Last Updated on 30/08/2022 by Sarvan Kumar
रौनियार एक वैश्य/बनिया की उप-जाति (sub-caste of Vaish community) जो मुख्य रूप से उत्तर भारत में निवास करती है. भारत में यह मुख्य रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश में पाए जाते हैं. झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी इनकी आबादी है. समाज सेवा समेत विभिन्न क्षेत्रों में इस समुदाय के लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. इस समुदाय के लोग मानव सेवा और जरूरतमंदों की मदद करने के लिए जाने जाते हैं. कोरोना काल के दौरान जब डॉक्टर नियमित रूप से उपलब्ध नहीं थे, लोग मदद के लिए भटक रहे थे और जरूरतमंदों को इलाज नहीं मिल पा रहा था. ऐसे संकट की घड़ी में इस समुदाय के लोगों ने जरूरतमंदों के लिए पूरे छत्तीसगढ़ में रौनियार समाज से 32 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बनाई थी और “नमस्ते डॉक्टर” अभियान चलाया था. जब आम जरूरत की चीजें मुहैया नहीं हो पा रही थीं, तब इस समाज के सामाजिक संगठनों ने जरूरतमंदों के लिए इलाज, परामर्श, रक्त, भोजन, फल, दूध उपलब्ध कराया था. इतना ही नहीं झारखंड के गुमला में कोरोना महामारी के दौरान जब तालाबंदी के कारण शहर की सभी दुकानें और होटलें बंद थीं. लोगों को भोजन नहीं मिल पा रहा था. लोग भूख से तड़प रहे थे, तब इस समाज की महिलाओं ने अपने-अपने घरों में भोजन बनाया. महिलाओं की टोली ने शहर में घूम-घूम कर जरूरतमंदों और लॉकडाउन में फंसे मजदूरों के बीच भोजन और पानी का वितरण किया. इस समुदाय का इतिहास गौरवशाली रहा है. यह समाज के लोग दावा करते हैं कि विक्रमादित्य और अंतिम हिंदू सम्राट हेमू महाराज इसी समाज के थे. इस समुदाय के सामाजिक संगठनों द्वारा आखिरी हिंदू सम्राट महाराजा हेमू की याद में 5 नवंबर को अंतंरराष्ट्रीय बलिदान दिवस के के रूप में मनाया जाता है. इस समुदाय के लोग दावा करते हैं कि समाज के अधिकतर लोग भूमिहीन हैं. छोटे-मोटे कारोबार कर अपना जीवन यापन करते हैं. इस समाज के लोगों की शिकायत है कि ठीक-ठाक आबादी होने के बावजूद भी राजनीति के क्षेत्र में इस समाज का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है. वर्तमान में यह समुदायिक कई प्रकार के समस्याओं से जूझ रहा है. आरक्षण के लाभ से वंचित होने के कारण समाज का विकास नहीं हो पा रहा है जो कि न्याय संगत नहीं है. समाज के पास जीविका के लिए कोई आधार नहीं है. समाज के बच्चों को शिक्षा, नौकरी, प्रतियोगी परीक्षा, छात्रवृत्ति आदि में समुचित लाभ अथवा प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा है, जिससे समाज के बच्चे इन क्षेत्रों में तेजी से पिछड़ते जा रहे हैं.सामाजिक पिछड़ापन को दूर करने के लिए इस समुदाय के लोग अति पिछड़ा वर्ग में शामिल करने की मांग करते रहे हैं. ताकि इस समाज के युवा शिक्षा और नौकरी के क्षेत्र में आगे बढ़ सके.
जहां तक भारत में रौनियार वैश्य समुदाय की जनसंख्या का प्रश्न है तो इसके बारे में अलग-अलग दावे किए जाते हैं. अंग्रेजी अखबार “The Times of India” में छपी एक रिपोर्ट में अखिल भारतीय रौनियार वैश्य महासभा के दावे के मुताबिक, भारत में रौनियार बनियों की आबादी डेढ़ करोड़ से ज्यादा है. जबकि बिहार में इनकी आबादी लगभग 20 लाख है. इसी रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में इस समुदाय की आबादी लगभग 50,000 है.
वहीं, “दैनिक भास्कर” में छपी एक रिपोर्ट में अखिल भारतीय रौनियार वैश्य महासभा के एक अन्य दावे के अनुसार, देश में रौनियार बनिया समाज की आबादी करीब 2.5 करोड़ है.
यहां बता दें कि भारत में अंतिम भारत जातीय जनगणना के आंकड़े 1931 में जारी किए गए थे. जातीय जनगणना से हीं रौनियार समाज की जनसंख्या के वास्तविक आंकड़े सामने आ सकते हैं.
References;
•https://timesofindia.indiatimes.com/city/patna/rauniyars-demand-inclusion-in-ebc-list/articleshow/67317010.cms
•https://www.bhaskar.com/bihar/madhubani/news/roniyar-demanded-to-cast-race-in-backward-032526-3368667.html
•https://www.bhaskar.com/jharkhand/ranchi/news/include-the-rooniar-bania-society-in-the-backward-classes-025638-3768067.html
•https://www.naidunia.com/chhattisgarh/ambikapur-sainiar-instead-of-rauniyar-registration-is-not-happening-7209124
•https://www.patrika.com/ambikapur-news/namaste-doctor-rauniyar-society-launched-namaste-doctor-campaign-6912322/
•https://www.etvbharat.com/hindi/jharkhand/state/gumla/provided-food-to-workers-from-outside-worker-in-gumla/jh20200504195100034
