Ranjeet Bhartiya 29/08/2022
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Last Updated on 29/08/2022 by Sarvan Kumar

वैश्य/बनिया एक प्राचीन समुदाय है. कहा जाता है कि बनियों की उत्पत्ति लगभग 5000 साल पहले हुई थी. समय के साथ इनकी संख्या में वृद्धि हुई और इस विशाल समुदाय के भीतर, एक विशिष्ट पहचान के साथ, अनेक उपसमूह या उपजातियां विकसित हुईं. बनियों की एक ऐसी उपजाति है जिसका संबंध गौरवशाली इतिहास, राजनीतिक और धार्मिक ताकत केंद्र के रूप में प्रसिद्ध मगध और अवध से है. जब भी देश या समाज पर विपत्ति आई तो इस समुदाय के लोग ने सामूहिक रूप से जरूरतमंदों के मदद के लिए सामने आए. आइए जानते हैं रौनियार के इतिहास के बारे में.रौनियार जाति का इतिहास, रौनियार की उत्पति कैसे हुई?

रौनियार जाति के इतिहास

रौनियार (Rauniyar) एक हिंदू जाति है जो ज्यादातर भारत और नेपाल में पाई जाती है. यह एक वैश्य जाति है. इन्हें रोनियार और रोनियौर (Roniyar and Roniaur) के नाम से भी जाना जाता है. बिहार में, रौनियार खुद को नामनिहार (Namnihar) कहते हैं. उत्तर प्रदेश में, इन्हें नौनियार (Nauniyar) के नाम से भी जाना जाता है और कभी-कभी इन्हें नियार (Niar) भी कहा जाता है, जो रौनियार शब्द का छोटा रूप है. इनका मुख्य पेशा व्यापार और खेती है. इनमें से कई अब विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न नौकरियों में शामिल हैं.

रौनियार बनिया समाज का उप विभाजन

रौनियार बनिया समाज कई उप समूहों में विभाजित है. K. S. Singh ने अपनी किताब “People of India: India’s Communities N-Z” में लिखा है कि- “उत्तर प्रदेश में, रोनियौर देवरिया, गोरखपुर, लखनऊ, मिर्जापुर और वाराणसी जिलों में पाए जाते हैं. यह खुद को बनियों की उप-जाति मानते हैं. यह तीन अंतर्विवाही प्रादेशिक समूहों (territorial groups), पूरबिया, पचनाहा और बैल्कुचनहा (Purbia , Pachanaha and Bailkuchnaha) में विभाजित हैं. इनमें से प्रत्येक समूह के भीतर विवाह वर्जित हैं. यह आगे कई बहिर्विवाह कुलों (exogamous clans) में विभाजित हैं. भोजपुरी भाषा उनकी मातृभाषा है और यह हिंदी से भी परिचित हैं”.

रौनियार बनिया समाज के उपनाम (Surname)

कई अन्य उत्तर भारत बनिया जातियों की तरह, यह गुप्ता और प्रसाद को उपनाम के रूप में उपयोग करते हैं. इनके सामान्य उपनाम साह, शाह, गुप्ता, केशरी और रौनियार हैं. इनमें से कई अपने उपनाम के रूप में महाजन, आनंद, रंजन, कश्यप, आदि का भी प्रयोग करते हैं.

रौनियार बनिया समाज वितरण (Distribution)

भारत में यह मुख्य रूप से उत्तर भारत में पाए जाते हैं. वर्तमान में रोनियौर बनिया मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार में निवास करते हैं. झारखंड, दिल्ली, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड में भी इनकी उपस्थिति है. पूर्वोत्तर राज्यों में असम और त्रिपुरा में भी इनकी आबादी है. भारत के राज्यों की बात करें तो बिहार में रोनियौर मुख्य रूप से सारण, मुजफ्फरपुर, पटना, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, मुंगेर, भागलपुर, नवादा, गया जिलों में पाए जाते हैं. सासाराम में इस समुदाय की एकाग्रता है. उत्तर प्रदेश में यह मुख्य रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश में पाए जाते हैं. गोरखपुर, लखनऊ, मिर्जापुर, बलिया, लखनऊ, कानपुर और वाराणसी में इनकी मौजूदगी है. झारखंड में, रांची और बोकारो में एक छोटे समुदाय के रूप में इनकी उपस्थिति है. पड़ोसी देश नेपाल में रौनियार मुख्य रूप से पूर्वी भाग में तराई क्षेत्र में रहते हैं. यह अपने उपनाम के रूप में गुप्ता, शाह, साह या बस रौनियार का उपयोग करते हैं.

