Ranjeet Bhartiya 01/08/2023
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Last Updated on 01/08/2023 by Sarvan Kumar

मैतेई समुदाय (Meitei Community) पूर्वोत्तर भारतीय राज्य मणिपुर में सबसे बड़े और प्रमुख जातीय समूह के रूप में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। अपनी अनूठी भाषा, मैतेई (आधिकारिक तौर पर मणिपुरी के रूप में जाना जाता है) के साथ, उन्होंने क्षेत्र के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परिदृश्य को आकार देने में अभिन्न भूमिका निभाई है। यह लेख मैतेई समुदाय की उत्पत्ति और ऐतिहासिक विकास पर प्रकाश डालता है, प्राचीन काल से लेकर आज तक की उनकी यात्रा पर प्रकाश डालता है।

उत्पत्ति और प्रारंभिक इतिहास (Origins and Early History):

मैतेई समुदाय के इतिहास का पता प्राचीन काल से लगाया जा सकता है, लेकिन सीमित लिखित रिकॉर्ड के कारण, सबसे प्रारंभिक विवरण मैतेई इतिहास के चीथारोल कुंभाबा (Cheitharol Kumbaba) से मिलते हैं। इस इतिहास के अनुसार, मैतेई लोग धीरे-धीरे पूरे मणिपुर क्षेत्र में फैल गए और विभिन्न कुलों (कबीलों) को आत्मसात कर लिया, जिससे एक संघ का गठन हुआ जिसने उनकी सामूहिक पहचान की नींव रखी।

रहस्यमय अतीत (Mysterious Past):

दुर्भाग्य से, पूर्वोत्तर भारत में लौह युग और पहली सहस्राब्दी के बीच की अवधि के दौरान मणिपुर और उसके लोगों का इतिहास रहस्य में डूबा हुआ है। पर्याप्त लिखित दस्तावेज़ों की कमी के कारण भू-राजनीतिक घटनाओं और प्रारंभिक निवासियों की जातीय-भाषाई पृष्ठभूमि को समझने में चुनौतियाँ पैदा होती हैं। परिणामस्वरूप, मैतेई के प्रारंभिक इतिहास के कई पहलू इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए काफी हद तक अज्ञात हैं।

इंफाल घाटी में बसावट (Settlement in the Imphal Valley):

मैतेई लोगों ने ऐतिहासिक रूप से अपनी बस्तियों को उपजाऊ इंफाल घाटी में केंद्रित किया है, जो वर्तमान मणिपुर में स्थित है। यह क्षेत्र मैतेई समुदाय का सांस्कृतिक और राजनीतिक गढ़ रहा है, जहां उनकी परंपराएं, कला और धार्मिक प्रथाएं सदियों से फली-फूली हैं।

भाषा और सांस्कृतिक महत्व (Language and Cultural Significance):

मैतेई भाषा, जिसे आमतौर पर मणिपुरी कहा जाता है, न केवल मैतेई लोगों के बीच संचार का प्रमुख साधन है बल्कि इसका व्यापक महत्व भी है। इसे भारतीय गणराज्य की 22 आधिकारिक भाषाओं में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त है और यह मणिपुर की एकमात्र आधिकारिक भाषा के रूप में कार्य करती है। मणिपुरी भाषा के संरक्षण और प्रचार ने मैतेई समुदाय की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

भौगोलिक प्रसार (Geographical Spread):

हालांकि इम्फाल घाटी इस समुदाय के लोगों का मुख्य निवास स्थान रहा है, लेकिन मैतेई समुदाय के लोग भारत के अन्य हिस्सों में भी निवास करते हैं। बड़ी संख्या में मैतेई लोग असम, त्रिपुरा, नागालैंड, मेघालय और मिजोरम जैसे राज्यों में बस गए हैं। इसके अलावा, म्यांमार और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों में मैतेई समुदाय की उल्लेखनीय उपस्थिति है।

जनसंख्या और जनसांख्यिकी (Population and Demographics):

मणिपुर की कुल आबादी का लगभग 53% प्रतिनिधित्व करने वाली आबादी के साथ, मैतेई समुदाय राज्य में एक मजबूत जनसांख्यिकीय स्थिति रखता है। कला, साहित्य, खेल और राजनीति जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उनका योगदान क्षेत्रीय और राष्ट्रीय परिदृश्य को आकार देने में प्रभावशाली रहा है।

निष्कर्ष:मैतेई समुदाय का इतिहास

मैतेई समुदाय का इतिहास दृढ़ता, आत्मसात और सांस्कृतिक समृद्धि की कहानी है। मणिपुर में सबसे बड़े जातीय समूह के रूप में, उनका प्रभाव भौगोलिक सीमाओं को पार कर गया है, और उनकी भाषा, मणिपुरी, भारत की भाषाई विविधता का एक अनिवार्य हिस्सा बन गई है। हालांकि ऐतिहासिक दस्तावेज सीमित हो सकते हैं, लेकिन मैतेई लोग अपनी अनूठी विरासत को संरक्षित करते हुए आगे बढ़ रहे हैं और पूर्वोत्तर भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

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