Sarvan Kumar 26/12/2020

देश दो दलों में बंट गया है एक मोदी विरोधी और दूसरा मोदी समर्थक। जहाँ मोदी समर्थकों को सरकार का हर काम अच्छा लगता है वहीं मोदी विरोधीयों को सरकार का हर काम बुरा।आज किसान बिल के विरोध में लोग सड़को पर है और सरकार से इस बिल को वापस कराने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
यह पहली बार नहीं कि लोग मोदी विरोध में खड़े हैं इसके पहले भी वे सरकार के कई योजनाओं का विरोध कर चुके हैं। आपको नोटबंदी तो याद होगा हीं किस तरह सारे विपक्षी पार्टियां एकजुट हो गए थे। विपक्षी पार्टियों ने काफी कोशिश कि सरकार को इस मुद्दे पर घेरकर उसे सत्ता से बाहर किया जाए लेकिन वे ऐसा नहीं कर सके उसके बाद राफेल,धारा 370, राम मंदिर, ट्रिपल तलाक और CAA जैसे मुद्दों पर भी सरकार को काफी विरोध झेलना पड़ा। विपक्षियों के लाख कोशिशों के बाद भी सरकार टस से मस नहीं हुई और उन्होंने वही किया जो उनके एजेंडा में शामिल था।
सरकार और विपक्ष राजनीति के दो धूरी तो थे ही आम जनता भी दो हिस्सों में बांट दिये गए। आम जनता को अंधभक्त और चम्मचे कर संबोधित किया जाने लगा। इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी सरकार को इतना ज्यादा विरोध झेलना पड़ा हो। सवाल अब यह है कि इतने भारी विरोध के बावजूद भी सरकार टिकी कैसे हुई है और वह लगातार जीत पर जीत दर्ज क्यों करते जा रहे हैं। मोदी विरोध में विपक्षी पार्टियां इस कदर अंधी हो गई है कि वे सही और गलत में फर्क करना भूल गए हैं। सही मुद्दों को भी गलत बताकर वह बस जनता का गुमराह करने का प्रयास करते आ रहे हैं। डिजिटल साधनों से लैस आम जनता को मूर्ख बनाना अब आसान नहीं रहा। सोशल प्लेटफॉर्म से जानकारियां इकट्ठी कर जनता खुद सही और गलत का फैसला कर रही है। वह नेताओं के बहकावे में नहीं आ रहे। यही कारण है कि लाख चाहते हुए भी विपक्षी पार्टियां सरकार से अपनी बात मनवाने में नाकाम हो रहे हैं। जिस दिन वे सही मुद्दों पर सरकार का साथ देने का काम करेंगे तो जनता भी उनके साथ खड़ी होगी और वह मोदी सरकार को सत्ता से हटाकर खुद सत्ता में काबिज हो सकते हैं। मोदी  विरोध में  विपक्ष अंधी तो है ही, लगता हैैैै अब बहरी भी हो गई है और उस तक जनता की आवाज भी नहीं पहुंच पा रही है।

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