Ranjeet Bhartiya 12/02/2023

Last Updated on 13/03/2023 by Sarvan Kumar

कुछ संस्कृतियों में, उपनाम, परिवार का नाम, या अंतिम नाम किसी के व्यक्तिगत नाम का हिस्सा होता है जो उसके परिवार, जनजाति या समुदाय को इंगित करता है. भारत में हजारों जातियां निवास करती हैं जो विभिन्न उपनामों का प्रयोग करती हैं. कुछ उपनाम ऐसे होते हैं जिनसे हम किसी व्यक्ति की जाति का पता नहीं लगा सकते जैसे कुमार, सिंह आदि. कुछ उपनाम जाति सूचक होते हैं जिससे हम व्यक्ति की जाति का पता लगा सकते हैं. आइए इसी क्रम में जानते हैं कि दत्ता किस जाति में आते हैं?

दत्ता किस जाति में आते हैं?

आगे बढ़ने से पहले आइए भारत के संदर्भ में उपनामों की उत्पत्ति और इतिहास के बारे में जानते हैं. वर्णाश्रम को हिन्दू सामाजिक व्यवस्था का आधार माना जाता है. वर्ण व्यवस्था के अन्तर्गत समाज को सुचारु रूप से चलाने के लिए श्रम विभाजन किया गया। वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था पूर्ण रूप से विकसित हो चुकी थी और समाज में सभी वर्णों के कार्यों का सम्मान किया जाता था। धीरे-धीरे समाज में ऊंच-नीच और छोटे-बड़े की भावना पनपने लगी, जिससे समय के साथ-साथ अनेक जातियों और उपजातियों की उत्पत्ति हुई. आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि वैदिक काल में उपनाम का प्रचलन नहीं था. समय के साथ जातियों के बीच भेद गहराते गए और विभिन्न जातियों के लोग अपने नाम के साथ जातिसूचक उपनामों का प्रयोग करने लगे.

आइए अब हम अपने मूल प्रश्न पर आते हैं और जानते हैं कि दत्ता किस में आते हैं. दत्ता (Dutta) , जिसे दत्त (Dutt) या दत्ता ( Datta) भी कहा जाता है, एक हिंदू उपनाम है जो भारत में रहने वाली कई जातियों द्वारा उपयोग किया जाता है. मुख्य रूप से यह उपनाम बंगाली कायस्थों, असमिया कायस्थों और भारत में पूर्वोत्तर राज्यों (मेघालय, त्रिपुरा, असम, आदि) के सुवर्ण बानिक, गंधबानिक, ब्राह्मणों में पाया जाता है. यह नाम कुछ उत्तर भारतीय और पाकिस्तानी ब्राह्मण समुदायों में भी पाया जाता है.इतिहासकार तेज राम शर्मा के अनुसार, बंगाल में दत्ता/दत्त उपनाम कायस्थ जाति द्वारा प्रयोग किया जाता है. मूल रूप से, कायस्थ ब्राह्मणों और क्षत्रियों सहित विभिन्न वर्णों के लोगों से बना था. गुप्त शासन के बाद, बंगाल में कायस्थ एक जाति के रूप में विकसित हुए, और पाल, सेन और वर्मन राजाओं और उनके वंशजों को शामिल करते हुए, एक उच्च जाति का दर्जा प्राप्त किया. बंगाल के इतिहास के मध्य काल में, 1500 और 1850 CE के बीच, कायस्थों को इस क्षेत्र की सबसे ऊंची हिंदू जातियों में से एक माना जाता था. यहाँ यह उल्लेख करना आवश्यक है कि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों के कुछ ब्राह्मण दत्त शब्द को अपने उपनाम के रूप में उपयोग करते हैं.

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