Last Updated on 21/10/2022 by Sarvan Kumar
शब्दों की दुनिया बहुत ही रोचक और अनोखी है. शब्दों को ब्रह्मांड में सबसे शक्तिशाली चीज माना जाता है. इतिहास के रहस्य शब्दों में छिपे हैं. शब्द समय के साथ यात्रा करते हैं और कई परिवर्तनों से गुजरते हैं, लेकिन उनका महत्व बरकरार रहता है. शब्दों के वर्तमान रूप भी किसी न किसी तरह से अपनी उत्पत्ति की कहानी कह हीं देते हैं. आइए इसी क्रम में जानते हैं कि चमार का पुराना नाम क्या है.
चमार का पुराना नाम क्या है.
प्राचीन ग्रंथों और वैदिक साहित्य में चमड़े के सामान जैसे- चमड़े के बैग, वस्त्र, धनुष के तार, लगाम और चमड़े की ढाल आदि का उल्लेख मिलता है. प्राचीन ग्रंथों में चमड़े के सामान को तैयार करने के लिए खाल के निर्माण की विधि और निर्देशों का भी वर्णन किया गया है. इससे यह पता चलता है कि प्राचीन काल से ही भारतीय उपमहाद्वीप में एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक जाति समूह अस्तित्व में रहा है, जिसका पारंपरिक व्यवसाय चमड़े की वस्तुओं को बनाना रहा है. परंपरागत रूप से चमड़े के काम में शामिल इस जाति समूह को वर्तमान में चमार के नाम से जाना जाता है. चमार जाति समूह को वर्तमान में अलग-अलग नामों से जाना जाता है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि चमार अपने आप में एक अपेक्षाकृत नया शब्द है. कई जानकारों का मत है कि पहली बार चमार शब्द का उपयोग मध्यकाल में मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा किया गया था. बाद में अंग्रेजों ने 1872 में जनगणना कराई थी, उसी समय आधिकारिक रूप से चमार शब्द का उल्लेख हुआ था. चमार के पुराने नाम के बारे में जानने के लिए हमें चमार शब्द की व्युत्पत्ति को समझना होगा. व्युत्पत्ति विज्ञान के माध्यम से हम शब्दों के इतिहास, उत्पत्ति और समय के साथ इनके रूप और अर्थ में आए बदलाव के बारे में जानते हैं. व्युत्पत्तिशास्त्र के माध्यम से हम किसी देश, समाज, समुदाय या जाति सांस्कृतिक ऐतिहासिक और सामाजिक पृष्ठभूमि को समझ सकते हैं. चमार शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के शब्द “चर्मकार” से हुई है, जिसका अर्थ है- चमड़े का काम करनेवाला या चमड़े से जूते और अन्य वस्तुओं को बनाने वाला. वर्तमान में चमार जाति समूह में सैकड़ों जातियां/उपजातियां शामिल हैं. यद्यपि उन्हें विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है, उनमें एक बात समान है, वे सभी ऐतिहासिक रूप से चमड़े के काम से जुड़े रहे हैं. इस प्रकार से चमार का पुराना नाम “चर्मकार” है. समय के साथ संस्कृत भाषा का प्रचलन कम होता गया और चर्मकार शब्द में कई बदलाव आए. चमार चर्मकार शब्द का ही अपभ्रंश है.
References:
•हिंदू चर्मकार जाति
एक स्वर्णिम गौरवशाली राजवंशीय इतिहास
By विजय सोनकर शास्त्री · 2014
•Padvi Parichay
By Dr. Prabir Kumar Das · 2020
