Sarvan Kumar 16/02/2023
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Last Updated on 16/02/2023 by Sarvan Kumar

तात्या टोपे (Tatya tope)1857 के विद्रोह के अग्रणी नेताओं में से एक थे जिनकी वीरता और साहस आज भी भारतीयों को प्रेरित करते हैं. कर्नल मालेसन ने सन् 1857 के विद्रोह का इतिहास लिखा है. उन्होंने कहा कि तात्या टोपे चम्बल, नर्मदा और पार्वती की घाटियों के निवासियों के ’हीरो‘ बन गये हैं. सच तो ये है कि तात्या सारे भारत के ’हीरो‘ बन गये हैं. पर्सी क्रास नामक एक अंग्रेज ने लिखा है कि ’भारतीय विद्रोह में तात्या सबसे प्रखर मस्तिश्क के नेता थे. उनकी तरह कुछ और लोग होते तो अंग्रेजों के हाथ से भारत छीना जा सकता था.16 फरवरी, 1814 को जन्मे प्रथम स्वातंत्र्य समर में अंग्रेजो के विरुद्ध भीषण युद्ध लड़ने वाले क्रांतिवीर तात्या टोपे की गुना, चंदेरी, ईसागढ़ के साथ ही शिवपुरी के पोहरी, कोलारस के वनों में गुरिल्ला युद्ध करने की अनेक गाथाएं हैं. उन्होंने अपने कुशल नेतृत्व एवं वीरता से साम्राज्यवादी ताकतों को झकझोर दिया और भारतीय स्वतंत्रता सैनानियों में क्रांति की ज्वाला प्रजवल्लित की. आइए जानते हैं तात्या टोपे का पूरा नाम,  इस महान स्वतंत्रता सेनानी के बारे में 10 रोचक जानकारी.

तात्या टोपे से जुड़ी 10 रोचक जानकारी

1.तात्या का जन्म महाराष्ट्र में नासिक के निकट येवला नामक गाँव में एक देशस्थ ब्राह्मण परिवार में हुआ था.

2.तात्या का वास्तविक नाम रामचंद्र पाण्डुरंग राव था, परंतु लोग स्नेह से उन्हें तात्या के नाम से पुकारते थे.

3.कुछ समय तक तात्या ने ईस्ट इंडिया कम्पनी में बंगाल आर्मी की तोपखाना रेजीमेंट में भी काम किया था

4. तात्या टोपे के उपनाम ‘टोपे’ का अर्थ है कमांडिंग ऑफिसर. यह कैनन के लिए हिंदी शब्द (तोप) से लिया गया है.कुछ लोगों का यह भी मानना है कि बाजीराव ने तात्या को एक बेशकीमती और नायाब टोपी दी थी. तात्या इस टोपे को बडे चाव से पहनते थे. अतः बडे ठाट-बाट से वह टोपी पहनने के कारण लोग उन्हें तात्या टोपी या तात्या टोपे के नाम से पुकारने लगे.

5. वह एक शानदार सेनापति और गुरिल्ला युद्ध में माहिर थे.

6. रानी लक्ष्मीबाई के मृत्यु के बाद तात्या टोपे ने अगले 10 महीनों तक अंग्रेजों के नाक में दम कर दिया था.

7. तात्या टोपे ने कई भूमिकाएं निभाईं। वे नाना साहब के दोस्त, दीवान, प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख के पदों पर भी अपनी सेवाएं देते रहें.

8. अपने जीवनकाल में उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ 150 लड़ाईयां लड़ीं और 10,000 ब्रिटिश सैनिकों को मौत के घाट उतारा.

9.तात्या टोपे का जन्म सन 1814 ई. में नासिक के निकट पटौदा ज़िले में येवला नामक ग्राम में हुआ था. उनके पिता का नाम पाण्डुरंग त्र्यम्बक भट्ट तथा माता का नाम रुक्मिणी बाई था. तात्या टोपे देशस्थ कुलकर्णी परिवार में जन्मे थे. इनके पिता पेशवा बाजीराव द्वितीय के गृह-विभाग का काम देखते थे.

10. तात्या टोपे अंग्रेजो के हाथ नही आये लेकिन 1859 में सिंधिया के सामंत मानसिंह ने विश्वासघात करके उसे पकडवा दिया और अंत में इस वीर मराठा देशभक्त को 18 अप्रैल 1859 को फांसी पर चढ़ा दिया गया.

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