Sarvan Kumar 20/01/2018

VHP के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण भाई तोगड़िया आजकलमीडिया में छाये हुए हैं. आज जो प्रवीण भाई तोगड़िया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कटुता सबके सामने आयी है वो अनायास नहीं हुआ है. यह कटुता . 2002-03 से पैदा हुई रार का नतीजा है. इसका भगवा खेमे में क्या प्रभाव पड़ेगा ये समय बताएगा.

प्रवीण तोगड़िया हुऐ गायब

प्रवीण भाई तोगड़िया पहले नाटकीय ढंग से गायब हुए फिर पार्क में बेहोशी की हालत में मिले. तोगड़िया ने दावा किया कि राजस्थान पुलिस उन्हें उठाकर ले गई. लेकिन सूत्रों बताते हैं के, तोगड़िया को न तो राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किया और न ही गुजरात की पुलिस ने. बाद में उन्होंने एक भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी और प्रधानमंत्री पर कई आरोप लगाए. तोगड़िया ने आरोप लगाया की उनके एनकाउंटर साजिश हो रही थी. कभी हिंदुत्व के पोस्टर बॉय रहे प्रवीण भाई तोगड़िया आज अलग-थलग होते दिख रहे.

कभी मोदी और तोगड़िया थे गहरे दोस्त

एक वक़्त था जब तोगड़िया और पीएम मोदी गहरे दोस्त हुआ करते थे. दोनों एक ही स्कूटर में एक साथ बैठकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) कार्यकर्ताओं से मिलने जाते थे और एक ही मिशन के लिए काम करते थे. फिर वक़्त के साथ रिश्ते बदलने लगे. सूत्र बताते हैं की 2002 में मोदी के गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद दोनों के रिश्तों में कड़वाहट आ गई , वजह बना तोगड़िया का गुजरात गृहमंत्रालय में दखलंदाज़ी करना.

इन कारणों से बदले हालात

आखिर ऐसा क्या हुआ कि आज प्रवीण तोगड़िया अकेले पड़ गए हैं?

वी. कोकजे को अध्यक्ष नहीं बनाना चाहते थे तोगड़िया

गुजरात के एक सीनियर VHP नेता के अनुसार, थोड़े दिन पहले ओडिशा के भुवनेश्वर में VHP के कार्यकारी बोर्ड की बैठक हुई थी. VHP के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर प्रवीण तोगड़िया का कार्यकाल 31 दिसंबर 2017 को पूरा हो रहा था. तोगड़िया के साथ VHP के अध्यक्ष राघव रेड्डी का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा था. RSS रेड्डी की जगह वी. कोकजे को अध्यक्ष बनाना चाहता था. तोगड़िया ने इसका कड़ा विरोध किया. तोगड़िया चाहते थे कि रेड्डी का कार्यकाल बढ़ाया जाए.

गोरक्षा पर केंद्र से विरोध

तोगड़िया ने एक कार्यक्रम में राम मंदिर और गोरक्षा को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला था. उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ लोग उन्हें साइड लाइन करना चाहते हैं. तोगड़िया ने गोसेवा के लिए कांग्रेस की तारीफ भी की थी. इसके बाद वो निशाने पर आ गए.

नरेन्द्र मोदी ने तोगड़िया  को किया नजरअंदाज

2002 की शुरुआत से ही तोगड़िया अलग-थलग पड़ने लगे थे. 2002 में गुजरात के तत्कालीन सीएम मोदी ने स्पष्ट कर दिया था कि तोगड़िया गुजरात सरकार के कामकाज और खासकर गृह विभाग के मामलों में दखलअंदाजी नहीं करेंगे. इस तरह साइडलाइन होने के बाद तोगड़िया ठगा सा महसूस करने लगे. सूत्र बताते हैं की गुजरात के गृह विभाग में प्रवीण भाई हस्तक्षेप करने लगे थे. बाद में फिर नरेन्द्र भाई मोदी ने प्रवीण भाई को विभाग में नजरअंदाज किए जाने का संदेश दे दिया था और खुद भी प्रवीण तोगड़िया से दूरी बनाने लगे थे. गुजरात पुलिस VHP कार्यकर्ताओं से सख्ती से पेश आने लगी और धीरे-धीरे प्रवीण तोगड़िया मोदी के कट्टर आलोचक बनते चले गए.

सद्भावना संदेश का मजाक

तोगड़िया ने साल 2011 में मोदी के मुसलमानों के लिए दिए गए सद्भावना संदेश का मजाक बनाया था. तोगड़िया ने कहा था कि मोदी ने अपनी इमेज बदलने के लिए हिंदुत्व के एजेंडा को दरकिनार कर दिया है.

गैर-जमानती वारंट

राजस्थान की गंगापुर कोर्ट ने 10 साल पुराने दंगे के एक मामले को लेकर तोगड़िया के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया था. कई बार जमानती वारंट जारी होने के बावजूद जब वह कोर्ट में पेश नहीं हुए तो कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया. इसी वारंट को तामील कराने के लिए राजस्थान पुलिस सोमवार को अहमदाबाद आई थी, लेकिन तोगड़िया के न मिलने पर उसे बैरंग लौटना पड़ा.

मोदी विरोधी अभियान

सूत्र बताते हैं की गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले तोगड़िया भाजपा के लिए घातक माने जा रहे थे. RSS प्रमुख मोहन भागवत के हस्तक्षेप के बाद तोगड़िया संतुलित रहे. लेकिन तोगड़िया पर्दे के पीछे काफी सक्रिय होकर मोदी विरोधी अभियान चलते रहे.

हार्दिक पटेल के साथ!

बताया जा रहा की हार्दिक पटेल के गुजरात में मजबूती से खड़े होने के पीछे भी तोगड़िया की भूमिका है और उन्होंने पाटीदार आंदोलन में परदे के पीछे से घी डालने का काम किया है.

प्रवीण तोगड़िया का रवैया हिंदुत्व खेमे पर क्या प्रभाव डालेगा ये तो वक़्त बताएगा. लेकिन हिन्दू हितों की रक्षा के लिए भगवा परिवार का एक रहना ज़रूरी है !

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