Last Updated on 22/07/2022 by Sarvan Kumar
यह हर कोई जानता है कि अहीर (यादव) भारत में एक महत्वपूर्ण आबादी वाला प्रमुख समुदाय है. लेकिन क्या आप जानते हैं पाकिस्तान में भी अहीर समुदाय के लोग पाए जाते हैं. पाकिस्तानी अहीर मुख्य रूप से पाकिस्तान में पाया जाने वाला एक मुस्लिम समुदाय है. मुस्लिम अहीर भारत के हिंदू अहीरों की तरह हीं आमतौर पर शारीरिक रूप से मजबूत और बलिष्ठ, लंबे-चौड़े, गोरे रंग के और तीखे नैन-नक्श के होते हैं. इनका व्यक्तित्व और स्वभाव भी भारत के हिंदू अहीरों जैसा होता है. यह स्वभाव से मेहनती, निडर और दबंग होते हैं.आइए जानते हैं पाकिस्तानी अहीरों के बारे में.
पाकिस्तानी अहीर
भारत के हिंदू अहीरों की तरह पाकिस्तानी अहीरों की गिनती जमींदार और शासक योद्धा वर्ग में किया जाता है. पाकिस्तान के ख़ुशाब, रावलपिंडी, झंग, चिनयोट, कराची, लाहौर आदि जिलों में इनके कई ठिकाने आबाद हैं. जिस प्रकार से भारत में निवास करने वाले यदुवंशी अहीर क्षत्रिय “ठाकुर”, “चौधरी”, “राय”, “राव” जैसे शाही उपाधियों का प्रयोग करते हैं. उसी प्रकार से पाकिस्तानी मुस्लिम अहीर भी “मलिक”, “राव” , “चौधरी”, “मेहेर”, ‘राय’ आदि शाही titles का इस्तेमाल करते हैं. इतना ही नहीं, राजनीति में सक्रिय भागीदारी के कारण ख़ुशाब अहीर (Khushab Aheer) हमेशा पाकिस्तानी मीडिया में सुर्खियों में बने रहते हैं.
अहीर- एक व्यापक शब्द
अहीर एक व्यापक शब्द है. अहीर को एक जाति, एक कबीले, एक समुदाय, एक नस्ल और एक जनजाति (tribe) के रूप में वर्णित किया गया है. भारत में निवास करने वाले कई अहीर यह मानते हैं कि धर्म बदलने से दशा नहीं बदलती है. अहीरों और जाटों में कई समानता है. जिस प्रकार से जाट समुदाय के लोग हिंदू , मुसलमान या सिख हो सकते हैं. उसी प्रकार से अहीर भी हिंदू, मुसलमान (मुख्य रूप से पाकिस्तान में रहने वाले) और सिख धर्म के हो सकते हैं. पंजाब में अहीर यादव सिखों की अनुमानित आबादी 35,000 है, जो पटियाला और संगरूर जिलों के लगभग 26 गांवों में केंद्रित हैं. यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि भारत में रहने वाले अहीर मुख्य रूप से हिंदू हैं, जबकि सिख और मुस्लिम अहीरों की आबादी नगण्य है.
पाकिस्तानी अहीर मुस्लिम कैसे बने?
इस बात पर एक आम सहमति है कि पाकिस्तानी अहीर भी भारत के अहीरों के समान हिंदू थे. फिर आखिर यह मुस्लिम कैसे बन गए? कभी पाकिस्तान और अफगानिस्तान अखंड भारत का हिस्सा हुआ करता था. यहां कई हिंदू क्षत्रियों के ठिकाने आबाद थे, जिसमें यदुवंशी अहीर क्षत्रिय भी शामिल थे. इन्हें विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ा. लगातार तुर्की मुस्लिम आक्रमणकारियों के हमले से इन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ा. धर्म की रक्षा के लिए हिंदू अहीर पलायन करके सिंध और पश्चिम भारत की तरफ आए. लेकिन जो अहीर वहीं रुक गए, वह स्वेच्छा से या मजबूरीवश धर्म परिवर्तन करके मुसलमान बन गए. लेकिन आज भी पाकिस्तानी अहीरों के रीति-रिवाजों पर हिंदू धर्म का प्रभाव दिखता है.
