Ranjeet Bhartiya 03/03/2022
माता रानी ये वरदान देना,बस थोड़ा सा प्यार देना,आपकी चरणों में बीते जीवन सारा ऐसा आशीर्वाद देना। आप सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएं। नव दुर्गा का पहला रूप शैलपुत्री देवी का है। ये माता पार्वती का ही एक रूप हैं हिमालयराज की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री भी कहा जाता है। नवरात्रि के पहले दिन मां के शैलपुत्री रूप का पूजन होता है. Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 03/03/2022 by Sarvan Kumar

कुणबी या कणबी (Kunbi or Kanbi) भारत में पाया जाने वाला एक जातीय समुदाय हैं. मूल रूप से, “कुणबी” शब्द पश्चिमी भारत में पारंपरिक किसान जातियों के लिए प्रयोग किया जाने वाला एक सामान्य शब्द है. इनमें विदर्भ के धोनोजे (Dhonoje), घटोले (Ghatole), हिंद्रे (Hindre), जादव (Jadav), झारे (Jhare), खैरे (Khaire), लेवा या लेवा पाटिल (Lewa or Leva Patil), लोनारे (Lonare) और तिरोले (Tirole) समुदाय शामिल हैं. R.V. Russell ने अपनी किताब “The Tribes and Castes of the Central Provinces of India” में इन्हें मराठा देश के एक महान कृषक जाति के रूप में वर्णित किया है. Russell के अनुसार, इस कृषक जाति समुदाय को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. इन्हें दक्कन में कुणबी या कुलंबी, दक्षिण कोंकण में कुलवाड़ी, गुजरात में काणबी और कर्नाटक के बेलगाम में कुलबी नाम से जाना जाता है. उत्तर भारत की कृषक जाति कुर्मी और कुणबी में काफी समानताा है. आइए जानते हैं कुणबी समाज का इतिहास , कुणबी की उत्पति कैसे हुई?

कुणबी समाज एक परिचय

कैटेगरी: भारत सरकार के सकारात्मक भेदभाव की व्यवस्था आरक्षण के अंतर्गत इन्हें महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (Other Backward Class, OBC) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.

पॉपुलेशन, कहां पाए जाते हैं: यह मुख्य रूप से  महाराष्ट्र और महाराष्ट्र के आसपास के राज्यों में निवास करते हैं. महाराष्ट्र में इनकी बहुतायत आबादी है. महाराष्ट्र के अलावे‌; गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, केरल और गोवा में भी इनकी उपस्थिति है. गुजरात में यह मुख्य रूप से डांग, सूरत और वलसाड जिलों में पाए जाते हैं.

धर्म: अधिकांश कुणबी हिंदू धर्म का पालन करते हैं. यह दशहरा, दिवाली, होली और गणेशचतुर्थी आदि हिंदू त्योहारों को बड़े धूमधाम से मनाते हैं.

कुणबी शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई?

कुणबी शब्द की उत्पत्ति के बारे में अनेक मान्यताएं हैं, जिनके बारे में विस्तार से नीचे बताया जा रहा है.

पहली मान्यता: भौतिक मानवशास्त्र तथा सांस्कृतिक मानवशास्त्र के क्षेत्र में कार्यरत, संस्‍कृति मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली सर्वोच्च भारतीय सरकारी अनुसंधान संगठन,  “भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण (Anthropological Survey of India,AnSI)” के अनुसार, कुणबी शब्द की उत्पत्ति “कुण”+बी” से हुई है. “कुण” शब्द का अर्थ होता है- “लोग” और “बी” शब्द का अर्थ होता है- “बीज”. संयुक्त रुप से, दोनों शब्दों का अर्थ है-“वे जो एक बीज से अधिक बीज अंकुरित करते हैं”.

दूसरी मानयता:  “कुणबी” शब्द की उत्पत्ति मराठी भाषा के शब्द “कुनबावा” या संस्कृत के शब्द “कुर” से हुई है, जिसका अर्थ होता है- ‘कृषि या खेती के लिए जुताई”.

तीसरी मानयता : “कुणबी” शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा के शब्द कुटुम्ब (“परिवार”) या कुटुम्बिका (गृहस्थ) से हुई है.

चौथी मानयता: “कुणबी शब्द की  उत्पत्ति द्रविड़ मूल “कुल” से हुई है, जिसका अर्थ होता है- “किसान या मजदूर”.

श्रीमंत छत्रपति शिवाजी महाराज – कुणबी लोगों के आदर्श-
Image: Wikimedia Commons

कुणबी समाज का इतिहास

कुणबी समाज का इतिहास अत्यंत ही समृद्ध और गौरवशाली रहा है. यह समुदाय अपने वीरता और पराक्रम के लिए जाना जाता है. चौदहवीं शताब्दी में और बाद में, कई कुणबी विभिन्न शासकों की सेनाओं में सैनिक के रूप में कार्यरत थे. शिवाजी के अधीन मराठा साम्राज्य की सेनाओं में सेवारत अधिकांश मावला इसी समुदाय से थे. कहा जाता है कि छत्रपति शिवाजी महाराज को अपनी सैन्य शक्ति मुख्य रूप से मावल क्षेत्र के कुनबी मावले से  प्राप्त होती थी. बता दें कि मावला मावल क्षेत्र के निवासियों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है. मराठा साम्राज्य के शिंदे और गायकवाड़ राजवंश मूल रूप से कुनबी मूल के हैं. वर्तमान में, एक जमींदार जाति होने के कारण कुणबी महाराष्ट्र में काफी प्रभावशाली हैं. महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में कुणबी‌, तेली और माली के साथ 50% मतदाताओं की रचना करते हैं और राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यहां यह चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए जाने जाते हैं. उत्तर भारत की कृषक जाती कुर्मी और कुणबी में काफी समानताा है

कुणबी जाति के  प्रमुख व्यक्ति

संत तुकाराम महाराज-17 वीं शताब्दी के महाराष्ट्रीयन संत

गुलाबराव महाराज-खुद अंधे होते हुए भी लोगों को जीवन का दर्शन देने वाले महान संत

संदीप पाटिल– पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी

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References;

The Tribes and Castes of the Central Provinces of India, By R.V. Russell

J. S. Grewal, ed. (2005). The State and Society in Medieval India. Oxford University Press. p. 226.

Ramusack, Barbara N. (2004). The Indian Princes and their States. The New Cambridge History of India. Cambridge University Press. pp. 35–36. ISBN 9781139449083.

Singh, Kumar Suresh (2003), Gujarat, People of India. Volume XXII, Part 1, Anthropological Survey of India, ISBN 978-81-7991-104-4, retrieved 5 October 2011

Balfour, Edward (1885), The Cyclopædia of India and of Eastern and Southern Asia, Commercial Industrial, and Scientific: Products of the Mineral, Vegetable, and Animal Kingdoms, Useful Arts and Manufactures, Bernard Quaritch

Dhar, P. (2004), Bhanu, B.V.; Bhatnagar, B.R.; Bose, D.K.; Kulkarni, V.S.; Sreenath, J. (eds.), People of India: Maharashtra, People of India, vol. 2, Anthropological Survey of India, ISBN 81-7991-101-2, retrieved 5 October 2011

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