Last Updated on 13/03/2023 by Sarvan Kumar
दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक भारत अपनी समृद्ध विरासत, परंपराओं और रीति-रिवाजों के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है. भारतीय विरासत की विशेषताएं इसकी कला, शास्त्रीय संगीत, शास्त्रीय नृत्य, जन्मजात धर्मनिरपेक्ष दर्शन और आध्यात्मिक ज्ञान में निहित है. प्राचीन मंदिर, वास्तुकला, इमारतें और स्मारक हमें हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की याद दिलाते हैं.आइए इसी क्रम में जानते हैं महाराजा सुहेलदेव स्मारक के बारे में.
महाराजा सुहेलदेव स्मारक
जो राष्ट्र अपने अतीत को भूल जाता है वह अपने सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का निर्माण नहीं कर सकता. इतिहास हमें अतीत के उन वीर नायकों के बारे में बताता है जिन्होंने तमाम संघर्षों और चुनौतियों का सामना करते हुए अपने त्याग और बलिदान से हमें इस वर्तमान स्थिति तक पहुंचाया है. स्मारक किसी भी देश के लिए खजाने और प्रकाश पुंज की तरह होते हैं. स्मारक गर्व के प्रतीक हैं जो हमें वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने का आत्मविश्वास देते हैं. स्मारकों का उपयोग अतीत की महत्वपूर्ण घटनाओं और गौरव के क्षणों को याद करने तथा प्रमुख व्यक्तियों के प्रति सम्मान दिखाने के लिए किया जाता है.
महाराजा सुहेलदेव कौन थे?
मुख्य विषय पर आने से पहले महाराजा सुहेलदेव के बारे में संक्षेप में जान लेते हैं. महाराजा सुहेलदेव 11वीं शताब्दी में श्रावस्ती के पराक्रमी शासक और योद्धा थे. 11वीं शताब्दी में नेपाल की सीमा से सटे राज्यों में विदेशी आक्रमणकारियों के हमला कर दिया. महाराजा सुहेलदेव ने अवध के बहराइच जिले में विदेशी आक्रांता से युद्ध किया और महमूद गजनवी के भतीजे सालार मसूद को मार डाला. उत्तर प्रदेश में अवध और तराई क्षेत्र से लेकर पूर्वांचल तक महाराज सुहेलदेव की वीरता की गाथा मिथकों और कथाओं के रूप में आम जनता में प्रचलित है. सुहेलदेव की जाति के बारे में पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है और इस मामले को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है. कोई उन्हें राजभर तो कोई पासी जाति का बताता है. राजभर समाज के लोग राजा सुहेलदेव को सम्मान का प्रतीक मानते हैं. महाराजा सुहेलदेव स्मारक की बात करें तो इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है. यह स्मारक बहराइच जिले के चित्तौरा झील के किनारे 45 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा है. वर्ष 2021 में बसंत पंचमी के अवसर पर 16 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से महाराजा सुहेलदेव स्मारक का शिलान्यास किया था. महाराजा सुहेलदेव स्मारक स्थल के निर्माण के लिए महाराजा सुहेलदेव मेमोरियल ट्रस्ट कमेटी का गठन किया गया है. पयागपुर राज परिवार के राजा यशवेंद्र बिक्रम सिंह ने सरकार को 84 बीघा जमीन उपलब्ध कराई है. इसके तहत मीटिंग हॉल, गेस्ट हाउस, पक्का घाट भी बनाया जाएगा. 40 फीट की विशाल कांस्य प्रतिमा भी लगाई जाएगी. सरकार का कहना है कि महाराजा सुहेलदेव का देश के प्रति समर्पण और सेवा सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है. इस स्मारक स्थल के निर्माण और विकास से देश महाराजा सुहेलदेव की वीर गाथाओं से और अच्छी तरह परिचित होगा.
