Ranjeet Bhartiya 25/11/2021
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Last Updated on 25/11/2021 by Sarvan Kumar

हो (Ho) भारत में पाई जाने वाली एक प्रमुख जनजाति है. इन्हें होडोको और होरो के नाम से भी जाना जाता है. यह बांग्लादेश और नेपाल में भी निवास करते हैं.अधिकांश हो जीवन यापन के लिए कृषि और वन उत्पादों पर निर्भर है. भूमिहीन हो मजदूरी और खनन कार्य करते हैं.स्वभाव से यह सरल और मिलनसार होते हैं. यह अपने परोपकारी गुणों के लिए जाने जाते हैं. इस जनजाति के लोग युद्ध कला में माहिर होते थे.‌आइए जानते हैं हो जनजाति का इतिहास, हो शब्द की उत्पति कैसे हुई?

हो किस कैटेगरी में आते हैं?

झारखंड, उड़ीसा, बिहार और पश्चिम बंगाल में इन्हें अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe, ST) के रूप में वर्गीकृत किया गया है.

हो जनजाति की जनसंख्या, कहां पाए जाते हैं?

यह मुख्य रूप से झारखंड और उड़ीसा में पाए जाते हैं, जहां वह 2011 की जनगणना के के मुताबिक क्रमशः कुल अनुसूचित जनजाति आबादी का लगभग 10.7% और 7.3% हैं. कम संख्या में यह पश्चिम बंगाल और बिहार में भी निवास करते हैं. संख्या के मामले में यह झारखंड में संथाल, कुरुख और मुंडा के बाद चौथी सबसे बड़ी अनुसूचित जनजाति है.
झारखंड में यह मुख्य रूप से पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में पाए जाते हैं. उड़ीसा में यह क्योंझर, मयूरभंज और जाजपुर जिलों में निवास करते हैं. 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में इनकी कुल आबादी लगभग 16.58 लाख दर्ज की गई थी. झारखंड, उड़ीसा, पश्चिम, बंगाल और बिहार में इनकी आबादी क्रमशः 9.28 लाख, 7.056 लाख, 23,483 और 715 दर्ज की गई थी.

हो धर्म, प्रमुख त्योहार, भाषा, शब्द की उत्पति

यह सरना धर्म, हिंदू धर्म और ईसाई धर्म को मानते हैं.
इस समुदाय के 90% से ज्यादा लोग सरना धर्म को अनुसरण करते हैं. यह अपने ग्राम देवता “देशाउलि” को सर्वे सर्वा मानते हैं. यह प्रकृति के उपासक होते हैं. यह हिंदू देवी देवताओं को भी मानते हैं.

प्रमुख त्योहार
इनके प्रमुख त्यौहार हैं- मोगे पोरब, सलुई पूजा, मकर संक्रांति, सोहराई, करमा और अक्षय तृतीया, आदि.

भाषा
यह हो, उड़िया और हिंदी भाषा बोलते हैं.

हो शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?
“हो” शब्द की उत्पत्ति हो भाषा के शब्द “होडोको” और “होरो” से हुई है, जिसका अर्थ होता है- “मानव”.

हो जाति का इतिहास

यह भारत के ऑस्ट्रोएशियाटिक मुंडा जातीय समूह का हिस्सा हैं. भाषाई अध्ययनों से पता चलता है कि ऑस्ट्रोएशियाटिक मातृभूमि दक्षिण पूर्व एशिया में थी और ऑस्ट्रोएशियाटिक भाषाएं लगभग 4000-3500 साल पहले दक्षिण पूर्व एशिया से ओडिशा के तट पर आई थीं. ऑस्ट्रोएशियाटिक बोलने वाले दक्षिण पूर्व एशिया से फैल फैल गए और स्थानीय भारतीय आबादी के साथ व्यापक रूप से मिश्रित हो गये.

हो जाति के प्रमुख व्यक्ति 

मधु कोड़ा: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री

चित्रसेन सिंकू: 16वी लोकसभा के सदस्य

बागुन सुम्ब्रई: 14वीं लोकसभा में सांसद

लक्ष्मण गिलुवा: 16वीं लोकसभा में सांसद

डॉ प्रदीप कुमार बलमुचू: राजनेता और 14वीं लोकसभा के पूर्व सदस्य

देवेंद्र नाथ चंपिया: राजनेता और पूर्व विधायक

गीता कोड़ा: राजनेता

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