Ranjeet Bhartiya 15/10/2022

Last Updated on 16/10/2022 by Sarvan Kumar

बुंदेलखंड भारत का एक अर्ध-शुष्क क्षेत्र है जिसमें उत्तर प्रदेश के सात जिले (झांसी, बांदा, ललितपुर, हमीरपुर, जालौन, महोबा और चित्रकूट शामिल) और मध्य प्रदेश के छह जिले (दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, दमोह और सागर) शामिल हैं। किसी ज़माने में बुंदेलों और चंदेल राजवंशों के शासन से पूर्व समस्त मालवा और बुंदेलखंड पर द्वारिकाधीश के वंशज यदुवंशी अहीर क्षत्रियों का एकछत्र राज था। चंदेलों और बुंदेल राजवंशो के शासन में मंत्री मण्डल के सभी बड़े पद जैसे प्रधान सेनापति, महामंत्री, आदि सभी बड़े पद सिर्फ चंद्रवंशी अहीर क्षत्रियो के लिए हुआ करते थे. चंदेल और सूर्यवंशी बुंदेला ये भली भांति जानते थे कि बेशक अब यदुवंशियो ने राजपाठ करना छोड़ दिया हो लेकिन उनका क्षत्रीय रक्त, युद्ध कौशल, रुतबा, स्वाभिमान अखंड है. इसीलिए चंदेल राजपूत और सूर्यवंशी बुंदेला, यदुवंशी अहीरों का बहुत आदर और सम्मान करते थे.बुंदेलखंड तथा सटे चंबल संभाग में द्वारकाधीश श्री कृष्ण के जेष्ठ भ्राता श्री बलराम जी के वंशजों का भिन्न-भिन्न गोत्रों के कई ठिकाने आबाद है. बोधन दौआ इसी समुदाय से आते हैं, दौआ मुख्य रूप से अहीर या यादवों का अंग रहा है आइए जानते हैं बुंदेलखंड में यादव वंशी राजाओं का प्राचीन इतिहास.

महिष्मति राज्य

बाहुबली की कहानी महिष्मति राज्य के केंद्र में रची गयी है. लोकप्रिय धारणा के विपरीत यह जगह काल्पनिक नहीं है. ऐतिहासिक अभिलेखों के मुताबिक, महिष्मति एक मध्यवर्ती भारत में स्थित एक शहर था , जो अब मध्य प्रदेश नामक राज्य बन गया है. कई अभिलेखों और साथ ही कहानियों में भी इस शहर का उल्लेख मिलता है, जो यह बताते हैं कि यह एक शहर और एक समय में सामाजिक-राजनीतिक केंद्र था.

बुंदेलखंड मे यादवों का प्राचीन इतिहास

प्राचीन समय में बुंदेलखंड के दक्षिण और पूर्व का प्रदेश यादव वंशी राजाओं के अधिकार में था . इसकी राजधानी महिष्मति थी .यादव वंशी के पराक्रमी राजा सहस्त्रार्जुन यहीं राज करते थे. यह वही सहस्त्रार्जुन है, जिसने एक बार लंकाधिपति रावण को बांध रखा था.कभी महिष्मती नगर (आज का महेश्वर) में राजा सहस्त्रार्जुन का शासन था। वे क्षत्रियों के हैहय वंश के राजा कार्तवीर्य और रानी कौशिक के पुत्र थे। उनका वास्तविक नाम अर्जुन था। सहस्त्रार्जुन की संतान आगे चलकर हैहय वंश के नाम से प्रसिद्ध हुई. महाभारत के समय में ही हैहयों का राज्य बहुत विस्तीर्ण हो गया था. उस समय महिष्मति में राजा नील राज्य करते थे. यह नील कौरवों के ओर से युद्ध में लड़कर मारे गए थे. महाभारत काल के प्रसिद्ध राजा शिशुपाल भी हैहय वंशी थे. वह चेदि देश के राजा थे. मध्य प्रदेश के इन्हीं हैहयों की दो शाखाएं हो गई. दूसरी शाखा ने नर्मदा के ही किनारे त्रिपुरा को अपनी राजधानी बनाया. यह शाखा चेदि के कलचुरियों के नाम से प्रसिद्ध है.

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