Ranjeet Bhartiya 10/01/2023
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Last Updated on 10/01/2023 by Sarvan Kumar

भारत में हजारों जातियाँ निवास करती हैं जो भारत की जनसंख्या का निर्माण करती हैं. ये सभी जातियाँ विकास के मापदंडों के आधार पर एक दूसरे से भिन्न हैं. इनमें से कुछ जातियां विकास के मामले में अन्य जातियों से काफी आगे निकल गई हैं तो कुछ विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए संघर्ष कर रही हैं. जातियों के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए सरकार द्वारा कई प्रावधान और योजनाएँ बनाई गई हैं. इसी क्रम में आइए जानते हैं राजभर ओबीसी जाति के बारे में.

राजभर ओबीसी जाति

भारत में जातियों के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए सकारात्मक भेदभाव की व्यवस्था का प्रावधान है, जिसे आरक्षण के नाम से जाना जाता है. सकारात्मक भेदभाव की यह प्रणाली जाति आधारित है और मुख्य रूप से ब्रिटिश भारत की जनगणना द्वारा प्रदान की गई जानकारी पर आधारित है. कई सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के अध्ययन से पता चला है कि जाति पदानुक्रम क्षेत्र के अनुसार भिन्न होता है. एक जाति किसी क्षेत्र में सामाजिक पदानुक्रम में निम्न हो सकती है और दूसरे क्षेत्र में प्रभावशाली हो सकती है. यही कारण है कि प्रत्येक भारतीय राज्य के लिए अलग-अलग एससी, एसटी और ओबीसी सूचियां हैं. मुख्य विषय पर आने से पहले यह समझना आवश्यक है कि पिछड़ा वर्ग किसे कहते हैं. यद्यपि संविधान में पिछड़ा वर्ग की स्पष्ट परिभाषा नहीं है, यह शब्द आम तौर पर उन सामाजिक समूहों को संदर्भित करता है जो सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक रूप से वंचित और अन्य सामाजिक समूहों की तुलना में पिछड़े हैं. पिछड़े वर्ग की विशेषताओं की बात करें तो इस वर्ग के लोगों को कई प्रकार की आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. इस समूह में गरीबी और अशिक्षा आम है.राजभर समुदाय की बात करें तो भारत के अलग-अलग राज्यों में इनकी मौजूदगी है. लेकिन वे मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग यानी पूर्वांचल में केंद्रित हैं. इनका गौरवशाली इतिहास रहा है. वर्तमान स्थिति की बात करें तो हिन्दू समाज की सामाजिक संरचना में इनका स्थान निम्न है. यह मुख्य रूप से आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है. इनमें से कई पशुपालन व्यवसाय से भी जुड़े हैं. इनमें से कई ने दुकानदारी और छोटे व्यवसाय करना भी शुरू कर दिया है. यह समुदाय सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े पन का शिकार है. इसीलिए उत्तर प्रदेश सहित भारत के कई राज्यों जैसे झारखंड, राजस्थान, दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड आदि में इन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के रूप में वर्गीकृत किया गया है.


References:

•National Commission for Backward Classes

•https://www.indiatoday.in/magazine/nation/story/20170116-caste-reservation-minority-backward-class-985516-2017-01-04

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