Ranjeet Bhartiya 11/06/2022
जाट गायक सिद्धू मूसेवाला आज हमारे बीच नहीं है पर उनकी याद हमारे दिलों में हमेशा बनी रहेगी। अपने गानों के माध्यम से वह अमर हो गए हैं । सिद्धू मूसेवाला की 29 मई को मानसा जिले में उनके घर से कुछ किलोमीटर दूर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्या किसने और किस वजह से की यह तो जांच के बाद ही पता चल पाएगा लेकिन हमने जाट समाज का एक अनमोल रत्न खो दिया है। उनके फैंस पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। jankaritoday.com की टीम के तरफ से उनको एक सच्ची श्रद्धांजलि! Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 11/06/2022 by Sarvan Kumar

राजधानी किसी राज्य के राज्य का शासन केंद्र होता है. आइए जानते हैं कछवाहा वंश के राजधानियों के बारे में- राजस्थान के उत्तर पूर्व में कभी ढूंढ नाम की नदी बहा करती थी. यही कारण है कि जयपुर-सीकर के आसपास के क्षेत्र को ढूंढाड़ प्रदेश के नाम से जाना जाता है. ढूंढाड़ प्रदेश पर कछवाहा राजवंश का शासन था. कछवाहा राजवंश की स्थापना दूल्हे राय (तेजकरण) ने किया था. कछवाहा राजवंश की कई राजधानियां रहीं, जिसका क्रम इस प्रकार है-

कछवाहा राजवंश की राजधानियां

(1). दौसा 

दूल्हे राय ने 1137 ईस्वी में मीणाओ और बड़गुर्जरों को पराजित करके दौसा को अपनी प्रारंभिक राजधानी बनाया था.

(2). रामगढ़

दौसा के पश्चात, कछवाहा शासकों ने जमवारामगढ़ को अपनी दूसरी राजधानी बनाया था. रामगढ़ को पहले मांच के नाम से जाना जाता था. कछवाहा राजपूतों ने मांच को मीणाओ से जीतकर इसका नाम रामगढ़ रख दिया और यहां अपनी कुलदेवी जमवाय माता का प्रसिद्ध मंदिर बनवाया. इसलिए इसे जामवा रामगढ़ कहा जाता है.

(3). आमेर

कछवाहा राजवंश में कोकिल देव (Kokil Dev) नाम के राजा हुए. उन्होंने 1207 ईस्वी में आमेर के मीणाओं को हराकर आमेर को अपनी राजधानी बनाया था. आमेर जयपुर की स्थापना तक कछवाहा वंश की राजधानी रही. आमेर 520 सालों तक यानी कि 1727 तक कछवाहा राजवंश की राजधानी रही.

(4). जयपुर

1727 ईस्वी में सवाई जयसिंह द्वितीय ने जयपुर शहर की स्थापना की. इसके पश्चात जयपुर कछवाहा राजवंश की राजधानी बन गई.

कछवाहों को कहा जाता है “रघुवंश तिलक” !

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु के अवतार और अयोध्या के राजा श्री राम के 2 पुत्र हुए, लव और कुश. कुश के वंशज कुशवाहा कहलाए. कुशवाहा कालांतर में कछवाहा के नाम से भी जाने जाने लगे. 1612 ई. के आमेर लेख में कछवाहों को “रघुवंश तिलक” कहा गया है. भगवान राम दशरथ के पुत्र थे. दशरथ महाराज अज के पुत्र थे. और अज रघु के पुत्र थे. रघु इक्ष्वाकु वंश के महान प्रतापी राजा थे और अपने कुल में सर्वश्रेष्ठ गिने जाते हैं. यही कारण है कि मर्यादापुरुषोत्तम श्री रामचंद्र भी अपने को रघुवंशी कहने में परम गौरव की अनुभूति करते हैं. महाराज रघु के कारण ही सारा सूर्यवंश रघुवंश कहलाने लगा. इन्हीं के नाम पर श्री राम को राघव, रघुवर, रघुराज, रघुनाथ, रघुवीर आदि कहा जाता है.

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