Last Updated on 23/08/2022 by Sarvan Kumar
देश के विकास में वैश्य (बनिया) समाज का महत्वपूर्ण योगदान है. इसीलिए बनिया समाज को देश की आर्थिक रीढ़ (economic backbone of the country) भी कहा जाता है. केसरवानी वृहद बनिया/वैश्य समुदाय की एक प्रमुख उपजाति या शाखा है जिसकी उत्पत्ति कश्मीर घाटी से मानी जाती है. आइए जानते हैं भारत में केसरवानी समाज की आबादी कितनी है?
भारत में केसरवानी समाज की आबादी
केसरवानी बनियों को अक्सर केशरी बनिया कहा जाता है. केसरवानी नाम केसर (saffron) के व्यापार के इनके मूल व्यवसाय को दर्शाता है. केसर जैसे बेशकीमती मसाले के व्यापार में शामिल रहने के कारण इस समुदाय के लोग पहले काफी समृद्ध माने जाते थे. कश्मीर से पलायन करने के बाद यह भारत के विभिन्न हिस्सों में जाकर बस गए. वर्तमान में इस समुदाय के अधिकांश लोग उत्तर प्रदेश और बिहार में रहते हैं. पलायन के कारण कभी समृद्ध रहा यह समुदाय शैक्षणिक, सामाजिक, राजनैतिक रूप से पिछड़ेपन का शिकार हो गया. इनमें से कई गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर हैं. आर्थिक पिछड़ेपन की बात करें तो इनमें से कई अब छोटे-मोटे व्यवसाय करके जीवन यापन कर रहे हैं. शैक्षणिक रूप से पिछड़ने के कारण विधायिका, न्यायपलिका और कार्यपालिका में इस समुदाय का प्रतिनिधित्व लगभग नगण्य है. लगभग आधा प्रतिशत से भी कम लोग केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं. राजनीति में इस समुदाय की भागीदारी की बात करें तो देश की आजादी के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार राज्य में केवल तीन या चार विधायक केसरवानी समाज से चुने जा सके हैं. यानी की राजनीति में भी इस समुदाय की भागीदारी नगण्य है. केसरवानी समाज के लोग मानते हैं कि इस समुदाय के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए तथा समाज के उत्थान के लिए सरकारी मदद की जरूरत है. अगर आरक्षण का लाभ दे दिया जाए तो समाज के होनहार, मेधावी छात्र सरकारी नौकरियों में जा सकते हैं. इसलिए लंबे समय से केसरवानी समाज के लोगों द्वारा पिछड़े वर्ग के जाति में शामिल करने की मांग की जा रही है. इस समुदाय की स्थिति का आकलन करते हुए कालेकर आयोग, मंडल आयोग और न्यायमूर्ति आरएन प्रसाद द्वारा केसरवानी समाज को पिछड़े वर्ग की जाति में शामिल करने की सिफारिश की गई है. अब मूल प्रश्न पर आते हैं. भारत में केसरवानी समुदाय के लोगों की संख्या के बारे में अलग-अलग दावे किए जाते हैं. अखिल भारतीय केसरवानी वैश्य महासभा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष सतीश चंद्र केसरवानी के दावे के अनुसार भारत में केसरवानी समाज की आबादी करीब एक करोड़ है. यहां यह स्पष्ट कर देना जरूरी है कि भारत में अंतिम बार जातीय जनगणना के आंकड़े 1931 में जारी किए गए थे. इसीलिए किसी भी जाति या समुदाय के संख्या के बारे में सटीक जानकारी केवल जातीय जनगणना से ही संभव है.
References;
•People of India: Bihar (2 pts.)
By K. S. Singh · 2008
•https://www.jagran.com/uttar-pradesh/allahabad-city-memorandum-given-to-cm-yogi-adityanath-to-include-kesarwani-society-in-backward-class-21979145.html
•https://www.jagran.com/jharkhand/garhwa-gadhawa-news-20659671.html
•https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/allahabad/Allahabad-32265-8
