Sarvan Kumar 28/09/2021
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Last Updated on 30/09/2021 by Sarvan Kumar

डॉ. रामेश्वर दत्त शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक ‘‘ब्राह्मण समाज परिचय एवं योगदान’’ के मुखपृष्ठ पर अंकित ब्रह्मरूपी वृक्ष में 14 शाखाएं हैं और इन चौदह शाखाओं में अलग-अलग ब्राह्मणों का वर्णन किया गया है। इस प्रकार ब्राह्मणों के कुछ 54 भेद हुए। जब ब्राह्मण एक जाति बन गई तो उनकी पहचान के लिए उनके वेद, शाखा, सूत्र गोत्र, प्रवर आदि पहचान कारक माने गए। यह क्रम मध्‍यकाल तक चलता रहा। तदन्‍तर ब्राह्मणों के भेद उनके प्रदेशों के आधार पर गठित किए गए।  पं. छोटेलाल शर्मा ने अपने ब्राह्मण निर्णय में ब्राह्मणों के 324 भेद लिखे हैं। ब्‍लूम फील्‍ड के अनुसार ब्राह्मणों के 2500 भेद हैं। शेरिंग सा‍हब के अनुसार ब्राह्मणों के 1782 भेद हैं, कुक साहब के अनुसार ब्राह्मणों के 924 भेद हैं, जाति भास्‍कर आदि ग्रन्‍‍थों के अनुसार ब्राह्मणों के 51 भेद हैं। आइए जानते है कुछ ब्राह्मणों के प्रकार।

Iyengar Brahamin 1855
Image : Wikimedia Commons

ब्राह्मणों के प्रकार

क्षेत्र के आधार पर ब्राह्मणों के भेद

पुराणों के अनुसार ब्राह्मणों( Brahamins) के दो भेद हैं पंचद्रविड और पंचगौड़। यह भेद क्षेत्र के आधार पर बनाया गया दक्षिण भारत के ब्राह्मण( Brahamin) पंचद्रविड कहलाए और उत्तर भारत के पंचगौड़। पंचद्रविड और पंचगौड़ के फिर से पांच- पांच भेद है।

पंचद्रविड ब्राह्मण के भेद

स्कन्दपुराणके अनुसार विन्ध्याचल के दक्षिण में मूलतः वैदिक वर्णाश्रमधर्मावलम्वि जनके एक ब्राह्मण समुह रहते है जिनको पंचद्रविड कहते हैं।

1. द्राविडा

2. कार्णाटका( कर्णाटक में रहने वाले)

3. तैलंगा( तेलंगाना, आँध्रप्रदेश में रहने वाले)

4.गौर्जरा (गुजरात में रहने वाले)

5. महाराष्ट्रा (महाराष्ट्र् में रहने वाले)

पंचगौड़ ब्रह्माण के भेद

पंचगौड़ में पाँच ब्राह्मणों को सम्मिलित किया जाता है। ‘पंचगौड़’ विभाग स्कंदपुराण के ‘सह्याद्रि खंड’ में मिलता है और किसी भी प्राचीन ग्रंथ में इसका उल्लेख नहीं है। इन ब्राह्मणों में जो शामिल किये जाते हैं, वे हैं-

  1. सारस्वत (सरस्वती नदी के आसपास रहने वाले)
  2. कान्यकुब्ज (कन्नौज के आसपास के क्षेत्र में रहने वाले)
  3. मैथिल (मिथिला में रहने वाले)
  4. उत्कल (उड़ीसा में रहने वाले)
  5. गौड़ (शेष भाग में रहने वाले)

शाखा भेद के कारण भी ब्राह्मण अनेक हैं। इनमें संकर (Hybrid) जाति के भी ब्राह्मण शामिल हो गए हैं। सबको मिलाकर इनकी संख्या मोटे रूप में 115 है। सूक्ष्म विश्लेषण करने पर 230 के लगभग हैं। उपशाखा भी मिला लें तो 300 हो जाते हैं।

कुछ ब्राह्मणों के प्रकार

1 -गौड़ ब्राह्मण। 2-मालवी गौड़ ब्राह्मण। 3-श्री गौड़ ब्राह्मण। 4-गंगापुत्र गौड़ ब्राह्मण। 5-हरियाणा गौड़ ब्राह्मण। 6-वशिष्ठ गौड़ ब्राह्मण। 7-शोरथ गौड़ ब्राह्मण। 8-दालभ्य गौड़ ब्राह्मण। 9-सुखसेन गौड़ ब्राह्मण। 10-भटनागर गौड़ ब्राह्मण। 11-सूरजध्वज गौड़ ब्राह्मण (षोभर)। 12-मथुरा के चौबे ब्राह्मण।13-वाल्मीकि ब्राह्मण। 14-रायकवाल ब्राह्मण। 15-गोमित्र ब्राह्मण। 16-दायमा ब्राह्मण। 17-सारस्वत ब्राह्मण। 18-मैथिल ब्राह्मण। 19-कान्यकुब्ज ब्राह्मण। 20-उत्कल ब्राह्मण। 21-सरवरिया ब्राह्मण। 22-पराशर ब्राह्मण। 23-सनोडिया या सनाड्य ब्राह्मण। 24-मित्र गौड़ ब्राह्मण। 25-कपिल ब्राह्मण। 26-तलाजिये ब्राह्मण। 27-खेटुवे ब्राह्मण। 28-नारदी ब्राह्मण। 29-चंद्रसर ब्राह्मण। 30-वलादरे ब्राह्मण। 31-गयावाल ब्राह्मण। 32-ओडये ब्राह्मण। 33-आभीर ब्राह्मण। 34-पल्लीवास ब्राह्मण। 35-लेटवास ब्राह्मण। 36-सोमपुरा ब्राह्मण। 37-काबोद सिद्धि ब्राह्मण। 38-नदोर्या ब्राह्मण। 39-भारती ब्राह्मण। 40-पुश्करर्णी ब्राह्मण। 41-गरुड़ गलिया ब्राह्मण। 42-भार्गव ब्राह्मण। 43-नार्मदीय ब्राह्मण। 44-नंदवाण ब्राह्मण। 45-मैत्रयणी ब्राह्मण। 46-अभिल्ल ब्राह्मण। 47-मध्यांदनीय ब्राह्मण। 48-टोलक ब्राह्मण। 49-श्रीमाली ब्राह्मण। 50-पोरवाल बनिए ब्राह्मण। 51-श्रीमाली वैष्य ब्राह्मण। 52-श्रीमाली वैष्य ब्राह्मण। 53-तांगड़ ब्राह्मण। 54-सिंध ब्राह्मण। 55-त्रिवेदी म्होड ब्राह्मण। 56-इग्यर्शण ब्राह्मण। 57-धनोजा म्होड ब्राह्मण। 58-गौभुज ब्राह्मण। 59-अट्टालजर ब्राह्मण। 60-मधुकर ब्राह्मण। 61-मंडलपुरवासी ब्राह्मण। 62-खड़ायते ब्राह्मण। 63-बाजरखेड़ा वाल ब्राह्मण। 64-भीतरखेड़ा वाल ब्राह्मण। 65-लाढवनिये ब्राह्मण। 66-झारोला ब्राह्मण। 67-अंतरदेवी ब्राह्मण। 68-गालव ब्राह्मण और (69) गिरनारे ब्राह्मण।

क्या  आपको पता है Brahamin और Brahman  में क्या अंतर है? यहाँ पढे।

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