हिंदू धर्म बहुदेववाद ((Polytheism) के सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा की जाती है. हिंदू देवी-देवताओं को आमतौर पर जाति या वर्ण की सीमाओं से परे माना जाता है, और उनकी पूजा सभी वर्णों और जातियों के लोग करते हैं. लेकिन कुछ ऐसे भी उदाहरण हैं जहां भगवान ने ब्राह्मण के रूप में भी जन्म लिया है. इसी क्रम में यहां हम कुछ ऐसे हिंदू भगवान के बारे में जानेंगे जो ब्राह्मण नहीं हैं.
सर्वप्रथम यहाँ यह बताना आवश्यक है कि वर्ण व्यवस्था का संबंध मनुष्यों के सामाजिक वर्गीकरण से है. यह व्यवस्था एक प्राचीन भारतीय सामाजिक व्यवस्था है जो मनुष्य को 4 वर्गों-ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र में विभाजित करती है. हिंदू धर्म में देवी-देवताओं को वर्ण और जातियों के बंधन से परे सर्वव्यापी और सर्वशक्तिमान, और संपूर्ण मानवता के लिए समर्पित माना जाता है. हिंदू धर्म में, देवी-देवताओं की पूजा उनके दिव्य गुणों, अलौकिक महत्व और ब्रह्मांड में भूमिका के आधार पर की जाती है, न कि विशिष्ट जातियों से संबंधित होने के कारण. हिंदू धर्म में जाति-आधारित वर्गीकरण के बजाय श्रद्धा, भक्ति, धार्मिकता और आध्यात्मिक लक्ष्यों की प्राप्ति पर जोर दिया जाता है.
हिंदू धर्म में अवतारवाद की मान्यता है. इस मान्यता के अनुसार मानवता की सहायता करने, धर्म की स्थापना करने और बुराई का नाश करने के लिए ईश्वर समय-समय पर मानव रूप में प्रकट होते हैं. इससे स्पष्ट है कि यद्यपि ईश्वर जाति और वर्ण के मानवीय बंधनों से परे है, लेकिन जब वह मनुष्य के रूप में जन्म लेते हैं, तो उनका संबंध किसी विशेष जाति या वर्ण से हो सकता है. हिंदू धर्म ग्रंथों में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जहां भगवान ने ब्राह्मण के रूप में जन्म लिया था. इसमें भगवान विष्णु का वामन अवतार और परशुराम अवतार महत्वपूर्ण है.
आइए अब हम इस लेख के मुख्य विषय पर आते हैं और उन देवताओं के बारे में जानते हैं जिन्हें ब्राह्मण नहीं माना जाता है-
•ब्रह्मा, विष्णु और शिव
•देवी पार्वती, लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा और काली आदि
•गणेश, कार्तिकेय
•भगवान विष्णु के कुछ अवतार जैसे कि मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, राम और कृष्ण
•हनुमान
