Ranjeet Bhartiya 24/09/2022

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि भारत आज भी जातिगत भेदभाव और छुआछूत जैसी समस्याओं से जूझ रहा है. जातिवादी मानसिकता भारत के विकास में सबसे बड़ी रुकावट है. जातिवाद और छुआछूत सभ्य समाज के माथे पर एक कलंक है. जातिवाद के कारण इंसान के प्रति ना केवल असंवेदनशील बन जाता है,‌ […]

Sarvan Kumar 23/09/2022

सावित्रीबाई फुले 3 जनवरी,1831 में महाराष्ट्र के नायगांव में पैदा हुई थीं। उनका जन्म माली समुदाय में हुआ था, जिन्हें भारतीय जाति व्यवस्था की वर्ण व्यवस्था में शूद्र माना जाता था। इस समाज के लोग अधिकतर माली और फूलवाले की तरह काम करते थे। इस वजह से उन्हें बहुत बार भेदभाव का सामना करना पड़ा. […]

Ranjeet Bhartiya 22/09/2022

चिराग पासवान (Chirag Paswan) एक भारतीय राजनीतिज्ञ, पूर्व अभिनेता और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष हैं. पासवान दुसाध जाति से आते हैं. बिहार में दुसाध समुदाय (Dusadh) की अच्छी खासी आबादी है और इसे राजनीतिक रूप से अत्यंत ही प्रभावशाली माना जाता है. चिराग पासवान की छवि एक आक्रामक और महत्वाकांक्षी नेता के रूप […]

Ranjeet Bhartiya 21/09/2022

बनिया शब्द का उपयोग वैश्यों की सामाजिक-सांस्कृतिक वर्ग को संदर्भित करने के लिए किया जाता है, जो पुजारियों /विद्वानों (ब्राह्मणों),  योद्धाओं /शासकों (क्षत्रिय) के बाद और मजदूर/ वर्ग (शूद्रों) के ऊपर, तीसरे स्थान पर आते हैं. वैश्य एक वर्ग का गठन करते हैं जो विभिन्न जातियों द्वारा निर्मित है. मोढ बनिया/मोध वाणिक वैश्य समुदाय के […]

Ranjeet Bhartiya 20/09/2022

बनिया शब्द का प्रयोग व्यापक रूप से भारत के पारंपरिक व्यापारिक जातियों या बिजनेस समुदाय के सदस्यों लिए किया जाता है. इस प्रकार इस शब्द का प्रयोग व्यापारी, दुकानदार, साहूकार और बैंकर आदि के लिए किया जाता है. आइए जानते हैं बनिया कितने प्रकार के होते हैं? बनिया कितने प्रकार के होते हैं मनुष्य के […]