पाकिस्तानी अहीर कहां पाए जाते हैं?
मुस्लिम अहीर मुख्य रूप से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के थाल रेगिस्तानी क्षेत्र में, विशेष रुप से, पश्चिमी जिलों में, पाए जाते हैं. थाल रेगिस्तान भाकर, ख़ुशाब, मियांवाली, लैय्या, मुजफ्फरगढ़, झांग जिलों को कवर करता है. ख़ुशाब जिले में इनकी बहुतायत आबादी है और यह जिला मुख्यालय के आसपास के क्षेत्रों में केंद्रित हैं. थाल रेगिस्तान के बाहर रावलपिंडी, लोधरन, खानेवाल, साहीवाल और फैसलाबाद जिलों में भी इनकी आबादी है.
पाकिस्तानी अहीर का इतिहास
अहीरों का इतिहास अत्यंत ही प्राचीन है. महाभारत काल में यदुवंशी समुदाय के लोग पंजाब के आसपास और गांधार (वर्तमान में पाकिस्तान और अफगानिस्तान का हिस्सा है) में जाकर बस गए थे. अहीर को पहले अभीर कहा जाता था. पश्तून, पख़्तून या पठान मुख्य रूप से अफगानिस्तान में हिंदूकुश पर्वत और पाकिस्तान में सिंधु नदी के दरमियानी क्षेत्र में निवास करते हैं. एक शोध के अनुसार, यह भारत की प्राचीन आभीर कबीले से संबंध रखते हैं.
मुस्लिम अहीर की उत्पत्ति कैसे हुई?
मुस्लिम अहीरों की उत्पत्ति के बारे में निम्न बातों का उल्लेख मिलता है-
पहली मान्यता: एक सबसे स्वीकृत मान्यता के अनुसार, अहीर मूल रूप से पूरे उत्तर भारत में पाए जाना वाले एक बड़ा जातीय समुदाय है. इस समुदाय के लोग खुद को यादव कहना पसंद करते हैं. पाकिस्तान में निवास करने वाले मुस्लिम अहीर उत्तर भारत के अहीरों के समान हीं हैं.”तहरीक अक्वाम ए पंजाब” के लेखक के अनुसार, अहीर अवान और खोखर जनजातियों के पूर्वज कुतुब शाह (Qutab Shah) के वंशज होने का दावा करते हैं, और उत्तर भारत के अहीर के साथ किसी भी संबंध से इनकार करते हैं.
दूसरी मान्यता: औपनिवेशिक नृवंशविज्ञानी डेन्ज़िल इबेट्सन (Denzil Ibbetson) ने पंजाब की 1881 की जनगणना में उल्लेख किया है कि अहीर और हीर (Heer) एक ही जनजाति के थे. एक अपवाद है, ख़ुशाब का प्रसिद्ध मलिक परिवार खुद को रेवाड़ी के राव से जोड़ता है. जो लोग लहंडा बोलियाँ बोलते थे, जैसे कि सरायकी या थलोची, वे खुद को अहीर कहते थे, जबकि मध्य पंजाब में पाए जाने वाले लोग खुद को हीर कहते थे. बता दें कि हीर, पूरे मध्य पंजाब में पाया जाने वाला एक बड़ा जाट कबीला है जो गुजरात से पटियाला तक फैला हुआ है.
तीसरी मान्यता: पाकिस्तान के सरगोधा जिले में ख़ुशाब और साहीवाल के जमींदार अहीर हरियाणा के एक अहीर रियासत रेवाड़ी रियासत के रावों के वंशज होने का दावा करते हैं. ख़ुशाब परंपराओं के अनुसार, ख़ुशाब अहीर रेवाड़ी रियासत के गवर्नर नंदराम एक भतीजे के वंशज हैं.
पाकिस्तानी अहीर के प्रसिद्ध व्यक्ति
मलिक नसीम अहीर (Malik Nasim Aheer):
पाकिस्तानी राजनेता और पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री
(Minister of Interior).
जावरिया जफर अहीर (Javaria Zafar Aheer):
पाकिस्तानी राजनेता और पाकिस्तान की नेशनल असेंबली की सदस्य
