Sarvan Kumar 05/03/2023
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Last Updated on 05/03/2023 by Sarvan Kumar

कोली समाज की कुलदेवी का नाम “मुम्बा देवी” है. मुम्बा देवी के नाम से ही महाराष्ट्र के इस जिले को मुंबई नाम दिया गया है. कोली समुदाय मुंबई का अभिन्न अंग है. उन्हें मुंबई शहर का मूल निवासी माना जाता है. ‘कोली नृत्य’ महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय लोक नृत्यों में से एक है. कोली लोग मुंबई के जिन  इलाकों में रहते हैं उन्हें  ‘कोलीवाड़ा’ कहा जाता है. कोलीवाड़ा का मूल अर्थ है ‘एक घर जो समुद्र की ओर खुलता है. मुंबई में कुछ प्रमुख कोलीवाड़ा ‘वर्ली कोलीवाड़ा,’ ‘सायन कोलीवाड़ा,’ ‘वसई कोलीवाड़ा,’ और ‘कोलाबा कोलीवाड़ा’ हैं. मुंबई के द्वीपों जैसे कोलाबा, पलवा बंदर, डोंगरी, मझगाँव, नायगाँव में घनी कोली आबादी है. ‘मुंबई’ नाम की उत्पत्ति मुंबादेवी मंदिर से हुई है. यह मुंबादेवी कोली समुदाय की सबसे पूजनीय देवी हैं. इस मंदिर का इतिहास करीब 400 साल पुराना है. मुंबादेवी मंदिर का इतिहास SHREE MUMBADEVI MANDIR CHARITIES  के आधिकारिक  वेबसाइट के अनुसार मुंबादेवी मंदिर पहली बार 1675 में और उसके आसपास बोरीबंदर में बनाया गया था, मंदिर को नष्ट कर दिया गया था और वर्ष 1737 में भुलेश्वर के ज़वेरी बाज़ार में इसका पुनर्निर्माण किया गया था.

मुंबादेवी का इतिहास

इस वेबसाइट पर एक किवदंती का भी  उल्लेख है जिसके अनुसार मुंबादेवी, एक आठ-सशस्त्र देवी, ‘भगवान ब्रह्मा’ द्वारा मुंबारका नामक एक दुष्ट राक्षस को मारने के लिए भेजी गई थी, जिसने स्थानीय लोगों को आतंकित किया था, अपनी हार के बाद, मुंबारका अपने घुटनों पर गिर गया और देवी से अपना नाम लेने की विनती की. ऐसा कहा जाता है कि मुंबारका को मुंबादेवी को समर्पित एक सुंदर मंदिर बनाने की अनुमति भी दी गई थी. इस प्रकार, मुंबादेवी मंदिर का शानदार मंदिर मुंबारका द्वारा मुंबई शहर के मध्य में बनाया गया था. 500 सालों से भी ज्यादा कोली समाज के लोग यहाँ मछली पकड़ने का काम कर रहे है. हालांकि, हाल के वर्षों में, तेजी से शहरीकरण, बड़े- कंपनियों द्वारा मछली पकड़ने व्यवसाय आ जाने और जलवायु परिवर्तन के कारण स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं रह गई है.

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