Ranjeet Bhartiya 04/12/2021
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Last Updated on 04/12/2021 by Sarvan Kumar

कोलम (Kolam) भारत में पाई जाने वाली एक जनजाति है. यह एक कृषक जनजातीय समुदाय है. भारत सरकार के सकारात्मक भेदभाव की प्रणाली आरक्षण के अंतर्गत महाराष्ट्र, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में इन्हें अनुसूचित जनजाति (Schedule Tribe, ST) के रूप में वर्गीकृत किया गया है. साल 2018 में सरकार द्वारा महाराष्ट्र राज्य में इन्हें कटकारिया (कठोडिया) और मारिया गोंड जनजातियों के साथ विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों (Particularly Vulnerable Tribal groups) के रूप में चिह्नित किया गया है. Naked Eye Single Tube Red Cell Osmetic Fragility Test (NESTROFT) से पता चलता है कि इस जनजाति में थैलेसीमिया का अधिक खतरा होता है.

कोलम जनजाति की जनसंख्या, कहाँ पाए जाते हैं?

यह मुख्य रूप से महाराष्ट्र और तेलंगना में पाए जाते हैं.
महाराष्ट्र के यवतमाल, चंद्रपुर और नांदेड़ जिलों में इनकी बहुतायत आबादी है. 2011 के जनगणना में, भारत में इनकी कुल जनसंख्या 2,39,583 दर्ज की गई थी. इसमें से 1,94,671 महाराष्ट्र में, जबकि 44,912 तेलंगाना में निवास करते हैं. छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में भी इनकी आबादी है.‌

कोलम जनजाति का इतिहास

यह अपने स्थानीय आदिवासी धर्म और हिंदू धर्म का पालन करते हैं. यह प्रकृति की पूजा करते हैं. यह अपने आदिवासी देवता भीमायक की पूजा करते हैं. साथ ही यह हिंदू देवी देवताओं की पूजा करते हैं. पहले कोलम समाज संयुक्त परिवारों से बना हुआ था, जो सामूहिक रूप से कृषि कार्य के लिए जिम्मेदार होते थे. लेकिन वर्तमान में इस जनजाति के अधिकांश लोग एकल परिवार में रहते हैं. हिंदू धर्म के तहत यह एकांकी विवाह यानी कि एक पत्नी/पति विवाह (Monogamy) का पालन करते हैं. कोलम एक अंतर्विवाही समूह हैं. यह जनजाति 12 बहिर्विवाही कुलों में विभाजित हैं, जिन्हें पेडी कहा जाता है: टेकम, वटुलकर, नेकवाराका, गोधनकर, वाथोरा, शिवले, पारसिनकुल, घोटकर, पारस्कर, रविकुल, मौटकर, शूटकर.कोलम जनजाति के लोग कोमली भाषा बोलते हैं. कोमली भाषा गोंड भाषा की तरह द्रविड़ भाषाओं का मध्यवर्ती समूह है.

 

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