Last Updated on 02/06/2023 by Sarvan Kumar
महाकाव्य रामायण में श्रीराम को नायक और रावण को खलनायक के रूप में चित्रित किया गया है. लोग मुख्य रूप से रावण को लंका के राक्षस राजा के रूप में जानते हैं जो अधर्म और बुराइयों का प्रतीक है. लेकिन ज्यादातर लोग रावण की पूरी पृष्ठभूमि और उनके व्यक्तित्व के अन्य महत्वपूर्ण आयामों से वाकिफ नहीं हैं. शास्त्रों में रावण को दैत्य, राक्षस, अहंकारी और अत्याचारी होने के अलावा और भी कई रूपों में वर्णित किया गया है. माना जाता है कि त्रेतायुग में रावण से बड़ा कोई दूसरा विद्वान नहीं था. लेकिन अंत में रावण का अहंकार ही उनकी मृत्यु का कारण बना. आइए इसी क्रम में जानते हैं कि क्या रावण ब्राह्मण थे?
क्या रावण ब्राह्मण थे?
रावण को शिव का परम भक्त, महान विद्वान, शास्त्रों का ज्ञाता, प्रकांड पंडित, उच्च कोटि का राजनीतिज्ञ और एक महापराक्रमी योद्धा के रूप में वर्णित किया गया है. रामायण में रावण को ऋषि विश्रवा की संतान बताया गया है. विश्रवा महान ऋषि पुलस्त्य के पुत्र थे. ऋषि पुलस्त्य ज्ञानी, तपस्वी और दैवी सम्पदा के स्वामी थे. पुराणों में ऋषि पुलस्त्य को भगवान ब्रह्मा का मानस पुत्र कहा गया है. सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा के पुत्र ऋषि पुलत्स्य के परिवार में ब्राह्मण कुल में जन्म लेने के कारण रावण ब्राह्मण थे. रावण बड़ा विद्वान थे. उन्होंने अपने पिता विश्रवा से वेदों और अन्य ग्रंथों की शिक्षा ली थी तथा युद्ध कला में महारत हासिल किया था. रावण एक उत्कृष्ट वीणा वादक भी थे.आइए अब जानते हैं कि ब्राह्मण कुल में जन्म लेने के बावजूद रावण राक्षसी प्रवृत्ति के कैसे हो गए. रावण के पिता ब्राह्मण कुल के थे लेकिन उनकी माता कैकसी राक्षस कुल की थीं. इस प्रकार रावण में ब्राह्मण और क्षत्रिय दोनों गुणों का समावेश था. इसलिए उन्हें ब्रह्मराक्षस कहा जाता था. पौराणिक कथा के अनुसार रावण और कुंभकर्ण अपने पिछले जन्म में जय और विजय नाम के भगवान विष्णु के द्वारपाल थे. ऋषियों द्वारा दिए गए श्राप के कारण रावण को राक्षस बनना पड़ा.
