Ranjeet Bhartiya 22/03/2023
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Last Updated on 22/03/2023 by Sarvan Kumar

नाई भारत में निवास करने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू समुदाय है जिसका पारंपरिक व्यवसाय क्षौर कर्म (हजामत) करना रहा है. लेकिन हिंदू समाज में इनकी भूमिका केवल बाल काटने तक हीं सीमित नहीं है. सभी हिंदू संस्कारों चाहे वह मुंडन संस्कार हो या शादी विवाह या मृत्यु के पश्चात श्राद्ध कर्म तथा धार्मिक अनुष्ठानों में नाई की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. यह समुदाय निकटता से ब्राह्मणों से जुड़ा हुआ है और प्राचीन काल से ही इस समुदाय के लोग ब्राह्मणों के सहायक के रूप में काम करते आये हैं. यहां हम नाई ब्राह्मण के बारे में जानेंगे.

नाई ब्राह्मण

लेख की विषय-वस्तु को ध्यान में रखते हुए नाई और ब्राह्मण के बीच समानताओं पर प्रकाश डालना आवश्यक है. नाई एक ऐसी जाति है जिसकी हिंदुओं के संपूर्ण पवित्र कार्यों और धार्मिक अनुष्ठानों में सर्वत्र ही प्रवेश है.‌ ऐसा कोई शुभ कर्म (यज्ञादि) नहीं है जिसमें ब्राह्मण हो और नाइयों की उपस्थिति ना हो. प्रत्येक शुभ कार्य, कर्मकांड और संस्कारों के दौरान ‌नाइयों को भी ब्राह्मणों की तरह दक्षिणा दिया जाता है. प्राचीन काल में ब्राह्मणों का कार्य राज्याभिषेक करना तथा राजा को मुकुट पहनाना था और इसे ब्राह्मण कार्य माना जाता था. ब्राह्मण जिस तरह से राज्याभिषेक करता है, उसी तरह से नाई इस कार्य को विवाह के दौरान वर (दूल्हे) को मुकुट (ताज) पहनाकर कार्य करता है, जो सामयिक राजा होता है. क्षौर कर्म को वैदिक माना जाता है. ऋग्वेद में उल्लेख किया गया है कि आर्य जातियों के पूर्व पुरुष नाई का काम स्वयं किया करते थे. अनेक विद्वानों का मत है कि नाई ब्राह्मण-वाची शब्द है. प्राचीन काल में जो बड़े विद्वान और तर्कशास्त्री थे, उन्हें न्यायी कहा जाता था. नाई न्यायी शब्द का विकृत रूप है. कालांतर में ब्राह्मण दो समुदायों में विभाजित हो गए, एक शिक्षित समुदाय और दूसरा अशिक्षित समुदाय जो उस्तरा और कटोरी की पूजा करने लगे और स्वजाति-वर्ग की हजामत भी करने लगे, जिसके कारण वे नाई पांडे कहलाने लगे. कालांतर में ये अन्य जातियों के भी बाल काटने लगे और नाई कहलाए. कई क्षेत्रों में नाइयों को ब्राह्मणानुकूल कार्य करने की अनुमति है. दक्षिण भारत के कई राज्यों जैसे तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में नाई-ब्राह्मण (Nai-Brahmin) नामक एक समुदाय पाया जाता है जिसमें मंगली, मंगला और भजंत्री जातियां शामिल हैं. आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सरकार ने इन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग के रूप में सूचीबद्ध किया है. परंपरागत रूप से ही समुदाय के लोग नाई, चिकित्सक और संगीतकार के रूप में काम करते आए हैं. हालांकि बदलने समय के अनुसार शिक्षित होकर इस समुदाय के लोग दूसरे व्यवसायों में भी शामिल होने लगे हैं, जहां वह बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं.‌ बता दें कि नाई को तेलुगु में मंगली कहते हैं. हालाँकि, इस शब्द को अपमानजनक मानते हुए, आंध्र प्रदेश सरकार ने मंगली शब्द के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है.

नाई ब्राह्मण निष्कर्ष:

नाई कई राजाओं के गुरु भी रहे हैं. इनके भेद और गोत्र भी प्रायः ब्राह्मणों के समान हैं. इस समुदाय के लोग ब्राह्मणों के समान शर्मा उपनाम का भी प्रयोग करते हैं, साथ ही यह परंपरागत रूप से ब्राह्मणों के सहकर्मी रहे हैं. उपरोक्त तथ्यों से प्रतीत होता है कि नाई ब्राह्मण हैं और नाइ ब्राह्मण माने जाने और कहलाने के हकदार हैं.

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