Sarvan Kumar 19/04/2024
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Last Updated on 19/04/2024 by Sarvan Kumar

योलांदा फ्रेजर छोटे-से शहर मोंटाना में सड़क किनारे बने एक स्मारक पर फूट-फूट कर रो रही हैं जहां उनकी 18 वर्षीय पोती केसेरा स्टॉप्स प्रीटि प्लेसेस का सड़ी-गली हालत में शव मिला था. वह एक ‘नैटिव अमेरिकन’ शहर से लापता हो गई थी. लेकिन चार साल बाद भी इसका कोई जवाब नहीं मिला है कि मूल निवासी समुदाय की युवती की हत्या किसने की. कोई संदिग्ध नहीं पकड़ा गया. कोई गिरफ्तारी नहीं की गई.

फ्रेजर का दुख हर मूल निवासी परिवार की दास्तां है जिनके प्रियजन लापता हो गए हैं, लेकिन आज तक उनका कोई सुराग नहीं मिला है. फ्रेजर ने कहा, ‘‘मेरा भतीजा विक्टर, मेरा भतीजा डेन फिशर, मेरी करीबी रिश्तेदार क्रिस्टी रोज वुडनथाइ और भी न जाने कितने लोग. मूल निवासी और अन्य लोगों की जिंदगियों में फर्क है.
अमेरिका के मूल निवासी का क्या हुआ?
दुनियाभर में मानवाधिकारों का दम भरने वाले अमेरिका के अपने मूल निवासी (नैटिव अमेरिकन) दशकों से उत्पीड़न का शिकार होते रहे हैं. उनकी दुर्दशा का आलम यह है कि समुदाय के हजारों लोग पिछले कुछ वर्षों में लापता हो चुके हैं या उनकी हत्या कर दी गई है, लेकिन उनकी सुध लेने वाला तक कोई नहीं है.

मूल निवासी, आजकल भारत में यह शब्द बार-बार सुनने को मिल रहा है. दलित और OBC समाज के लोग अपने को मूल निवासी बताकर भारत पर अपना अधिकार चाहते हैं. आर्य आक्रमण सिद्धांत के आधार पर वे ब्राह्मण भारत छोड़ो का नारा बुलंद करते हैं.
केसेरा स्टॉप्स के साथ घटित घटना से भारत के मूल निवासियों को सबक सीखने की जरूरत है.
सत्ता उसके हाथ में होती है जिसके पास पैसा, शक्ति और , तेज बुद्धि के साथ मजबूत कलेजा होता है.
आर्य आक्रमण सिद्धांत को सच मान भी लिया जाए तो इतना तो मानना ही पड़ेगा मूल निवासी कमजोर थे, तभी तो हार गए.जब यूरोपियन अमेरिका पहुंचे, तो उन्होंने 56 मिलियन से अधिक मूल अमेरिकियों को मार डाला जो उनकी जनसंख्या का 90% है.
कोलंबस ने 12 अक्टूबर, 1492 को अमेरिका की खोज की थी.
अमेरिका की खोज के बाद संभवतः दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ी demographic disaster पैदा हुई. कुछ विद्वानों के शोध से पता चलता है कि पूर्व-संपर्क अमेरिका की जनसंख्या 1492 में 112 मिलियन थी.
यूरोपीय निवासियों ने दक्षिण, मध्य और उत्तरी अमेरिका में 100 से अधिक वर्षों तक लगभग 56 मिलियन मूल निवासियों को मार डाला. बचे-खुचे अमेरिकन मूल निवासियों के जमीन छीन लिए गए, घर से बेघर कर दिए गए, आज इनकी जनसंख्या बस 2 % है.

अब यह बात समझा जा सकता है कि मूल निवासी का कोई concept नहीं होता . जमीन उनकी होती हैं ज्यादा ताक़तवर होते हैं , जिन्होंने अपने आप को इस तरह तरह से विकसित किया हैं कि जरूरत पड़ने पर अपनी जान की बाजी लगा सके. अपने आने वाले भविष्य के लिए कुछ जोड़ सके. अपने समाज में एकता बनाए रखे. दिमाग से और शरीर दोनों से तंदुरुस्त होना जरूरी है. सिर्फ सरकार के भरोसे ना रहे अपने आप को इतना मजबूत करें कि आपसे कुछ भी आपका ना छीन सकें

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