Ranjeet Bhartiya 17/04/2022
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Last Updated on 17/04/2022 by Sarvan Kumar

सिकलीगर (Sikligar) भारत में पाया जाने वाला एक जाति समुदाय है. इन्हें बर्धिया (Bardhia), सैक्कलगर (Saiqalgar), मोयाल (Moyal) और पांचाल (Panchal) के नाम से भी जाना जाता है. इस समुदाय के लोग हथियार बनाने की कला के लिए जाने जाते हैं. यह हथियार बनाने में इतने माहिर होते हैं कि खराब पाइप और कबाड़ी में मिले सामान से भी हथियार और कारतूस बना देते हैं  आज भले हीं सिकलीगर समाज गरीबी और पिछड़ेपन का शिकार हो गया है, और इन्हें चाकू छुरी तेज करने वाली एक जाति के रूप में जाना जाता है. लेकिन इनका इतिहास अत्यंत हीं गौरवशाली रहा है. यह लोग उस जमाने में तीर, तलवार, ढाल बनाने में माहिर हुआ करते थे. समय बीतने के साथ यह लोग बंदूकें और पिस्तौलें भी बनाने लगे. हथियार बनाना इनका खानदानी व्यवसाय है, लेकिन अंग्रेजी शासन काल से चले आ रहे वर्तमान आर्म्स एक्ट के मुताबिक इनका हुनर अब आपराधिक माना जाने लगा है. पुराने जमाने में इस समाज के लोग राजा महाराजाओं के लिए हथियार बनाते थे. इस समुदाय के लोग दशम गुरु गोविंद सिंह जी की सेना के लिए हथियारों का निर्माण करते थे. इनके ढाले गए हथियारों के कारण ही सिख सेना अजेय मानी जाती थी.

सिकलीगर जाति एक परिचय

वर्तमान परिस्थिति (कैटेगरी): भारत सरकार के सकारात्मक भेदभाव की व्यवस्था आरक्षण के अंतर्गत इन्हें गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान में अन्य पिछड़ा वर्ग के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.

सिकलीगर कहां पाए जाते हैं?

यह मुख्य रूप से गुजरात, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब में पाए जाते हैं. तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी इनकी आबादी है

गुजरात में सिकलीगर जाति

गुजरात में निवास करने वाले हिंदू सिकलीगर चाकू, छुरी, कैंची , घरेलू और कृषि उपकरणों को तेज करने के अपने पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े हुए हैं. वर्तमान में इस समुदाय की स्थिति अच्छी नहीं है. यह आर्थिक रूप से बेहद हाशिए पर हैं, और इस समुदाय में बाल श्रम के मामले भी देखे गए हैं

हरियाणा में सिकलीगर जाति

यहां धातु के दरांती, छलनी और लोहे की टोकरियाँ जैसे उपकरणों के निर्माण करना इनका मुख्य पेशा है. इनमें से कुछ अब कुक्कुट पालन (Poultry farming), पशुपालन और खेती भी करने लगे हैं  हरियाणा में निवास करने वाले सिकलीगर धर्म के आधार पर दो समूहों में विभाजित हैं- हिंदू सिकलीगर और सिख सिकलीगर. धर्मों में अंतर का अर्थ यह है कि यह दोनों समूह अलग-अलग समुदाय हैं, जिनमें आपस में विवाह का संबंध नहीं है. यहां इस समुदाय के लोग हरियाणवी और हिंदी बोलते हैं. हरियाणा में यह मुख्य रूप से हिसार, जींद, रोहतक, सिरसा और मोहेंदरगढ़ जिलों में पाए जाते हैं. यह आमतौर पर कस्बों और गांवों के बाहरी इलाके में बस्तियों में अक्सर फूस की झोपड़ियों में रहते हैं. यहां यह समुदाय 84 कुलों में विभाजित है, जिन्हें गोत्र के नाम से जाना जाता है. इन में पाए जाने वाले प्रमुख गोत्र हैं- चौहान, निर्बन, टौंक, कलिलोट, मोहिल, जून, दुगोली के, मोयाल, पड्यार, खानखरा, भाटी, धरे, खिची, घेलोत, बडके, डांगी, जसपाल, पटवा, सोलंकी, मतलाना, डागर और बनवारी.

