Ranjeet Bhartiya 01/07/2022
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Last Updated on 01/07/2022 by Sarvan Kumar

यादव समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है. प्राचीन काल से ही यह समुदाय न्यायप्रिय और पराक्रमी रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं यादव का क्या अर्थ है? तो आइए जानते हैं यादव की परिभाषा.

यादव की परिभाषा

यादव का शाब्दिक अर्थ है- ‘जिसका संबंध यदु से हो यानी कि यदु के वंशज या राजा यदु के सन्तान’. यादव शब्द चन्द्रवंशी/यदुवंशी क्षत्रिय, अहीर जात का व्यक्ति और भगवान कृष्ण को संदर्भित करता है. यादव एक पौराणिक जाति है. यह एक वैदिक क्षत्रिय समुदाय है. पुराणों और महाभारत में यादवों का उल्लेख मिलता है. मान्यताओं के अनुसार, यादव प्राचीन भारत के वह लोग हैं जिनकी उत्पत्ति पौराणिक यदु से हुई है. इसीलिए यादव समाज के लोग यदु के वंशज होने का दावा करते हैं. यदु ययाति के पुत्र थे. हिंदू पौराणिक कथाओं में महाराज ययाति को एक चंद्रवंशी राजा के रूप में वर्णित किया गया है. ययाति पांडवों और यादवों के पूर्वजों में से एक थे. यादव वंश प्रमुख रूप से आभीर (वर्तमान अहीर), अंधक, व्रष्णि तथा सत्वत नामक समुदायो से मिलकर बना था, जो कि भगवान कृष्ण के उपासक थे. इन्हें प्राचीन भारतीय साहित्य मे यदुवंश के एक प्रमुख भाग के रूप मे वर्णित किया गया है. “Society and Religion: From Rugveda to Puranas” के लेखक जयंत गडकरी कहते हैं कि पुराणों के विश्लेषण से यह “लगभग निश्चित” है कि अंधका, वृष्णि, सातवत और अभीरा सामूहिक रूप से यादव के रूप में जाने जाते थे और कृष्ण की पूजा करते थे.इस समाज में कई वीर योद्धाओं और कर्मयोगियों ने जन्म लिया है. भगवान श्री कृष्ण का भी जन्म किसी महान यदुवंश में हुआ था जिनका गीता का उपदेश देकर पूरी दुनिया को दिशा देता है. पुराणों में यदुवंश को एक पवित्र वंश के रूप में वर्णित किया गया है. यदुवंश के बारे में श्री विष्णु पुराण और श्री श्रीमद्भागवत महापुराण कहा गया है कि-
“यदु वंश परम पवित्र वंश है. यह मनुष्य के समस्त पापों को नष्ट करने वाला है. इस वंश में कृष्ण नाम के निराकार परम ब्रह्म का अवतरण हुआ. यदुवंश का श्रवण करने वाला मनुष्य समस्त पापों से मुक्त हो जाता है. जहां-भगवान, सर्वोच्च आत्मा, मानव रूप में अवतरित हुए.”


References;

Williams, Monier (2005) [1899]. Sanskrit English Dictionary: Etymologically and Philologically Arranged with Special Reference to Cognate Indo-European Languages. Delhi: Motilal Banarsidass. p. 851. ISBN 978-81-208-3105-6.

Society and Religion: From Rugveda to Puranas
Jayant Gadkari

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