भाषा, धर्म और मान्यताएं

इस समुदाय के लोग आपस में स्थानीय भोजपुरी/अवधी बोलते हैं, और बाहरी लोगों के साथ हिंदी बोलते हैं. रौनियार उत्तर पूर्व बिहार में मैथिली तथा पश्चिमी बिहार और उत्तर प्रदेश में भोजपुरी बोलते हैं. नेपाल में निवास करने वाले रौनियार नेपाली और मैथिली बोलते हैं. धार्मिक मान्यताओं की बात करें तो लगभग सभी रौनियार बनिया हिंदू धर्म का पालन करते हैं. यह हिंदू धर्म के देवी-देवताओं की पूजा करते हैं तथा हिंदू त्योहारों को श्रद्धा पूर्वक मनाते हैं. धन और सौभाग्य के देवी देवताओं में इनकी विशेष आस्था है.

खानपान,  विवाह और रीति-रिवाज

अन्य बनियों की तरह, रोनियौर बनिया सख्त शाकाहारी होते हैं.

विवाह और रीति-रिवाज (Marriage and Customs):
इस समुदाय के लोग सख्ती से अंतर्विवाही (endogamous) होते हैं, और कबीले बहिर्विवाह (clan exogamy) का अभ्यास करते हैं. इनके रीति-रिवाज अन्य अवध बनिया जैसे उमर (Omar) के समान हैं. बता दें कि उमर (वैश्य) उमर एक भारतीय बनिया जाति है जो मुख्य रूप से मध्य उत्तर प्रदेश (कानपुर क्षेत्र), मगध, अवध, विदर्भ क्षेत्र और पूर्वांचल में पाई जाती है.

रौनियार की उत्पत्ति कैसे हुई?

रौनियार शब्द हिंदी भाषा के शब्द “रौना” से लिया गया है. रोनियौर बनिया समुदाय के भीतर एक उप-समूह है, वे अवध, मगध और उड़ीसा में पाए जाते हैं. लेकिन उनका मुख्य केंद्र उत्तर प्रदेश का महाराजगंज जिला, बिहार का सारण जिला और उड़ीसा का झारसुगुड़ा जिला है. इस समुदाय के लोग दावा करते हैं कि इनके पूर्वज मूल रूप से अयोध्या/अवध के थे जो लगभग 300 वर्ष पहले अवध से पलायन करके देश के विभिन्न भागों में बस गए. कुछ रोनियौर जागीरदार थे. लेकिन शायद ही कभी इन्होंने अपनी जमीन पर खेती की हो, यह मुख्य रूप से बटाईदारों (sharecroppers) के रूप में खेती करते थे. बिहार में रोनियौर व्यापारी और जमींदार दोनों थे. कई बड़े जागीरदार/जमींदार थे. लेकिन आजादी के पश्चात भूमि सुधारों के कारण इनके जमीनदारी के टुकड़े हो गए.

रौनियार समाज की वर्तमान परिस्थितियां.

वर्तमान परिस्थितियों की बात करें तो इस समुदाय के लोग दावा करते हैं कि रोनियौर एक भूमिहीन समुदाय है, और उनका पारंपरिक व्यवसाय कपड़ा, भोजन, अनाज और दालों की बिक्री रहा है. इस समुदाय के लोग अक्सर उत्तरी अवध के गांवों में छोटे दुकानदार के रूप में कार्य करके अपना जीवन यापन करते रहे हैं. अन्य बनिया समुदायों की तरह, इस समुदाय के लोग भी शहरीकरण के दौर से गुजर रहे हैं. इनमें से कई ग्रामीण क्षेत्रों में दुकानदार और साहूकार हैं. रौनियार वैश्य समाज के लोग दावा करते हैं कि विभिन्न क्षेत्रों में रौनियार जाति का महत्वपूर्ण योगदान है. लेकिन वर्तमान में यह समाज कई समस्याओं से जूझ रहा है.
समाज के अधिकतर लोग भूमिहीन हैं. छोटे-मोटे कारोबार कर लोग जिंदगी गुजर-बसर करते हैं. समाज को राजनैतिक और संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जाता है. इसीलिए लंबे समय से इस समुदाय के लोग रौनियार समाज के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए आरक्षण की मांग करते आए हैं.


References;
•People of India: Uttar Pradesh Volume XLII Part Three edited by A Hasan & J C Das page 1224 to 1228 Manohar Publications

•People of India Bihar Volume XVI Part Two edited by S Gopal & Hetukar Jha pages 817 to 820 Seagull Books

•People of India: India’s Communities N-Z
By K. S. Singh · 1998
Publisher:Anthropological Survey of India

•People of India: Uttar Pradesh (3 pts.)
By K. S. Singh · 2005
Publisher: Anthropological Survey of India

•https://www.bhaskar.com/jharkhand/ranchi/news/include-the-rooniar-bania-society-in-the-backward-classes-025638-3768067.html

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