पंजाब में सिकलीगर जाति

पंजाब में निवास करने वाले सिकलीगर अभी भी चाकू, खंजर और बाल्टी बनाने के व्यवसाय में शामिल हैं, और इन उपकरणों को स्थानीय बाजारों में बेच कर अपना जीवन यापन करते हैं. यह पूरे प्रदेश में पाए जाते हैं, विशेष रूप से भटिंडा और लुधियाना में इनकी महत्वपूर्ण आबादी है. सिख सिकलीगर सख्ती से अंतर्विवाही हैं, और कबीले बहिर्विवाह का का पालन करते हैं; इनके रीति-रिवाज पंजाब के अन्य सिख समुदायों के समान हैं. यह पंजाबी बोलते हैं. पंजाब में निवास करने वाले सिकलीगर को अब कई कुलों में विभाजित हो गए हैं, जिनमें प्रमुख हैं- मोयाल, टैंक, जुन्नी, डांगी, भोंड, भोरी, खिची, थिलिपिठिया, दुदानी, घोर-चारे टैंक, कल्याणी और चुरी ते बायोरी (b).

सिकलीगर किस धर्म को मानते हैं?

धर्म से यह हिंदू, मुसलमान या सिख हो सकते हैं. हिंदू सिकलीगर गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में पाए जाते हैं. मुस्लिम सिकलीगर मुख्य रूप से महाराष्ट्र में पाए जाते हैं. सिख सिकलीगर मुख्य रूप से हरियाणा और पंजाब में निवास करते हैं. रसेल के अनुसार यह आंशिक रूप से हिंदू और आंशिक रूप से मुसलमान हैं. मध्य प्रांत (Central provinces), वर्तमान महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़, में निवास करने वाले इस समुदाय के अधिकांश सदस्य हिंदू हैं. बॉम्बे में मुहम्मडन सिकलीगारों को घिसारी या टिंकर कहा जाता है जिन्हें औरंगजेब द्वारा जबरन धर्मांतरित किया गया था. बेलगाम गजेटियर के लेखक का कहना है कि ये केवल नाम में मुसलमान हैं, क्योंकि ये व्यावहारिक रूप से कभी मस्जिद नहीं जाते हैं, हिंदू देवताओं को अपने घरों में रखते हैं, गोमांस से परहेज करते हैं, और खतना के अलावा कोई विशेष मुहम्मदन संस्कार नहीं करते हैं.

सिकलीगर जाति का विभाजन

सिकलीगर समुदाय सख्ती से अंतर्विवाही है और समान स्थिति वाले 12 कुलों में विभाजित है. इन में पाए जाने वाले प्रमुख फूलों के नाम इस प्रकार हैं- कांठीवाला भांड, मोल भांड, गांधीवाला भांड, जुमरवाला, जिलपटिया, पाथलेर्डे, जूनी, मत और बर्दिका.

सिकलीगर शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?

सिकलीगर शब्द की उत्पत्ति अरबी भाषा के शब्द “सैकाल” (saiqal) से हुई है, जिसका अर्थ होता है- पालिश करने वाला. बर्धिया शब्द “बर्ध” से बना है, जिसका अर्थ होता है- “हथियार का किनारा”.

सिकलीगर जाति का इतिहास

इस समुदाय के लोगों का पुश्तैनी व्यवसाय हथियार बनाना और उसका रखरखाव करना था. यह एक खानाबदोश समुदाय हैं, जो अक्सर कस्बों और शहरों के किनारे पर छावनियां में अस्थाई रूप से रहते हैं. इनमें से कई अब व्यवस्थित जीवन भी जीते हैं. रॉबर्ट वेन रसेल (R.V. Russell) ने इन्हें हथियार और चाकू पर सान चढ़ाने वाली जाति के रूप में वर्णित किया है. रसेल के अनुसार यह मुख्य रूप से बड़े शहरों में रहते हैं.  विलियम क्रुक ने भी इन्हें चाकू, छुरा, कैंची और कभी-कभी तलवारें तेज करने वाली जाति के रूप में वर्णित किया है. ब्रिटिश राज के कई प्रशासकों, जैसे होरेस आर्थर रोज़
(H. A. Rose), डेन्ज़िल इबेट्सन (Denzil Ibbetson) और विलियम क्रुक (William Crooke) ने ऐसी किताबें लिखीं जिनमें लोहा या इस्पात का उपयोग करके विभिन्न वस्तुएँ बनाने वाले समुदायों को लोहार कहा गया है. लेकिन वास्तव में यह शब्द लोगों के एक विशिष्ट समूह को संदर्भित करता है और अंतः परिवर्तनीय (interchangeable) नहीं है.

