Sarvan Kumar 12/05/2018
नहीं रहे सबके प्यारे ‘गजोधर भैया’। राजू श्रीवास्तव ने 58 की उम्र में ली अंतिम सांस। राजू श्रीवास्तव को दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद से वो 41 दिनों से दिल्ली के एम्स में भर्ती थे। उनकी आत्मा को शांति मिले, मुझे विश्वास है कि भगवान ने उसे इस धरती पर रहते हुए जो भी अच्छा काम किया है, उसके लिए खुले हाथों से स्वीकार करेंगे #RajuSrivastav #IndianComedian #Delhi #AIMS Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 15/04/2020 by Sarvan Kumar

मोहम्मद अली जिन्ना वो नाम है ज़िसे धार्मिक आधार पर भारत को बांटकर पाकिस्तान बनाने का जिम्मेदार माना जाता है. मुहम्मद अली जिन्ना भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक महान नेता थे. वह खुद को  हिंदू-मुस्लिम एकता के नेता के रूप में शुरूआत कर भारतीय मुसलमानों के लिए एक स्वतंत्र राष्ट्र पाकिस्तान बना दिया. यह जानकर आप हैरान रह जायेंगे कि एक पीढी पहले तक जिन्ना का परिवार  हिंदू धर्म से  ताल्लुक रखता था.

हिन्दू था जिन्ना का परिवार

मोहम्मद अली जिन्ना के पिता हिंदू परिवार में पैदा हुए थे. एक नाराजगी के चलते उन्होंने अपना धर्म बदल लिया. वह मुस्लिम बन गए. जिंदगी भर न केवल इसी धर्म के साथ रहे बल्कि उनके बच्चों ने इसी धर्म का पालन किया. बाद में तो मोहम्मद अली जिन्ना ने धर्म के आधार पर पाकिस्तान ही बनवा डाला.

जिन्ना का परिवार गुजरात के काठियावाड़ का रहने वाला था. उनके दादा का नाम प्रेमजीभाई मेघजी ठक्कर था, वह हिंदू थे. वह काठियावाड़ के गांव पनेली के रहने वाले थे. प्रेमजी भाई ने मछली के कारोबार से बहुत पैसा कमाया.वह ऐसे व्यापारी थे, जिनका कारोबार विदेशों में भी था. उनके लोहना जाति से ताल्लुक रखने वालों को उनका ये बिजनेस नापसंद था. लोहना शुद्ध शाकाहारी थे और धार्मिक तौर पर मांसाहार से सख्त परहेज ही नहीं करते थे बल्कि उससे दूर रहते थे. लोहाना मूल तौर पर वैश्य होते हैं, जो गुजरात, सिंध और कच्छ में होते हैं. कुछ लोहना राजपूत जाति से भी ताल्लुक रखते हैं.

मछली के कारोबार ने कराया जाति से बहिष्कार

प्रेमजी भाई ने मछली का कारोबार शुरू किया और वह इससे पैसा कमाने लगे तो उनके ही जाति से इसका विरोध होना शुरू हो गया. उनसे कहा गया कि अगर उन्होंने इस बिजनेस से हाथ नहीं खींचे तो उन्हें जाति से बहिष्कृत कर दिया जाएगा. प्रेमजी ने बिजनेस जारी रखने के साथ जाति समुदाय में लौटने का प्रयास किया लेकिन बात नहीं बनी. उनका बहिष्कार जारी रहा. अकबर एस अहमद की किताब जिन्ना, पाकिस्तान एंड इस्लामिक आइडेंटीटी में विस्तार से इसकी जानकारी दी गई है.

जिन्ना के पिता ने गुस्से में उठाया कदम

बहिष्कार के बाद भी प्रेमजी तो हिंदू बने रहे लेकिन उनके बेटे पुंजालाल ठक्कर को पिता और परिवार का बहिष्कार अपमानजनक लगा. उन्होंने गुस्से में पत्नी के साथ अपने चारों बेटों का धर्म ही बदल डाला. वो मुस्लिम बन गए.  प्रेमजी के बांकी बेटे हिंदू धर्म में ही रहे. जिन्ना के पिता पुंजालाल के रास्ते अपने भाइयों और रिश्तेदारों से अलग हो गए वह काठियावाड़ से कराची चले गए. वहां उनका बिजनेस और फला-फूला. वो इतने समृद्ध व्यापारी बन गए कि उनकी कंपनी का आफिस लंदन तक में खुल गया. कहा जाता है कि जिन्ना के बहुत से रिश्तेदार अब भी हिंदू हैं और गुजरात में रहते हैं.

शुरू में धार्मिक पहचान से परहेज करते थे जिन्ना

जिन्ना के परिवार के सभी लोग न केवल मुस्लिम हो गए बल्कि इसी धर्म में अपनी पहचान बनाई. हालांकि पिता-मां ने अपने बच्चों की परवरिश खुले धार्मिक माहौल में की, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों का प्रभाव था. इसलिए जिन्ना शुरुआत में धार्मिक तौर पर काफी खुले विचार के और उदारवादी थे वह लंबे समय तक लंदन में रहे.

मुस्लिम लीग में आने से पहले उनके जीने का अंदाज मुस्लिम धर्म से एकदम अलग था. शुरुआती दौर में वह खुद की मुस्लिम बताए जाने से भी परहेज करते थे. यहां तक कि वो कभी धार्मिक रूप से सख्त मुस्लिम नेता नहीं थे. वह ज्यादातर अंग्रेजी बोलते थे, कट्टर इसलाम फोलो नही करते थे, शराब पीते थे, आधुनिक जीवन शैली थी.
गोखले ने ज़िन्ना को सभी सांप्रदायिक पूर्वाग्रह से मुक्त आदमी कहा था जो हिंदू-मुस्लिम एकता का राजदूत था. सियासत उन्हें  मुस्लिम लीग की ओर ले गई, जिसके एक जमाने में वह खुद कट्टर आलोचक थे. बाद में वह धार्मिक आधार पर ही पाकिस्तान के ऐसे पैरोकार बने कि देश के दो टुकड़े ही करा डाले.

 

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