Ranjeet Bhartiya 10/06/2022
जाट गायक सिद्धू मूसेवाला आज हमारे बीच नहीं है पर उनकी याद हमारे दिलों में हमेशा बनी रहेगी। अपने गानों के माध्यम से वह अमर हो गए हैं । सिद्धू मूसेवाला की 29 मई को मानसा जिले में उनके घर से कुछ किलोमीटर दूर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्या किसने और किस वजह से की यह तो जांच के बाद ही पता चल पाएगा लेकिन हमने जाट समाज का एक अनमोल रत्न खो दिया है। उनके फैंस पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। jankaritoday.com की टीम के तरफ से उनको एक सच्ची श्रद्धांजलि! Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 10/06/2022 by Sarvan Kumar

भगवान विष्णु के अवतार और अयोध्या के राजा श्री रामचंद्र के पुत्र कुश के वंशज नरवर के राजा सोढ़ा सिंह के पुत्र दूल्हे राय ने 1137 ईस्वी में तत्कालीन ढूंढाड़ प्रदेश (रामगढ़) में मीणाओं को हराकर तथा बाद में दौसा के बड़गुर्जरों को पराजित करके कछवाहा राजवंश की स्थापना की थी. दौसा को कछवाहा राजवंश पहला राजधानी बनाया गया था. बाद में इस वंश के राजा कोकिल देव ने आमेर को अपनी राजधानी बनाया था. आइए जानते हैं आमेर के कछवाहा वंश की वंशावली के बारे में-

आमेर के कछवाहा वंश की वंशावली

•27 दिसंबर 966 – 15 दिसंबर 1006: सोढ़ा देव
•1006 – 28 नवंबर 1036: दूल्हे राय
•28 नवम्बर 1036 – 20 अप्रैल 1039: कोकिल देव
•21 अप्रैल 1039 – 28 अक्टूबर 1053: हणुदेव
•28 अक्टूबर 1053 – 21 मार्च 1070: जंदेदेव

•22 मार्च 1070 – 20 मई 1094: पज्जुन राय
•20 मई 1094 – 15 फरवरी 1146: मलयासी
•15 फरवरी 1146 – 25 जुलाई 1179: विजलदेव
•25 जुलाई 1179 – 16 दिसंबर 1216: राजदेव
•16 दिसंबर 1216 – 18 अक्टूबर 1276: किल्हन

•18 अक्टूबर 1276 – 23 जनवरी 1317: कुंतल
•23 जनवरी 1317 – 6 नवंबर 1366: जुणसी
•6 नवंबर 1366 – 11 फरवरी 1388: उदयकर्ण
•11 फरवरी 1388 – 16 अगस्त 1428: नरसिंह
•16 अगस्त 1428 – 20 सितंबर 1439: बनबीर

•20 सितंबर 1439 – 10 दिसंबर 1467: उदरण
•10 दिसंबर 1467 – 17 जनवरी 1503: चंद्रसेन
•17 जनवरी 1503 – 4 नवंबर 1527: पृथ्वीराज सिंह प्रथम
•4 नवंबर 1527 – 19 जनवरी 1534: पूरनमल
•19 जनवरी 1534 – 22 जुलाई 1537: भीम सिंह

•22 जुलाई 1537 – 15 मई 1548: रतन सिंह
•15 मई 1548 – 1 जून 1548: असकरण
•1 जून 1548 – 27 जनवरी 1574: भारमल
•27 जनवरी 1574 – 4 दिसंबर 1589: भगवंत दास
•4 दिसंबर 1589 – 6 जुलाई 1614: मान सिंह (I)/ Mirza Raja Man Singh

•6 जुलाई 1614 – 13 दिसंबर 1621: भाऊ सिंह
•13 दिसंबर 1621 – 28 अगस्त 1667: जय सिंह प्रथम
•10 सितंबर 1667 – 30 अप्रैल 1688: राम सिंह •प्रथम 30 अप्रैल 1688 – 19 दिसंबर 1699: बिशन सिंह

आमेर के कछवाहा वंश के प्रसिद्ध राजा

Raja Man Singh I

मान सिंह प्रथम

मान सिंह प्रथम, जिसे मिर्जा राजा मान सिंह (21 दिसंबर 1550 – 6 जुलाई 1614) के नाम से जाना जाता है, आमेर के 29वें कछवाहा राजपूत राजा थे, जिन्हें बाद में राजपुताना में जयपुर राज्य के रूप में जाना जाता था। वह मुगल सम्राट अकबर के सबसे शक्तिशाली और भरोसेमंद जनरल थे, जिन्होंने उन्हें नवरत्नों, या अकबर के शाही दरबार के नौ (नव) रत्नों (रत्न) में शामिल किया था। मान सिंह ने काबुल, बल्ख, बुखारा, बंगाल और मध्य और दक्षिणी भारत में 67 महत्वपूर्ण युद्ध लड़े। वह दोनों राजपूतों के साथ-साथ मुगलों की युद्ध रणनीति में भी पारंगत थे। 

राजा भारमल

राजा भारमल, जिसे बिहारी मल, भागमल और बिहार मल (सी। 1498 – 27 जनवरी 1574) के नाम से भी जाना जाता है, आमेर का एक राजपूत शासक था, जिसे बाद में भारत के वर्तमान राजस्थान राज्य में जयपुर के नाम से जाना जाता था। उनकी बेटी, मरियम-उज़-ज़मानी (जोधा बाई के नाम से प्रसिद्ध) की शादी 1562 में तीसरे मुगल सम्राट अकबर से हुई थी और जल्द ही वह उनकी सबसे प्यारी और पसंदीदा पत्नी बन गई।

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