कभी लोहार थे सिकलीगर

सिकलीगर कभी लोहार थे. बाद में यह लोहार समुदाय से अलग हो गए और और विशेषज्ञ ब्लेडस्मिथ बन गए . बता दें कि ब्लेडस्मिथिंग (Bladesmithing) औजारों का उपयोग करके चाकू, तलवार, खंजर और अन्य ब्लेड बनाने की कला है.

राजपूत सिकलीगर?

हिंदू सिकलीगर राजपूत होने का दावा करते हैं और इनके कुलों के नाम राजपूत की तरह हैं.  समुदाय के लोगों का कहना है कि इनके पूर्वज राजपूत थे जो इस्लामी आक्रमणकारियों से बचने के लिए भाग गए और बाद में खुद को दुश्मनों से छिपाने के लिए हथियारों को बनाने, पॉलिश करने और रखरखाव का काम करने लगे. अन्य परंपराएं भी बताती हैं कि यह समुदाय राजपूत मूल का है. उन कहानियों के अनुसार, इस समुदाय के लोग पृथ्वी राज चौहान की सेना में राजपूत सैनिक थे, जो मोहम्मद गोरी के हाथों पृथ्वीराज चौहान की पराजय के बाद लोहार बन गए‌.इनकी परंपराओं के अनुसार, भगवान राम के काल में चकरेली नामक एक कबीला था जिनका पारंपरिक व्यवसाय तलवार और ढाल बनाना था. चकरेली राजस्थान के चित्तौड़ में निवास करते थे. इनके पूर्वज आक्रमणकारियों के भय से हरियाणा की ओर भाग गए, और इन्हीं के के वंशज सिकलीगर नाम से जाने जाने लगे.पंजाब में निवास करने वाले सिकलीगर इस बात का दावा करते हैं कि इनके पूर्वज मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले थे, जहां वह तलवारें बनाया करते थे. बाद में वह राजस्थान से अगर पंजाब में बस गए और सिख धर्म में परिवर्तित हो गए.


References;
(a). Lal, R. B.; Padmanabham, P. B. S. V.; Krishnan, G.; Mohideen, M. Azeez, eds. (2003). People of India Gujarat Volume XXI Part Three. State series. Singh, Kumar Suresh (General Editor). Mumbai: Popular Prakashan, for the Anthropological Survey of India. pp. 1287–1291. ISBN 9788179911068.

(b). Bansal, I. J. S.; Singh, Swaran, eds. (2003). People of India Punjab Volume XXXVII. State series. Singh, Kumar Suresh (General Editor). New Delhi: Manohar, for the Anthropological Survey of India. pp. 410–414. ISBN 9788173041235.

(c ). Sharma, M. K.; Bhatia, A. K., eds. (1994). People of India Haryana Volume XXIII. State series. Singh, Kumar Suresh (General Editor). New Delhi: Manohar, for the Anthropological Survey of India. pp. 453–459. ISBN 9788173040917.

(d). Judge, Paramjit S.; Bal, Gurpreet (1996). Strategies of social change in India. M.D. Publications. p. 54. ISBN 978-81-7533-006-1. Retrieved 21 March 2012.

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(f). Title: The Tribes and Castes of the Central Provinces of India–Volume I (of IV)
Author: R.V. Russell

(g).
https://www.bhaskar.com/local/chhattisgarh/raipur/jagdalpur/news/satnam-kaur-of-bastar-is-the-first-girl-from-the-nomadic-sikligar-community-in-the-state-who-is-pursuing-her-graduation-129642637.html

(h).
https://zeenews.india.com/hindi/zee-hindustan/odd-news/rajasthan-police-went-to-madhya-pradesh-and-arrested-sikligar-artisan-who-made-weapons/595957

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