Last Updated on 04/06/2023 by Sarvan Kumar
ब्राह्मणों के बीच आंतरिक विभाजन की बात करें तो यह समुदाय भाषा, मान्यताओं और रीति-रिवाजों के आधार पर कई वर्गों (sections) में विभाजित है. गोत्र के आधार पर भी ब्राह्मणों में बड़ी संख्या में विभाजन हैं. सुदूर अतीत में गोत्रों की संख्या कम थी लेकिन समय के साथ ब्राह्मणों के गोत्रों की संख्या में भी बहुत वृद्धि हुई. बाद में ब्राह्मण अपने नाम के साथ उपनाम भी जोड़ने लगे. आइए इसी क्रम में जानते हैं कि पाण्डेय कौन से ब्राह्मण होते हैं?
पाण्डेय कौन से ब्राह्मण होते हैं
पूरे भारत में ब्राह्मणों को अलग-अलग उपनामों से जाना जाता है जैसे दीक्षित, गोस्वामी, जोशी, पाठक, द्विवेदी, त्रिवेदी, शर्मा, त्यागी, बाजपेयी, झा, ओझा, मिश्रा, अयंगर आदि. ये सरनेम यूं ही नहीं होते हैं, इनके अंदर कई जानकारियां भी छिपी हुई हैं. उदाहरण के तौर पर पढ़ाने का काम करने वाले ब्राह्मण को पाठक कहा जाता है, अग्नि में आहुति देने वाला अग्निहोत्री, दो वेदों का ज्ञाता द्विवेदी, चारों वेदों का ज्ञाता चतुर्वेदी कहलाता है. उपनाम से हम ब्राह्मणों के मूल निवास का भी पता लगा सकते हैं. जैसे झा ब्राह्मण का अर्थ मिथिलांचल क्षेत्र का ब्राह्मण, अयंगर ब्राह्मण का अर्थ दक्षिण भारत का ब्राह्मण.
पाण्डेय (Pandey) की बात करें तो यह ब्राह्मणों में पाया जाने वाला एक प्रमुख उपनाम है. मूल रूप से यह ब्राह्मणों की एक उपाधि है जिसका अर्थ होता है अध्यापक या शिक्षक. ऐसा कहा जाता है कि चारों वेदों, पुराणों और उपनिषदों के ज्ञाता पंडित कहलाते थे, जो बाद में पाण्डेय, पांडे, पंडिया हो गए. हालांकि पाण्डेय शब्द की वर्तनी में कई भिन्नताएं हैं जैसे कि-पाण्डे (Pande), पाँडे, पांडे आदि.
पाण्डेय उपनाम का प्रयोग मुख्य रूप से मध्य और उत्तर भारत तथा नेपाल में निवास करने वाले ब्राह्मणों द्वारा किया जाता है. भारत में पाण्डेय/पांडे सरनेम वाले सबसे ज्यादा लोग उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और छत्तीसगढ़ राज्यों में पाए जाते हैं. बिहार और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में निवास करने वाले कुछ भूमिहार ब्राह्मण भी पांडे शब्द का प्रयोग अपने उपनाम के रूप में करते हैं. इसी तरह, पश्चिमी भारत में, महाराष्ट्र में कई ब्राह्मण समुदायों के उपनाम पांडे से समाप्त होते हैं जैसे देशपांडे, सरदेशपांडे आदि.
