Ranjeet Bhartiya 03/11/2021

मेव (MEO) मुस्लिम बिरादरी का एक जातीय समुदाय है. इन्हें मेवाती भी कहा जाता है. यह हरियाणा के मेवात जिले तथा राजस्थान के अलवर और भरतपुर जिलों में निवास करते हैं. हरियाणा के नूह, पलवल और फरीदाबाद जिलों में इनकी अच्छी आबादी है. यहां यह लगभग 1000 वर्षों से रहते आ रहे हैं. यह यह मूल रूप से उत्तर-पश्चिमी भारत , विशेष रुप से मेवात के आसपास, और पाकिस्तान में रहते थे. राजस्थान और हरियाणा के अलावा यह कसूर, लाहौर, सियालकोट, शेखपुरा, नरोवाल, ननकाना साहिब, मुल्तान, कराची आदि पाकिस्तानी शहरों में भी पाए जाते हैं. यह मेवाती भाषा बोलते हैं. आइए जानते हैं मेेव समाज का इतिहास, मेव शब्द की उत्पति कैसे हुई?

मेव शब्द की उत्पति कैसे हुई ?

प्रकृति की पूजा करने वाले आर्यों के कई दलों में से एक मेद कबीले के लोग भी तुर्कमेनिस्तान, किर्गिस्तान, अजर बैजान और ईरान जैसे मध्य एशिया के इलाकों से अफगानिस्तान और सिंध के रास्ते भारत भूमि में आये. वैदिक युग में मेद कहलाने वाले ये लोग जब प्राकृत भाषा के युग तक पहुंचे तो मेद का ‘द’ अक्षर ‘व’ में बदल गया और मेद से मेव हो गया. कहते हैं कि कभी मेवाड़ का नाम भी मेदपाट था. तो ऐसे में मेवाड़, मारवाड़ और मेवात सभी सहोदर ही प्रतीत होते हैं.

मेव समाज का इतिहास

एक सिद्धांत के अनुसार, यह पहले हिंदू राजपूत हुआ करते थे जो 12वीं और 17 शवीं शताब्दी के बीच इस्लाम में परिवर्तित होकर मुसलमान बन गए. कहा जाता है कि इस्लामिक आक्रमण के बाद उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया. दूसरी मान्यता यह है कि सूफी संतो के प्रभाव आकर यह हिंदू से मुसलमान बन गए. एक और मान्यता यह है कि मेव, मीना नामक हिंदू जाति से संबंध रखते थे जो धर्म परिवर्तित करके मुसलमान हो गए. दक्षिणी हरियाणा और उत्तर पूर्वी राजस्थान में निवास करने वाले इस समुदाय को मुस्लिम राजपूत के रूप में जाना जाता है. इन्हें हिंदू और इस्लामी रीति-रिवाजों और सिद्धांतों के सहज मिश्रण के लिए पहचाना जाता है. यह खुद को भगवान श्री कृष्ण और श्री राम के वंशज होने का दावा करते हैं.

मेव  समाज किस धर्म को मानते हैं?

यह इस्लाम को मानते हैं. लेकिन इनकी जातीय संरचना हिंदू जातियों के समान है. मुस्लिम धर्म को मानने के बावजूद यह जाति एक सामाजिक-सांस्कृतिक जातीय समुदाय के रूप में विशिष्ट पहचान रखती है. इन्हें हिंदू और इस्लामी रीति-रिवाजों और सिद्धांतों के सहज मिश्रण के लिए पहचाना जाता है. यह खुद को भगवान श्री कृष्ण और श्री राम के वंशज होने का दावा करते हैं. हिंदू जाति से संबंध रखते थे जो धर्म परिवर्तित करके मुसलमान हो गए. राजस्थान में निवास करने वाले कई मेवों ने मिश्रित हिंदू-मुस्लिम नामों को बरकरार रखा है. अलवर के मेव इलाकों में राम खान या शंकर खान जैसे नाम असामान्य नहीं है. यह मुस्लिम त्यौहारों जैसे ईद उल-फितर और ईद उल-अज़हा के के साथ-साथ हिंदू त्योहारों जैसे होली दिवाली को भी मनाते हैं.

 

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