Ranjeet Bhartiya 22/02/2022
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Last Updated on 22/02/2022 by Sarvan Kumar

काछी (Kachhi) भारत में पाया जाने वाला एक जाति समुदाय है. पारंपरिक रूप से यह एक कुशल कृषक रहे हैं. आर. वी. रसेल (R. V. Russell) ने इन्हें एक महत्वपूर्ण कृषक जाति के रूप में वर्णित किया है जो सब्जियां (Vegetable-grower) और अन्य सिंचित फसलें उगाती हैं जिन्हें गहन खेती (intensive cultivation) की आवश्यकता होती है. आइए जानते हैं काछी जाति का इतिहास, काछी शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?

काछी जाति एक परिचय

साल 1991 में इन्हें भारत सरकार के सकारात्मक भेदभाव की व्यवस्था “आरक्षण” के अंतर्गत एक अन्य पिछड़ा वर्ग (Other Backward Class, OBC) के रूप में नामित किया गया था. वर्तमान में इन्हें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान में ओबीसी के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.यह मुख्य रूप से दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पाए जाते हैं. अधिकांश काछी हिंदू धर्म में आस्था रखते हैं. गंगा प्रसाद गुप्ता ने 1920 के दशक में यह दावा किया था कि हिंदू चंद्र कैलेंडर के कार्तिक महीने के दौरान कुशवाहा परिवारों में हनुमान जी की पूजा की जाती थी. पिंच ने काछी कुशवाहा समाज को “भगवान राम और माता सीता के प्रति सच्ची श्रद्धा रखने वाले समुदाय के रूप में वर्णित किया है. यहां यह उल्लेख करना जरूरी है कि पहले कुशवाहा शिव और शाक्त के साथ संबंध के पक्षधर थे.

काछी जाति का उप-विभाजन

काछी समुदाय कई उपजातियों में विभाजित है. इनमें से अधिकांश के नाम उन विशेष पौधों पर आधारित हैं जो यह उगाते हैं. जैसे-हरदिया, जो हल्दी उगाते हैं; फूलिया, जो फूल उगाते हैं और बागवानी का काम करते हैं; जिरिया, जो जीरा उगाते हैं; मुरी या मुराव काछी, जो मूली उगाते हैं; सानिया, जो सान या भांग उगाते हैं; मोर काछी, जो शादियों के लिए मौर या विवाह-मुकुट तैयार करते हैं; लूलिया, जो नील की खेती करते हैं. यहां यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि कुछ इलाकों में उनके कच्छवाही नामक एक उपजाति हैं, जिन्हें राजपूतों के साथ संबंध माना जाता है और दूसरों की तुलना में उच्च रैंक प्राप्त है.

काछी शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?

आर. वी. रसेल ने अपनी किताब “The Tribes and Castes of the Central Provinces of India” में काछी शब्द की उत्पत्ति के बारे में निम्नलिखित दो बातों का उल्लेख किया है.पहली मान्यता के अनुसार, काछी शब्द की उत्पत्ति संभवत: कछार (kachhār) शब्द से हुई है. कछार का अर्थ होता है नदी के किनारे स्थित जलोढ़ भूमि जिसका उपयोग यह अपनी सब्जियां उगाने के लिए करते थे.एक अन्य व्युत्पत्ति के अनुसार, काछी शब्द की उत्पत्ति कच्छनी (kāchhni) से हुई है, जो अफीम के कैप्सूल से अफीम एकत्र करने की प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है.

काछी जाति का इतिहास

काछी जाति की उत्पत्ति के बारे में अनेक मान्यताएं हैं, जिसके बारे में नीचे विस्तार से बताया जा रहा है. यह एक विस्तृत समुदाय का हिस्सा हैं जो एक सामान्य वंश से संबंधित होने का दावा करते हैं. इस समुदाय को कुशवाहा (Kushwaha) के नाम से जाना जाता है. कुशवाहा एक वृहत समुदाय है जो मौर्य, काछी, कच्छवाहा और कोइरी आदि विभिन्न शाखाओं से बना है. वर्तमान समय में यह आमतौर पर रामायण और अन्य पौराणिक कथाओं में वर्णित भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्री राम के पुत्र कुश के वंशज होने का दावा करते हैं. भगवान राम के पूर्वजों और वंशजों को सूर्यवंश (Suryavanshi/Solar – Dynasty) क्षत्रिय माना जाता है. इस तरह से काछी सूर्यवंशी क्षत्रिय होने का दावा करते हैं.

आर. वी. रसेल के अनुसार काछी जाति

आर. वी. रसेल के अनुसार, यह जाति संभवत: कुर्मियों की एक शाखा है. काछियों के सामाजिक रीति-रिवाज कुर्मियों से मिलते जुलते हैं. नामों की समानता के कारण यह राजपूतों के कच्छवाहा वंश के साथ संबंध होने का दावा करते हैं, लेकिन यह बिल्कुल भी संभव नहीं है.

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References;

Peasants and Monks in British India
William R. Pinch

Educational and Social Uplift of Backward Classes: At what Cost and How?- Part 1
By S. P. Agrawal, Suren Agrawal, J. C. Aggarwal

Crooke’s Tribes and Castes, article Kāchhi.

The Tribes and Castes of the Central Provinces of India (Volume 3 of 4)
-Author: R. V. Russell

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