Ranjeet Bhartiya 04/11/2022
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Last Updated on 05/11/2022 by Sarvan Kumar

जाटव, जिन्हें जाटिया भी कहा जाता है, चमार जाति समूह के तहत एक उपसमूह है. चमार जाति समूह में सैकड़ों उपजातियां पाई जाती हैं, जो विभिन्न प्रकार के उपनामों का उपयोग करती हैं. आइए इसी क्रम में जाटव जाति के सरनेम के बारे में जानते हैं.

जाटव जाति के सरनेम

भारत में जातियों-उपजातियों की संरचना और बनावट एक जटिल विषय है. रविदास, जैसवार, कुरील, पुलिया, दोहरे, अहिरवार, गुलिया, रैदासी, जाटव आदि चमार जाति समूह की हीं विभिन्न शाखाएँ हैं. इन सभी उप-समूहों में व्यवसाय, जीवन शैली, परंपराओं, भोजन की आदतों, शैक्षिक स्तर, आर्थिक स्थिति, सामाजिक दबदबे और राजनीतिक प्रभाव आदि के संदर्भ में अंतर देखा गया है. जाटवों की बात करें तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश, खासकर मेरठ और आसपास के इलाकों में उनका दबदबा रहा है. शिक्षा के क्षेत्र में इस समूह ने काफी तरक्की की है और सरकारी नौकरियों में इनका प्रतिनिधित्व बढा है. उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह समूह काफी प्रभावशाली माना जाता है. जातिगत भेदभाव भारत की सबसे बड़ी सामाजिक बुराइयों में से एक है, यह आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में असमानता पैदा करता है. यह हमारी प्रगति में एक शक्तिशाली सामाजिक बाधा के रूप में कार्य कर रहा है. जातिवाद का प्रभाव लोगों के नामों और उपनामों पर भी रहा है. समाज के उच्च वर्गों के नाम आमतौर पर भारी भरकम और सम्मानजनक होते हैं. युगों तक, निम्न जातियों और वर्गों के लोगों को सुरुचिपूर्ण, शास्त्रीय, ‘सम्मानजनक’ नाम रखने से रोका जाता था, जिन्हें उच्च जातियों और वर्गों के अधिकार के रूप में देखा जाता था. जाटव जाति के सरनेम की बात करें तो-

•ऊपर की ओर गतिशील दलित व्यक्ति और परिवार, भेदभावपूर्ण जाति व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करते हुए, अक्सर ‘तटस्थ’ उपनाम ग्रहण करते थे, जो मूल स्थानों या अचिह्नित प्रशासनिक या सामाजिक पदों से बंधे होते थे, जो उनकी जाति की पृष्ठभूमि को तुरंत प्रकट नहीं करते थे. जाटव जाति के लोग कई न्यूट्रल सरनेम का प्रयोग करते हैं जैसे कि कुमार, कुमारी, लाल, प्रसाद इत्यादि.

•इनमें से कई जाटव सरनेम लगाते हैं.

•इनमें से कई अपने को क्षत्रिय वंश से जोड़कर अपने नाम के सामने सिंह लगाते हैं.

• इनमें से कुछ अपने उपनाम के रूप में पिप्पल, कर्दम, केन, निम, पिपरिया, राम, गौतम आदि का उपयोग करते हैं.


References:

•Rajasthan Part 1, 1998

Publisher:Popular Prakashan

Editors:B. K. Lavania, K. S. Singh

Contributor:Anthropological Survey of India

•Apne Apne Pinjare -2

By Mohandas Naimisharay · 2013

•Subaltern Citizens and Their Histories

Investigations from India and the USA

2009

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