Sarvan Kumar 01/09/2018
मां के बिना जिंदगी वीरान होती है, तन्हा सफर में हर राह सुनसान होती है, जिंदगी में मां का होना जरूरी है, मां की दुआ से ही हर मुश्किल आसान होती है. Happy Mothers Day 2022 Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 24/08/2020 by Sarvan Kumar

पाकिस्तान, मुसलमान, लव जिहाद , शाकाहार और पंडितों पर जैन मुनि तरुण सागरजी “कड़वे विचार”

मुनि तरुण सागर के प्रवचन

1. पाकिस्तान के बारे में  तरुण सागर  जी ने कहा वो शैतान है, कुत्ते की पूंछ है जो सीधा नहीं हो सकता. उसे उसी की भाषा में जबाब देना चाहिए.

2. मुसलमानों की बढ़ती आबादी पर तरुण सागर ने कहा आबादी देश के लिए खतरा है. वो मुस्लिम भी देश के लिए खतरा हैं, जो ये कहते हैं कि भारत तेरे टुकड़े होंगे और भारत की हार पर जश्न मनाते हैं.

3. “लव जिहाद” पर जैन मुनि तरुण सागर ने कहा था कि लव जिहाद हिंदू लड़कियों को मुसलमान बनाने की साजिश है. सरकार इस बात को समझे नहीं तो एक और पाकिस्तान बन जाएगा.
बेटियां भागकर नहीं, जागकर शादी करे. यहां पैर के नीचे जब आप चींटी नहीं आने देती हो, तो विधर्मी के घर पकता मांस कैसे देख पाओगी. शादी की खुशी में अपने मां-बाप को शामिल करो.

4. शराब और मांस के तरुण सागर विरोधी रहे. कहते थे जो दया रखता है वो अपना पेट भरने के लिए किसी की गर्दन पर छुरी नहीं चला सकता. शराब छोड़ने से यह लोक सुधर जाएगा और मांसाहार त्यागने से तो परलोक भी सुधर जाएगा.

5. अंडे को शाकाहार बताना एक साजिश है. जब अंडा  फेंका जाने लगा तो लोग उसे शाकाहार बताने लगे. अंडा घर से बाहर फेंको या आंगन से तुलसी को हटा लो

6. किचन और रसोई में अंतर : जहां रस बरसे वह रसोई है और जहां किच- किच होती है वह किचन है. घर में दहलीज समाप्त हो गई है तो जूते रसोई तक पहुंच गए.

7. मैं पंडितों का नहीं उनके पाखंड का विरोधी हूं . जिस पंडित की कथनी और करनी में अंतर है, वह पंडित नहीं, व्यन्तर (पिशाच) है.

पंडित और घड़ी दुनिया के सबसे बड़े बेईमान हैं. घड़ी में तीन कांटे होते हैं, जो सबसे बड़ा कांटा होता है सेकण्ड का, वह सबसे छोटा काम करता है. पंडित के पास भी बातें बड़ी–बड़ी होती हैं, लेकिन करनी  कुछ नहीं होती हैं. पंडित तो केवल बातों के बादशाह होते हैं, यों कहो कि बातूनी होते हैं. महावीर कहते हैं– बातों के बादशाह नहीं, आचरण के आचार्य चाहिए. हां, कुछ पंडित हैं, जो सही मायने में पंडित हैं, जो व्रती हैं, भद्रपरिणामी हैं, मंद–कषायी हैं, वे पंडित सम्मान व आदर के पात्र हैं.

मैं तुम्हे पंडित या विद्वान नहीं बनाना चाहता. मैं तुम्हारे प्रज्ञा को जागृत कर तुम्हें ऋषि बनाना चाहता हूं. मैं तुम्हें ज्ञान और सिद्धांत नहीं सिखाऊंगा, क्योंकि महावीर पांडित्य के भूखे नहीं हैं, महावीर आचरण के भूखे हैं.

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