Ranjeet Bhartiya 30/11/2022

भारतीय समाज की सामाजिक संरचना में जातियों का विशेष महत्व है. भारत में हजारों जातियां निवास करती हैं जो विभिन्न मापदंडों पर एक दूसरे से भिन्न हैं. कुछ जातियां ऐसी भी होती हैं जिनमें काफी समानताएं होती हैं. उदाहरण के लिए त्यागी और भूमिहार. यहां हम इन दोनों जातियों की समानता का उल्लेख करते हुए, […]

Ranjeet Bhartiya 29/11/2022

“LIFE IS NEVER BLACK OR WHITE. IT’S ALWAYS IN THE SHADES OF GREY.” अर्थात, जीवन में बहुत सी चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें हम सही या गलत के संदर्भ में परिभाषित नहीं कर सकते हैं. बाहुबलियों की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. बाहुबली किसी के लिए मसीहा होते हैं तो किसी के लिए अपराधी. […]

Ranjeet Bhartiya 28/11/2022

भूमिहार भारत में रहने वाली एक बहुत प्रभावशाली जाति है. इनके प्रभाव के पीछे कई कारण हैं, लेकिन एक महत्वपूर्ण कारण यह है कि इस जाति के लोगों ने विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में, और देश की आजादी के बाद राजनीति, सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों, समाज सुधार और साहित्य के […]

Ranjeet Bhartiya 27/11/2022

बिहार में जाति आधारित हिंसा (Caste based violence) का एक लंबा इतिहास रहा है. यह जाति संघर्ष मुख्य रूप से गरीब और भूमिहीन निचली जातियों (Lower Castes) तथा अगड़ी जातियों  (Forward Castes) के बीच होता आया है, जिनका परंपरागत रूप से भूमि के विशाल हिस्से पर नियंत्रण रहा है. लेकिन ऐसे कई मौके भी आए […]

Ranjeet Bhartiya 26/11/2022

स्वतंत्र लेखक प्रसन्न चौधरी और पत्रकार श्रीकांत की किताब ‘बिहार सामाजिक परिवर्तन के कुछ आयाम’ में इस घटना का विस्तार से जिक्र है। साल था 1925। बिहार में निचली समझी जाने वाली जातियां एक जगह जुटती थीं और सभी एक साथ जनेऊ धारण करते थे। इसे बिहार में ऊंची समझी जाने वाली जातियों ने खुद […]