Ranjeet Bhartiya 30/10/2021

भर (Bhar) भारत में पाई जाने वाली एक जाति समुदाय है. इन्हें राजभर (Rajbhar) के नाम से भी जाना जाता है.
यह जाति उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, बिहार, नेपाल और भारत के अन्य राज्यों में निवास करती है.  पूर्वी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, वाराणसी, अंबेडकर नगर व फ़ैज़ाबाद जिलों में इनकी बहुतायत आबादी है. इस जाति को नाविको या मल्लाहों की एक उपजाति के रूप में भी संदर्भित किया जाता है. आइए जानते हैं  राजभर जाति का इतिहास,  राजभर शब्द की उत्पति  कैैसे हुई?

राजभर जाति का इतिहास

इनका इतिहास गौरवशाली रहा है. मध्यकालीन भारत में इन्होंने खुद के छोटे-छोटे कबीलों को स्थापित किया था. पूर्वी उत्तर प्रदेश में इनके छोटे-छोटे राज्य में हुआ करते थे. लेकिन उत्तर मध्य काल में राजपूतों और मुगलों ने उन्हें वहां से विस्थापित कर दिया था. भर जाति के अंतिम राजा को जौनपुर के सुल्तान इब्राहिम शाह शार्की ने मारा था. आर्य समाज आंदोलन से प्रभावित होकर, बैजनाथ प्रसाद अध्यापक ने 1940 में “राजभर जाति का इतिहास” नामक एक पुस्तक को प्रकाशित किया‌ था. इस पुस्तक ने यह साबित करने का प्रयास किया गया था कि राजभर पहले शासक थे और इनका संबंध प्राचीन भर जनजाति से है.

राजभर जाति की जनसंख्या

जनगणना के आंकड़ों के अभाव में किसी भी जाति की जनसंख्या का सटीक आकलन संभव नहीं है. लेकिन सामाजिक न्याय समिति 2001 हुकुम सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में राजभर जाति की जनसंख्या 2.44% है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में राजभरों की आबादी करीब 20 प्रतिशत है. यह हिंदू धर्म को मानते हैं. इनका सांस्कृतिक आचरण अन्य हिन्दू समुदायों जैसा ही है. यह हिंदी, अवधी और भोजपुरी भाषा बोलते हैं.

राजभर  जाति  किस कैटेगरी में आते हैं?

उत्तर प्रदेश में इन्हें आरक्षण व्यवस्था के अंतर्गत अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अंतर्गत सूचीबद्ध किया गया है. साल 2013 में, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार ने भर और अन्य 16 अति पिछड़ी जातियों को ओबीसी सूची से निकालकर अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) वर्ग में शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया था. लेकिन इसे बैंक की राजनीति मानते हुए अदालती रोक के बाद भारत सरकार ने स्थगित कर दिया था.

राजभर  जाति  की वर्तमान स्थिति

भर मुख्य रूप से छोटे किसानों का समुदाय है. समान्यतः इस जाति के लोगों का भूमि स्वामित्व कम ही है. इनमें से ज्यादातर लोग भूमिहीन और खेतिहर मजदूर हैं, जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं. आमदनी बढ़ोतरी के लिए यह मजदूरी तथा अन्य छोटे-मोटे कार्य करते हैं.

राजभर  जाति के प्रमुख व्यक्ति

राजा सुहेलदेव

इस जाति के लोग राजा सुहेलदेव को अपना नायक बताते हैं. कहा जाता है कि 11 वीं सदी में महमूद ग़ज़नवी के भारत पर आक्रमण के समय सालार मसूद ग़ाज़ी ने बहराइच पर हमला किया था. लेकिन वह वहां के राजा सुहेलदेव से बुरी तरह पराजित हुआ और लड़ाई में मारा गया.

ओम प्रकाश राजभर

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के संस्थापक ओम प्रकाश राजभर इसी जाति से आते हैं. उनकी पहचान पिछड़ी जाति के बड़े नेता के तौर पर की जाती है. उन्होंने टेंपो चालक से उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री तक का राजनीतिक सफर तय किया है. साल 2017 में ओमप्रकाश पहली बार विधायक बने थे. विधायक चुने जाने के बाद उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया था.

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