Ranjeet Bhartiya 11/08/2022
नहीं रहे सबके प्यारे ‘गजोधर भैया’। राजू श्रीवास्तव ने 58 की उम्र में ली अंतिम सांस। राजू श्रीवास्तव को दिल का दौरा पड़ा था जिसके बाद से वो 41 दिनों से दिल्ली के एम्स में भर्ती थे। उनकी आत्मा को शांति मिले, मुझे विश्वास है कि भगवान ने उसे इस धरती पर रहते हुए जो भी अच्छा काम किया है, उसके लिए खुले हाथों से स्वीकार करेंगे #RajuSrivastav #IndianComedian #Delhi #AIMS Jankaritoday.com अब Google News पर। अपनेे जाति के ताजा अपडेट के लिए Subscribe करेेेेेेेेेेेें।
 

Last Updated on 11/08/2022 by Sarvan Kumar

देश में कुर्मी समाज की एक अलग ही पहचान है. आजादी की लड़ाई के साथ राष्ट्र निर्माण में इस समाज के लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. इस समुदाय के लोग पूरे भारत में निवास करते हैं. इनके उपनाम में भी बहुत विविधता है. इस समुदाय के लोग अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग उपनामों का इस्तेमाल करते हैं. आइए जानते हैं महाराष्ट्र में कुर्मी जाति के उपनाम के बारे में.

महाराष्ट्र में कुर्मी किस नाम से जाने जाते हैं?

कुर्मी एक विशाल समुदाय है. अलग-अलग प्रांतों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है. महाराष्ट्र में कुर्मी कुनबी के नाम से जाने जाते हैं. जॉन विल्सन के अनुसार कुर्मी, कुनबी और कुम्बी एक हीं रूपांतरित नाम है. बता दें कि जॉन विल्सन (11 दिसंबर 1804-1 दिसंबर 1875) एक स्कॉटिश ईसाई मिशनरी, प्राच्यविद् और बॉम्बे प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत में शिक्षक थे. महाराष्ट्र में कुर्मी समुदाय का एक सामाजिक संगठन है- “महाराष्ट्र कुर्मी क्षत्रिय समाज”. इस संगठन के आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस सामाजिक संस्था का पंजीकरण 21 अगस्त 1978 को धर्मदा आयुक्त कार्यालय में “बंबई कुनबी समाज” नाम से करवाया गया था. बाद में लोगों के आग्रह पर 27 जनवरी 1982 को एक आम सभा में “बंबई कुनबी समाज” का नाम बदलकर “महाराष्ट्र कुर्मी क्षत्रिय समाज” कर दिया गया. कुर्मी समुदाय के महापुरुषों के बारे में समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से “महाराष्ट्र कुर्मी क्षत्रिय समाज” द्वारा लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती बड़े धूमधाम से मनाई जाती है.

कुर्मी नायक के रूप में शिवाजी महाराज

शिवाजी महाराज को एक महान योद्धा और मराठा समुदाय के गौरव के प्रतीक के रूप में जाना जाता है. महापुरुषों को जाति के दायरे में नहीं बांधा जा सकता. लेकिन जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से ऐतिहासिक तथ्यों को सच्चाई से बताना भी जरूरी है. शिवाजी भोंसले (कुनबी) ‌वंश के मराठा परिवार के थे. भोंसले मराठा कबीले प्रणाली के भीतर एक प्रमुख समूह हैं. इस प्रकार से छत्रपति शिवाजी महाराज कुर्मी परिवार से ताल्लुक रखते थे. शिवाजी ने औरंगजेब का कड़ा प्रतिरोध किया. उन्होंने पश्चिम में ना केवल मुगलों के बढ़ते प्रभाव को रोका बल्कि एक मजबूत मराठा साम्राज्य को भी स्थापित किया. लगभग पूरे उत्तर भारत, पूर्व में उड़ीसा तथा अविभाजित बिहार तक मराठों का प्रभाव था. बिहार में निवास करने वाले घमैला कुर्मी 1740 के आसपास महाराष्ट्र से आकर बिहार में बस गए.

महाराष्ट्र में कुर्मी जाति के उपनाम

महाराष्ट्र में निवास करने वाले कुर्मी अनेक नामों का प्रयोग करते हैं. मराठा कुनबी (जिन्हें उत्तर भारत में कुर्मी के नाम से भी जाना जाता है) पवार, शिंदे आदि लोकप्रिय उपनामों का प्रयोग करते हैं. मराठों के प्रमुख उपनाम इस प्रकार हैं- आंग्रे, आंगणे, इंगले, कदम, काले, काकड़े, खंडागले, खैर, चालुक्य, गुजर, गायकवाड़, घाटगे, चव्हान,देशमुख, जगताप, जगदले, जाधव, ढमाले, ढवले, ठाकुर, भोवारे, भोगले, मधुरेमहाडिक, महावर, मोरे, मोहिते, राणे, राऊत, बाघ ,लाड, सिलारे, शंखपाल, शिंदे, शिरके, सावंत, सुरवे, सिसोद, क्षीरसागर, थोटे, थोरात, दलवी, दाभोड़े, पवार, परिहार, पानसरे, पांढर, पिंगले, फाटक, बागवे, बान्डे, भागवत, भोंसले, निकम, देवकान्ते, अहिरराव, धर्मराज आदि.


References;

•Coinage of the Bhonsla Rajas of Nagpur

Prashant P. Kulkarni

•History, Kenneth Pletcher Senior Editor, Geography and (15 August 2010). The History of India. The Rosen Publishing Group, Inc. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9781615301225.

•V. B. Kulkarni (1963). Shivaji: The Portrait of a Patriot. Orient Longman.

•Singh K S (1998). India’s communities. Oxford University Press. p. 2211. ISBN 978-0-19-563354-2.

•https://navbharattimes.indiatimes.com/metro/mumbai/other-news/maharashtra-kurmi-kshatriya-samaj-society-18/articleshow/63320601.cms

•http://maharashtrakurmisamaj.com/

•https://www.jagran.com/uttar-pradesh/varanasi-city-chhatrapati-shivaji-coronation-was-done-by-pandit-gagabhatta-of-kashi-jagran-special-22477146.html

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