Ranjeet Bhartiya 01/11/2022
Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 02/11/2022 by Sarvan Kumar

जाति व्यवस्था में दो अलग-अलग अवधारणाएँ हैं-वर्ण और जाति. चार वर्ण हैं लेकिन जातियां हजारों हैं. जाति सामाजिक स्तरीकरण का एक रूप है. भारत में दलित समुदाय की एक बड़ी आबादी है और इसमें कई जातियां शामिल हैं. दलित जातियों में चमार जाति समूह की जनसंख्या बहुतायत है और चमार समुदाय सैकड़ों उपजातियों में विभाजित है. आइए जानते हैं कि जाटव और चमार में क्या अंतर है.

जाटव और चमार में अंतर

जाटव चमार की एक उपजाति है. जाटव और चमार के बीच मूलभूत अंतर यह है कि जाटव चमार की उपजाति है. इसका अर्थ यह हुआ कि सभी जाटव चमार है, लेकिन सभी चमार जाटव नहीं है. बता दें कि चमार जाति समूह में सैकड़ों उपजातियां शामिल हैं.यहां यह उल्लेख करना जरूरी है कि जाति और उप-जाति के बीच अंतर स्पष्ट नहीं है. दोनों में समान गुण होते हैं. हालाँकि, उप-जाति को एक जाति का उप-विभाजन माना जाता है. जाति का आधार सजातीय विवाह, जीवन शैली के वंशानुगत संचरण जिसमें अक्सर एक व्यवसाय, एक पदानुक्रम में अनुष्ठान की स्थिति, प्रथागत सामाजिक संपर्क और सांस्कृतिक धारणाएं शामिल है. उप-जातियों की उत्पत्ति के लिए दो अलग-अलग विचार हैं: एक, कि वे एक मूल समूह से एक विखंडन से उत्पन्न हुए हैं, और दो, वे स्वतंत्र समूहों के रूप में उभरे हैं. आमतौर पर उप-जातियों की उत्पत्ति क्षेत्रीय अलगाव, मिश्रित मूल, व्यावसायिक भेद, व्यवसाय की तकनीक में अंतर, रीति-रिवाजों की असमानता और अलग-अलग उपनामों के कारण होती है.

 जाटव और चमार का वितरण ‌( Distribution)

चमार भारत में व्यापक रूप से वितरित समुदाय है. भारत के लगभग सभी राज्यों में उनकी उपस्थिति है जहाँ इन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है. जाटव की बात करें तो चमार समुदाय की यह उपजाति मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश में पाई जाती है. इसके अलावा हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और दिल्ली में भी इनकी उपस्थिति है.

जाटव अपेक्षाकृत नया शब्द है

जाटव शब्द पहली बार सरकारी रिकॉर्ड में 1.12.1942 को अस्तित्व में आया. इससे पूर्व के सरकारी और अन्य दस्तावेजों में जाटव शब्द का उल्लेख नहीं मिलता है. वहीं, चमार एक पुराना शब्द है जिसका प्रयोग सदियों से होता आया है.

जाटव समुदाय के क्षत्रिय स्टेटस की मांग

चमार जाति समूह की अन्य उपजातियों के विपरीत, जाटव समुदाय के कुछ सदस्य दलित होने से इनकार करते हैं. वंश प्रमाण, जाटव और अन्य क्षत्रिय कुलों के बीच समानता, समान गोत्र और क्षत्रियों के समान रीति रिवाज के आधार पर यह क्षत्रिय होने का दावा करते हैं.


References:

•Delhi Ki Anusuchit Jatiyan Va Aarakshan Vyavastha

By Ramesh Chander · 2016

•A Social Force in Politics

Study of Scheduled Castes of U.P.

By M. P. S. Chandel · 1990

Advertisement
Shopping With us and Get Heavy Discount Click Here
 
Disclaimer: Is content में दी गई जानकारी Internet sources, Digital News papers, Books और विभिन्न धर्म ग्रंथो के आधार पर ली गई है. Content  को अपने बुद्धी विवेक से समझे। jankaritoday.com, content में लिखी सत्यता को प्रमाणित नही करता। अगर आपको कोई आपत्ति है तो हमें लिखें , ताकि हम सुधार कर सके। हमारा Mail ID है jankaritoday@gmail.com. अगर आपको हमारा कंटेंट पसंद आता है तो कमेंट करें, लाइक करें और शेयर करें। धन्यवाद Read Legal Disclaimer 
 

Leave a Reply