Ranjeet Bhartiya 21/12/2021
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Last Updated on 21/12/2021 by Sarvan Kumar

कलंदर (Qalandar) उत्तर भारत और पाकिस्तान में पाया जाने वाला एक मुस्लिम जातीय समुदाय है. इन्हें कलंदर फकीर (Qalander Faqir) के नाम से भी जाना जाता है. कुछ कलंदर नेपाल के तराई क्षेत्र में भी निवास करते हैं. ऐतिहासिक रूप से, सभी कलंदर कभी खानाबदोश समुदाय थे, लेकिन इनमें से कई अब बस गए हैं. उत्तर भारत में इनमें से कुछ परंपरागत रूप से भालू, बंदर और अन्य जानवरों का खेल दिखा करके अपना जीवन यापन करते रहे हैं. उनमें से कुछ, विशेष रूप से बिहार के बिहारशरीफ और दानापुर में, विभिन्न खानकाह से जुड़ गए.पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने भालू की लड़ाई के पारंपरिक व्यवसाय की आलोचना करने लगे और भालू तथा अन्य जानवरों के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग करने लगे. साल 1972 में, भारत सरकार ने भालू पकड़ने और इसके शिकार करने को अवैध घोषित कर दिया और इस पर प्रतिबंध लगा दिया. इसके कारण कलंदरों के पारंपरिक व्यवसाय में भारी गिरावट दर्ज की गई और जीवन यापन के लिए इन्हें रोजी-रोटी के अन्य विकल्पों को अपनाना पड़ा. वर्तमान में इनमें से कुछ खेती कर रहे हैं. लेकिन जमीन कम होने के कारण, इनमें से कई बटाईदार हैं. कलंदरों का एक बहुत बड़ा समूह अब दिहाड़ी मजदूर हैं, और यह सामाजिक और आर्थिक रूप से बेहद हाशिए पर रहने वाले समुदाय हैं.आइए जानते हैं कलंदर (Qalandar) जाति का इतिहास, कलंदर की उत्पति कैसे हुई?

कलंदर जाति एक परिचय

भारत में यह मुख्य रूप से हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में पाए जाते हैं. यह सुन्नी इस्लाम को मानते हैं. यह कई लोक परंपराओं और मान्यताओं को भी मानते हैं. सूफी संत बू अली कलंदर में इनकी विशेष आस्था है. उत्तर प्रदेश में कलंदर समुदाय तीन उप समूहों में विभाजित है- पूर्वी रोहिलखंड में लंगरे, पश्चिमी रोहिलखंड में रोहिल्ला और अवध में माछले. यह कलंदरी, हिंदी और उर्दू बोलते हैं.

कलंदर जाति की उत्पत्ति

भारत में निवास करने वाले कलंदर अपनी उत्पत्ति को सूफी संत बू अली शाह कलंदर के भक्तों से जोड़ते हैं. संत बू अली शाह कलंदर को हरियाणा के पानीपत में दफनाया गया है. इन भक्तों ने किसी अज्ञात कारण से करनाल और पानीपत शहरों में अपने घरों को छोड़ दिया और नए क्षेत्रों में जाकर बस गए, जो अब वर्तमान में उत्तर प्रदेश में स्थित है. शुरुआत में, इन भक्तों का संबंध कलंदरियाह फकीरों के सूफी पंथ से था, लेकिन बाद में इन्होंने भालू लड़ाने के पेशे को अपना लिया. पाकिस्तान में यह मुख्य रूप से पाकिस्तानी पंजाब में पाए जाते हैं. इनके परंपराओं के अनुसार, कलंदर उन पूर्वजों के वंशज हैं जो सुदूर अतीत में मध्य एशिया के बल्ख और बुखारा से आए थे. कहा जाता है कि यहां बसने वाले सभी पानीपत के सूफी संत बू अली कलंदर के भक्त थे.

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