझे तुम्हारा सबसे ज्यादा ख्याल रखना चाहिए था। तुम्हारे तरफ ज्यादा ध्यान रखना चाहिए था।

dying king with four wives

इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि हम सभी की चार पत्नियाँ है।
चौथी पत्नी हमारा शरीर है हम इसे स्वर्ण-आभूषणों से, महंगे वस्त्रों से सजाने में लगे रहते हैं पर अंत में यह हमारा साथ छोड़ देता है।

तीसरी पत्नी उन चीजों को प्रतिनिधित्व करती है जिसे हम तमाम उम्र इकठ्ठा करने में लगे रहते हैं। जैसे घर, जमीन-जायदाद, महंगे उपकरण इत्यादि। पूरे जीवन हम इस पर घमंड करते हैं। अपने दोस्तों और पडोसियों को इसे दिखाकर काफी खुश होते हैं। पर अंत में यह सब यहीं रह जाता है इन्हें हम दूसरे लोगों में बांट देते हैं.

हमारा परिवार, हमारे चाहने वाले दूसरी पत्नी की तरह है जो जरूरत पर हमारे साथ रहते हैं। वे हमारे दाह-संस्कार का प्रबंध करते हैं पर वे भी शमशान भूमि में हमें अकेला छोड़ कर चले जाते हैं।

पहली पत्नी हमारे आत्मा की तरह है जिसे हम सबसे ज्यादा उपेक्षा करते हैं। हमें सबसे ज्यादा इसी का ख्याल रखना चाहिए क्योंकी मरने के बाद यही हमारे साथ जाता है।

आप अपने शरीर का पूरा ध्यान रखें उसे स्वस्थ्य रखे, सुख सुविधा के लिए जुटाए गए साधनों से अपना जीवन आसान बनाएं ।अपने परिवार, दोस्तों के साथ का खुशियां बांटे, पर आप अपने आत्मा को नहीं भूले उसे पूरा ख्याल रखें। कुछ समय अकेले रहें, ईश्वर का ध्यान करें , योगा मेडिटेशन करें, नेक काम करें, किसी पाप के भागी ना बने।

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